Suresh Raina: Team India should win World Cup 2019 for MS Dhoni as We did for Sachin Tendulkar in 2011

भारतीय टीम को 2011 विश्व कप जिताने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के 2019 विश्व कप के बाद अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की काफी चर्चा हो रही है। इंग्लैंड में आयोजित आईसीसी टूर्नामेंट को धोनी का आखिरी विश्व कप माना जा रहा है। ऐसे में भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना चाहते हैं टीम इंडिया धोनी को खिताबी जीत के साथ विदाई दे, जैसा कि साल 2011 में धोनी की अगुवाई वाली टीम ने सचिन तेंदुलकर के लिए किया था।

जागरण डॉट कॉम को दिए इंटरव्यू में रैना ने कहा, “ये तो उन्हीं को पता होगा कि वो कब तक क्रिकेट खेलना चाहते हैं। मेरे लिए तो यही मायने रखता है कि जैसा हमने सचिन तेंदुलकर को 2011 विश्व कप खिताब जीतकर शानदार विदाई दी थी, कुछ वैसे ही मौजूदा भारतीय टीम को धोनी के लिए करना चाहिए।”

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रैना ने कहा कि धोनी इस विश्व कप में भारतीय मध्य क्रम में अहम बल्लेबाज की भूमिका निभाएंगे। साथ ही उनका अनुभव कप्तान विराट कोहली के काफी काम आएगा। भारतीय टीम और आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए धोनी की कप्तानी में खेलने वाले रैना का मानना है कि कागज पर कोई भी कप्तान हो, मैदान पर धोनी ही कप्तान की भूमिका में होते हैं।

रैना ने कहा, “मुझे लगता है कि वो विकेट के पीछे भी एक कप्तान की भूमिका में होते हैं। किस गेंदबाज के खिलाफ किस फील्डर को कहां रखना है, स्लिप चाहिए या नहीं चाहिए, थर्डमैन कितना फाइन रखना है, ये सब काम वो विकेटों के पीछे से करते हैं। ऐसे में भले ही कागजों पर वो कप्तान नहीं हों, लेकिन मैदान पर अभी भी वो कप्तान की भूमिका में होते हैं, क्योंकि वो विराट को अपने अनुभव से काफी मदद करते हैं। मेरा मानना है कि वो कप्तान नहीं होते हुए भी कप्तान हैं। आपने सुना होगा कि करीब-करीब सभी गेंदबाजों ने माना है कि माही के विकेटों के पीछे होने से उन्हें काफी मदद मिलती है।”

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रैना ने आगे कहा, “धोनी कही भी खेलें उनका गेम प्लान बहुत सामान्य रहता है। उनकी प्रक्रिया बहुत सही है। एक विकेटकीपर के तौर पर आपको काफी सारी बातों का ध्यान रखना पड़ता है। मेरे हिसाब से वो मानसिक और शारीरिक रूप से काफी फिट है। इंग्लैंड में उन्हें खेलने का बहुत अनुभव है। ऐसे में जब आपके पीछे एक इतना अनुभवी खिलाड़ी रहता है जिससे काफी फर्क पड़ता है। वो विकेटकीपिंग का ज्यादा अभ्यास नहीं करते हैं और ना ही मैच से पहले वो बल्लेबाजी का अभ्यास करते हैं। वो सीधे बल्लेबाजी के लिए उतरते हैं। वो अपनी चीजों को लेकर बहुत स्पष्ट हैं कि उन्हें क्या करना है, कैसे करना है।”