फरवरी में ऑस्ट्रेलिया भारत खेलेंगे बॉर्डर-गावस्कर  ट्रॉफी।  ©  Getty Images
फरवरी में ऑस्ट्रेलिया भारत खेलेंगे बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी। © Getty Images

बीसीसीआई के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तारीख और वेन्यु घोषित करने को बाद से ही भारतीय फैन्स एक बार फिर टेस्ट क्रिकेट को लेकर उत्साहित हैं। बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी क्रिेकेट के इतिहास की सबसे पुरानी टेस्ट सीरीज में से एक है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1947 के बाद से ही ये सीरीज खेली जा रही है। अगले साल फरवरी से एक बार फिर भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीमें खिताब के लिए लड़ेंगी। दर्शक इस बार ऑस्ट्रेलिया की टीम को दो दिन में दो अलग जगहों पर अलग- अलग टीमों के साथ खेलते देख सकेंगे। सुनने में यह बहुत फिल्मी लगता है पर ये सच है। बीसीसीआई के द्वारा घोषित शेड्यूल के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया 23 फरवरी को पुणे के गहुंजे स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच खेलेगी जबकि 22 फरवरी को ऑस्ट्रेलिया को श्रीलंका के खिलाफ टी20 मैच खेलना है। बीसीसीआई ने जारी किया बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का शेड्युल, पढ़ने के लिए क्लिक करें।

भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही टीमों के लिए यह सीजन काफी व्यस्त रहने वाला है। ऑस्ट्रेलिया ने हाल ही में साउथ अफ्रीका के साथ पांच वनडे मैचों की सीरीज खेली है जिसमें ऑस्ट्रेलिया 5-0 से हार गई थी और अब वह प्रोटीज के साथ टेस्ट सीरीज की तैयारी कर रही है। जिसके बाद दिसंबर में उसे कीवीज के साथ चैपल-हेडले ट्रॉफी खेलनी है। वहीं 17 दिसंबर से पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया दौरे पर है जहां दोनों टीमें तीन टेस्ट, पांच वनडे और एक टी20 खेलेंगे। दूसरी और भारत भी इस समय न्यूजीलैंड के साथ सीरीज में व्यस्त है, भारतीय टीम ने कीवी टीम को टेस्ट सीरीज में 3-0 से हराया। मौजूदा समय में चल रही वनडे सीरीज में भारत और न्यूजीलैंड एक एक मैच जीतकर बराबरी पर हैं। न्यूजीलैंड के बाद भारत को 9 नवंबर से इंग्लैड टीम के साथ पांच टेस्ट, तीन वनडे और तीन टी20 खेलने हैं। उसके बाद फरवरी में भारत और ऑस्ट्रेलिया आमने सामने होंगे। ऑस्ट्रेलिया के सामने अब यह समस्या है कि वह दो दिन में दोनों मैचों को कैसे खेले। कंगारू टीम के पास विकल्प केवल यही है कि वह दोनों मैचों में अलग टीमों को भेजे। बता दें कि श्रीलंका के साथ टी20 सीरीज ऑस्ट्रेलिया में ही खेली जानी है। 17 फरवरी से शुरू हो रही इस सीरीज में दोनों टीमें तीन टी20 मैच खेलेंगी। भारत- इंग्लैंड टेस्ट श्रृंखला में होगा डीआरएस का इस्तेमाल, क्या बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी में भी हो सकता है प्रयोग, जानने के लिए क्लिक करें।

इस वाकये के साथ एक बार फिर ये सवाल सामने आ गया है कि आखिर खिलाड़ियों पर इतने व्यस्त शेड्यूल का दबाव क्य़ों डाला जाता हैं। इससे उन्हें आराम को मौका नहीं मिल पाता है जिसका सीधा असर उनके प्रदर्शन पर पड़ता है। इससे पहले 1930 में इंग्लैंड टीम को भी कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से गुजरना पड़ा था। जब उसने वेस्ट इंडीज और न्यूजीलैंड दौरे पर टेस्ट सीरीज के लिए दो अलग टीमें भेजी थी। अब ऑस्ट्रेलिया के सामने ये सवाल है कि आखिर किस खिलाड़ी को किस टीम में शामिल करे क्योंकि दोनों ही फॉर्मेट एकदम अलग है।