उमेश यादव © Getty Images

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उमेश यादव जब 20 साल के थे तब उन्होंने पहली बार लेदर की गेंद से गेंदबाजी की थी। अब 9 साल के बाद वह टीम इंडिया के सबसे तूफानी गेंदबाजों में से एक हैं। उमेश यादव अन्य भारतीय गेंदबाजों से अलग हैं जो नई गेंद से कुछ गेंदें करने के बाद थक जाते हैं बल्कि उमेश को उनकी तूफानी गेंदबाजी के लिए जाना जाता है जिसमें वह स्विंग का तड़का लगाकर बल्लेबाज को खौंफ से भर देते हैं।

साल 2016/17 में उमेश यादव ने उन विकटों पर 30 विकेट निकाले जो खासतौर पर रवींद्र जडेजा और रविचंद्रन अश्विन के लिए तैयार किए गए थे। इस दौरान उन्होंने 12 टेस्ट मैच खेले और उसके बावजूद वह हमेशा फिट नजर आए। उमेश यादव को पेस से ज्यादा कुछ और रोमांचक नहीं लगता। वह तेज गेंदबाजी करने के लिए पैदा हुए और वह इसे अपना पेशा बनाकर खुश हैं।

उमेश ने बीसीसीआई टीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, “मैं हमेशा से तेज गेंदबाजी करना चाहता था। बाद में जब मैं वयस्क हो गया, मैंने महसूस किया कि आखिर तेज गेंदबाजी क्या होती है। जहां से मैं आया था वहां से आकर मौकों को प्राप्त करना कठिन था। मैंने महसूस किया कि मुझमें काबिलियत थी और मैं जानता था कि मेरे पास पेस है। भारतीय घरेलू क्रिकेट में ऐसे कई गेंदबाज हैं जो 130 से 135 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करते हैं, लेकिन मेरे पास तेज गेंदबाजी करने की क्षमता थी।” अभिनव मुकुंद ने नस्लवाद पर लोगों को लताड़ा, कहा सिर्फ गोरे ही हैंडसम नहीं होते

वैसे उमेश की यात्रा कभी आसान नहीं रही। वह चोटिल रहे, एक बार लगा कि वह भी अन्य प्रतिभाशाली गेंदबाजों की तरह गर्दिश में खो जाएंगे लेकिन उन्हें इसी बीच कोई समझने वाला मिल गया और उनकी गाड़ी ट्रेक पर आ गई। उन्होंने कहा, “शुरुआत में पेस और फिटनेस को बरकरार रखना आसान था। फिर मुझे एहसास हुआ कि मेरी पीठ में तकलीफ है। अपने शरीर का ख्याल रखना जरूरी होता है। और मैंने सोचा कि लंबे समय तक खेलना है तो अपने आपको मजबूत करना बहुत जरूरी है।”

क्रिकेट में आने से पहले उमेश रबड़ और टेनिस की गेंद से गेंदबाजी किया करते थे। उन्होंने 20 साल की उम्र में पहली बार लेदर की गेंद से क्रिकेट खेली और महज दो सालों में ही वह राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज बल्लेबाजों को दुलीप ट्रॉफी में गेंदें फेंकने लगे। रबड़ बॉल के बाद लेदर गेंद को फेंकना शुरू करना आसान था। उन्होंने बताया कि लेदर बॉल ज्यादातर व्यवहार करती है, स्विंग ज्यादा होती है और बल्लेबाज से दूर भागती है। लेंथ में थोड़ा समस्या होने लगी थी तभी उन्होंने अपनी लेंथ में नियंत्रण करने पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान कोच ने उन्हें नियंत्रण पर काम करने को कहा। उमेश ने बताया, “मैं बहुत शॉर्ट गेंदें फेंका करता था इसलिए मुझे अपने बाएं हाथ को रोकने को कहा गया मेरा हाई-आर्म एक्शन हुआ करता था। इसके बाद मैंने अपना एक्शन सुधारा।”

उमेश यादव आजकल टीम इंडिया की तेज गेंदबाजी की मोहम्मद शमी के साथ अगुआई करते हैं। जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका का दौरा करेगी तब इन गेंदबाजों पर नजरें होंगी।