Akhilesh Tripathi
पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2013 मेंआर्यन टीवी (पटना) से हुई, फिर ईनाडु डिजीटल (ईटीवी हैदराबाद) में लगभग ...Read More
Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - December 28, 2025 3:49 PM IST

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली को ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया है. करियर के दौरान अपनी रफ्तार और सटीक लाइन लेंथ के लिए मशहूर ली को मिला यह सम्मान ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान को दर्शाता है.
ब्रेट ली को शोएब अख्तर के साथ क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज गेंदबाज माना जाता है. ब्रेट ली के नाम क्रिकेट इतिहास की दूसरी सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड है. 2003 में ली ने 161.1 किलोमीटर की रफ्तार से श्रीलंका के मार्वन अट्टापट्टू को गेंद फेंकी थी, अट्टापट्टू उस गेंद पर आउट हो गए थे. शोएब अख्तर के नाम क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड है, अख्तर ने 2003 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ 161.3 किलोमीटर की रफ्तार से गेंद फेंकी थी.
ली 2003 और 2007 में वनडे विश्व कप जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं. 2008 में मशहूर एलन बॉर्डर मेडल मिलने के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलियन टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर भी चुना गया था. ली बिग बैश लीग और आईपीएल के साथ ही कई अन्य टी20 लीग में भी खेल चुके हैं.
49 साल के ली के करियर पर गौर करें तो 1999 में टेस्ट क्रिकेट से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले इस तेज गेंदबाज ने 2012 तक 76 टेस्ट मैचों की 150 पारियों में 310 विकेट लिए, 221 वनडे की 217 पारियों में 380 विकेट लिए, वहीं 25 टी20 में 28 विकेट उनके नाम दर्ज हैं.
ली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शेन वॉर्न, ग्लेन मैकग्राथ और मिचेल स्टार्क के बाद ऑस्ट्रेलिया के चौथे सबसे सफल गेंदबाज हैं. वह निचले क्रम के उपयोगी बल्लेबाज भी थे. टेस्ट में 5 अर्धशतक की मदद से 1,451 और वनडे में 3 अर्धशतक की मदद से 1,176 रन उनके नाम हैं.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाज ब्रेट ली को तेज़ गेंदबाज़ी का इतना जुनून था कि उन्होंने नौ साल की उम्र में ही 160 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार हासिल करने का लक्ष्य बना लिया था. ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल होने के बाद उन्होंने कहा कि उन्होंने उस सपने को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, और इसके लिए उन्होंने अपनी मां हेलेन को श्रेय दिया, जो एक स्प्रिंटर थीं, जिनसे उन्हें ज़रूरी जेनेटिक्स मिले.
क्रिकेट.कॉम.एयू के हवाले से ली ने कहा, वह (160 किमी प्रति घंटे) मेरे लिए किसी भी विकेट से ज़्यादा मायने रखता है जो मैंने लिया है। बेशक, टीम पहले आती है – (2003) वर्ल्ड कप जीतना, लगातार 16 टेस्ट जीतना, वह शिखर है; इसीलिए आप यह खेल खेलते हैं. उन्होंने कहा कि लेकिन व्यक्तिगत मील के पत्थर के मामले में, मेरे लिए विकेट मायने नहीं रखते थे, क्योंकि मैंने इतनी कम उम्र में ही 160 (किमी प्रति घंटे) की बाधा को पार करने का लक्ष्य तय कर लिया था. ली ने कहा कि जब आप किसी चीज़ का सपना देखते हैं, तो आप उस सपने को पूरा करने के लिए अपना जीवन समर्पित कर देते हैं, और जब वह पूरा होता है, तो यह बहुत खास होता है.
ली ने अपने करियर में दो बार 160 किमी प्रति घंटे से ज़्यादा की रफ़्तार दर्ज की. पहली बार 2003 वर्ल्ड कप में साउथ अफ्रीका में, जहां उन्होंने सेमीफाइनल में श्रीलंका के मार्वन अटापट्टू को 160.1 किमी प्रति घंटे की गेंद पर आउट किया था. फिर उन्होंने 5 मार्च, 2005 को नेपियर में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ पांचवें वनडे के दौरान 160.8 किमी प्रति घंटे की अपनी सबसे तेज़ गेंदबाज़ी की रफ़्तार दर्ज की.
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