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'खिलाड़ियों के कहने पर कोच हटाया जाना गलत मानदंड स्थापित करना'

बीसीसीआई के साथ बैठक के दौरान उनसे कहा गया कि एक सीनियर खिलाड़ी ने बताया कि था वह गेंदबाजों को नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी करने के लिए मजबूर करने करने की कोशिश करते थे।

user-circle cricketcountry.com Written by Press Trust of India
Last Updated on - July 12, 2018 7:18 PM IST

भारतीय महिला टीम को विश्व कप फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले 51 वर्षीय अरोठे को सीनियर खिलाड़ियों विशेषकर टी20 की कप्तान हरमनप्रीत कौर की शिकायत के बाद बीसीसीआई ने पद से हटा दिया था। उन्हें उनकी अभ्यास के तरीकों से शिकायत थी।

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अरोठे ने साक्षात्कार में कहा, ‘ अगर विद्यार्थियों ने शिक्षक की मौजूदगी के बावजूद अपना पाठ्यक्रम तय करना शुरू कर दिया तो मुझे नहीं लगता कि यह अच्छा है। इसी तरह से अगर केवल खिलाड़ियों के आरोपों के आधार पर कोच हटाए जाने लगे तो फिर आप गलत मानदंड स्थापित कर रहे हैं।’

अरोठे ने कहा कि खिलाड़ियों के नाखुश होने पर इस तरह से प्रशिक्षकों को लगातार हटाने से पता चलता है कि कौन गलत है।

उन्होंने कहा, ‘मेरे से पहले कोई और (पूर्णिमा राव) था जिसे इसलिए हटाया गया क्योंकि खिलाड़ी उसे नहीं चाहती थी। अब उन्हें मेरी शैली पसंद नहीं है। कल नया कोच आएगा और हो सकता कि उन्हें वह भी पसंद नहीं आए। इसलिए अगर केवल एक पक्ष को समस्या है तो इसका क्या मतलब निकलता है।’

अरोठे की प्रशिक्षण शैली पर सवाल खड़े किए गए। इसके अलावा उन पर टीम का ‘रिमोट कंट्रोल’ बनने का आरोप भी लगाए गए।

अरोठे ने हालांकि कहा कि उन पर लगाया गया प्रत्येक आरोप गलत है और जब उन्हें बुलाया गया तो उन्होंने प्रशासकों की समिति के सामने अपना पक्ष रखा था।

उन्होंने कहा, ‘ मुख्य आरोप प्रतिदिन दो अभ्यास सत्र को लेकर था। लड़कियों को एशिया कप तक कोई दिक्कत नहीं थी। यह प्रक्रिया पिछले साल के विश्व कप से पहले शुरू की गई थी। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि जो सुबह के सत्र में बल्लेबाजी या गेंदबाजी करते हैं उन्हें दोपहर या शाम के सत्र में विश्राम दिया जाता है। आप नंबर एक टीम बनना चाहते हैं और कड़ी मेहनत नहीं करना चाहते हैं। ऐसे में तो यह संभव नहीं है।’

बीसीसीआई के साथ बैठक के दौरान उनसे कहा गया कि एक सीनियर खिलाड़ी ने बताया कि था वह गेंदबाजों को नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी करने के लिए मजबूर करने करने की कोशिश करते थे।

अरोठे ने कहा, ‘मुझसे पूछा गया कि तुमने लड़कियों को नेगेटिव लाइन (लेग स्टंप की लाइन) पर गेंदबाज करने के लिए क्यों कहा। मैंने कहा कि हमारे पास मैच की रिकार्डिंग है। वीडियो की समीक्षा कीजिए और मुझे बताइए कि किस ओवर में गेंदबाज ने नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी की। जब ये आरोप लगाए गए तब कम से कम उन्हें यह सोचना चाहिए था कि टी20 में लंबे प्रारूप की तरह नेगेटिव लाइन पर गेंदबाजी करना मुश्किल है।’

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तुषार अरोठे ने कहा, ‘मिताली और झूलन का रवैया बेहद सहयोग वाला रहा और वे टीम बैठकों चर्चा के लिए तैयार रहती थींं। जहां तक हरमनप्रीत का सवाल है तो मेरे मन में उसके प्रति कोई द्वेष नहीं है। वह अच्छी क्रिकेटर है लेकिन मुझे हैरानी हुई कि जब मैंने पूछा कि किसने शिकायत की तो मुझे बताया गया कि ‘कप्तान ने बोला’। मैं उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं।’