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टॉम मूडी और रिचर्ड पाइबस की बेहतर थी रवि शास्त्री से प्रेजेंटेशन: सूत्र

कोच को चुनने के लिए सीएसी ने तीन मानदंडों को निर्धारित किया था जिसके आधार पर कोच का चयन किया जाना था।

user-circle cricketcountry.com Written by Devbrat Bajpai
Last Updated on - July 16, 2017 8:20 PM IST

रवि शास्त्री © Getty
रवि शास्त्री © Getty

टीम इंडिया के हेड कोच के चैप्टर ने एक नया मोड़ ले लिया है। बीसीसीआई के कुछ सूत्रों के मुताबिक, रिचर्ड पाइबस और टॉम मूडी की प्रेजेंटेशन नियुक्त किए गए टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री से बेहतर थी। बहरहाल, रवि शास्त्री इन दोनों से आगे इसलिए निकल गए क्योंकि उन्हें मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली का समर्थन प्राप्त था।

क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के सदस्य सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण को टीम इंडिया के हेड कोच की नियुक्ति की जिम्मेदारी दी गई थी। कोच को चुनने के लिए इन तीनों दिग्गज खिलाड़ियों ने तीन मानदंडों को निर्धारित किया था जिसके आधार पर कोच का चयन किया जाना था। ये थे कोच को क्रिकेट के तकनीकी पहलुओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए, भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने की दूरदर्शिता होनी चाहिए और टॉप खिलाड़ियों को सहयोग करने का पूर्व में अनुभव होना चाहिए।

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खबरों के मुताबिक शास्त्री सबसे आगे तीसरे पहलू में निकल गए जिसके चलते उनकी नियुक्ति हो गई। बीसीसीआई के सूत्रों की मानें तो टॉम मूडी और रिचर्ड पाइबस ने बेहतरीन अंदाज में प्रेजेंटेशन दी थी जो शास्त्री से काफी बेहतर थी। अनुभव की बात करें तो शास्त्री इन दोनों के आगे कहीं नहीं ठहरते थे।

[ये भी पढ़ें: जहीर खान को लगा झटका, बीसीसीआई ने नया गेंदबाजी कोच नियुक्त किया: रिपोर्ट]

बीसीसीआई सूत्र ने डीएनए को बताया, “इस जॉब के लिए सबसे बेहतरीन व्यक्ति को देखते हुए मूडी को पूरे कोचिंग स्टाफ का डायरेक्टर बनाया जाना चाहिए था और पाइबस को चीफ कोच रखा जा सकता था। लेकिन इनका चुनाव करना इन तीन जेंटलमेन के हाथ में था और उन्होंने उसे ही चुना जो उन्होंने सोचा कि टीम इंडिया के लिए बेहतर है।”

यह हर कोई जानता है कि टॉम मूडी अनुभव से भरपूर हैं क्योंकि इसके पहले वह श्रीलंका टीम के कोच रह चुके हैं और उसके पहले वह अन्य कई घरेलू क्रिकेट टीम के कोच रह चुके हैं। वह सनराइजर्स हैदराबाद के कोच भी हैं। उन्होंने कोच रहते हुए हैदराबाद को आईपीएल खिताब जितवाया। वहीं पाइबस पाकिस्तान टीम के दो बार कोच रह चुके हैं। शास्त्री ने अनिल कुंबले के कोच बनने से पहले टीम इंडिया को एक साल तक मैनेज किया और इसी दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के साथ अपने अच्छे रिश्ते बना लिए।

अधिकारियों ने कहा, “शास्त्री खराब समय के दौरान भी खिलाड़ियों के हौंसले को बढ़ा देते थे इसीलिए वह ड्रेसिंग रूम में खासे लोकप्रिय हो गए थे। इसके अलावा उन्होंने कभी खिलाड़ियों की निजी जिंदगी में दखल नहीं दी और अपने आपको मैदानी क्रियाकलापों तक ही सीमित रखा।” सूत्रों ने यह भी बताया कि शास्त्री के पास उच्च स्तर पर टीम को मैनेज करने के लिए जरूरी तकनीकी काबिलियत और अनुभव नहीं है। सूत्र ने बताया, “कौन नहीं जानता कि शास्त्री के पास उच्च स्तर पर टीम को कोच करने के लिए जरूरी तकनीकी योग्यता नहीं है। यह माना जाता है कि उन्हें ऑन फील्ड कोचिंग के लिए अपने आसपास लोगों की जरूरत होती है। यही कारण है कि इन नामों की सिफारिश हुई थी।”

सीएसी ने राहुल द्रविड़ और जहीर खान के नामों की बैटिंग और बॉलिंग कंसल्टेंट के तौर पर सिफारिश की थी ताकि वे शास्त्री का सहयोग कर सकें। हालांकि, 55 साल के शास्त्री को गेंदबाजी कोच के तौर पर भरत अरुण चाहिए थे और भारतीय खिलाड़ियों ने उन्हें हरी झंडी दिखा दी। बीसीसीआई अधिकारियों ने कहा, “यहां तक कि भारतीय खिलाड़ियों, खासतौर पर तेज गेंदबाजों ने हमसे कहा कि उन्हें अरुण के साथ अभ्यास करना अच्छा लगता है।”