पुणे के पिच क्यूरेटर स्टिंग ऑपरेशन में फंसे
पुणे के पिच क्यूरेटर स्टिंग ऑपरेशन में फंसे

बीसीसीआई की पिच समिति के पूर्व चेयरमैन वेंकट सुंदरम के लिये क्यूरेटर का पैसे के लालच में आकर भ्रष्टाचार में लिप्त होना कोई हैरानी की बात नहीं है, जिनका कहना है कि ‘कम वेतन पाने वाले मैदानकर्मी’ इस तरह की पेशकश के सामने कमजोर हो जाते हैं। पिच विशेषज्ञ होने के अलावा सुंदरम पूर्व प्रथम श्रेणी बल्लेबाज हैं जो 70 और 80 के दशक में अब निलंबित हुए पुणे के क्यूरेटर और पूर्व तेज गेंदबाज पांडुरांग सालगांवकर के खिलाफ खेलते थे।

सालगांवकर को स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े जाने के बाद निलंबित कर दिया गया। सुंदरम ने पीटीआई से कहा, ‘‘खिलाड़ी और अधिकारी बीते समय में भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं इसलिये अगला आसान निशाना क्यूरेटरों के होने की संभावना थी जिन्हें मेरी राय में मैच अधिकारियों और खिलाड़ियों की तुलना में काफी कम वेतन मिलता है। ’’ बीसीसीआई के पांच क्षेत्रीय क्यूरेटरों को करीब 50,000 रूपये प्रति महीना दिये जाते हैं जबकि राज्य संघ अपने क्यूरेटरों को सीधे भुगतान करता है और यह राशि भी कोई भारी भरकम नहीं होती। यह खिलाड़ियों और अधिकारियों को मिलने वाली राशि से काफी कम होती है।

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प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों को सालाना 12 लाख रूपये के करीब मिलते हैं जबकि अंपायर और रैफरियों को हर मैच में 20,000 रूपये के करीब दिये जाते हैं। सुंदरम ने कहा, ‘‘भारतीय क्रिकेटरों की कमाई करोड़ों में होती है, प्रथम श्रेणी खिलाड़ियों को लाख में राशि मिलती है और वे इसके हकदार भी हैं। लेकिन आपको मैदानकर्मियों को भी देखना चाहिए।’’ बीसीसीआई अनुभव के आधार पर क्यूरेटरों को 35,000 से 70,000 रूपये देता है। राज्य संघ इनमें से कुछेक को 20,000 रूपये से भी कम देते हैं।