वेंकटेश प्रसाद © Getty Images
वेंकटेश प्रसाद © Getty Images

भारतीय क्रिकेट बोर्ड से जुड़ा हुआ हितों से टकराव का मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियां बटोर सकता है। दरअसल जूनियर सिलेक्शन कमिटी के चेयरमेन वेंकटेश प्रसाद ने कर्नाटक प्रीमियर लीग में कॉमेंटेटर बनने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने बीसीसीआई से अनुमति भी नहीं ली है। प्रसाद का यह कदम उन्हें हितों के टकराव वाली समस्या में डाल सकता है और बोर्ड का मानना है कि अगर वह कॉमेंटरी करना चाहते हैं तो उन्हें एक चयनकर्ता के रूप में इस्तीफा दे देना चाहिए।

कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ ने टूर्नामेंट के छठवें एडीशन के ब्रॉडकास्ट लिए स्टार स्पोर्ट्स से करार किया है। यह टूर्नामेंट 1 से 23 सितंबर तक खेला जाएगा। प्रेस रिलीज में जिन कॉमेंटेटर की सूची जारी की गई है उसमें पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ब्रेट ली, माइक हसी, डीन जोंस और न्यूजीलैंड के डेनियल वेट्टोरी शामिल हैं। प्रसाद भारतीय क्रिकेटर्स पैनल का अंग होंगे। जिसमें उनके साथ वीबी चंद्रशेखर, सुनिल जोशी, फजल खलील, और स्पोर्ट्स प्रेजेंटर चारु शर्मा होंगी।

प्रसाद के इस कदम से बीसीसीआई अभी तक अनभिज्ञ है क्योंकि उन्होंने इसके लिए कोई अनुमति नहीं ली है। एक शीर्ष बीसीसीआई अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “वह केपीएल में कॉमेंट्री नहीं कर सकते। अगर वह करना चाहते हैं, तो उन्हें जूनियर सिलेक्शन कमिटी के चेयरमेन के पद से इस्तीफा देना होगा। नए हितों के टकराव वाले नियम लागू किए जा चुके हैं और जो लोग बीसीसीआई के कर्मचारी हैं वह किसी अन्य संगठन के अंग नहीं हो सकते।”

बीसीसीआई, खासतौर पर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने हितों के टकराव वाले मुद्दों पर जोर दिया है। एक सूत्र ने बताया, “बीसीसीआई ने हितों के टकराव वाले मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया है। राहुल द्रविड़ से कहा गया था कि वह अंडर-19 जॉब और आईपीएल में से किसी एक को चुनें। नियम साफ हैं। अगर आप बोर्ड के पे-रोल पर हैं, आप और कहीं काम नहीं कर सकते। हर किसी को अब घोषणापत्र भरना पड़ता है। प्रसाद केपीएल टीम का हिस्सा नहीं हो सकते।”

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हितों के टकराव वाले मुद्दे ने सबसे पहले तब तूल पकड़ा था जब रामचंद्र गुहा ने सीओए को दिए गए अपने त्याग पत्र में इस बात की जिक्र किया था। गुहा ने सुनील गावस्कर का उदाहरण देते हुए कहा था कि वह पीएमजी जैसी कंपनी को हेड करते हैं और यह कंपनी शिखर धवन से लेकर ऋषभ पंत जैसे क्रिकेटर्स को मैनेज करती है। साथ ही वह बीसीसीआई के कॉमेंटेटर के रूप में भी काम करते हैं। गुहा के इस पत्र के बाद राहुल द्रविड़ का मुद्दा लाइट में आया था और उन्होंने आईपीएल से अपना नाता खत्म करते हुए टीम इंडिया का जूनियर कोच बने रहना स्वीकार किया।