virat kohli has lost his aura Of invincibility and does not instill same fear In bowlers minds says former india opener aakash chopra

नई दिल्ली: पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) अपने क्रिकेट करियर के सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। कोहली ने बीते करीब तीन साल से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट (Virat Kohli Form) में कोई शतक नहीं बनाया है। कोहली जिस अंदाज में पहले बल्लेबाजी किया करते थे अब वह उसकी परछाई नजर आते हैं। कोहली ने साल 2022 में खेले 8 वनडे इंटरनैशनल में सिर्फ 175 रन बनाए हैं। चार टेस्ट मैचों में कोहली ने 31.42 के औसत से 220 रन बनाए हैं। टी20 इंटरनैशनल (Virat Kohli International Cricket Record) में भी कोहली का बल्ला बिलकुल शांत रहा है। उन्होंने चार मुकाबलों में 81 रन ही बनाए हैं। पूर्व भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपडा़ का मानना है कि विराट कोहली (Virat Kohli) का अजेय होने का जो आभामंडल था वह अब फीका पड़ रहा है और वह गेंदबाजों के जेहन में अब पहले जैसा खौफ पैदा नहीं करते।

चोपड़ा ने ईएसपीएनक्रिकइंफो में अपने कॉलम में लिखा, ‘विराट कोहली की क्लास और स्किल को लेकर किसी के भी दिमाग में कोई संदेह नहीं है। अगर वह अब इंटरनैशनल क्रिकेट में कोई भी रन न बनाएं तो भी उनकी गिनती खेल के सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ में होगी। एक ऐसा खिलाड़ी जिसने सुपरह्यूमन काम किे हैं और तीनों फॉर्मेट में ऐसा दबदबा दिखाया है जैसा कोई दूसरा खिलाड़ी नहीं कर पाया है।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘इसके बावजूद यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि वह बल्ला जो किसी जादुई छड़ी की तरह काम करता था, वह अब उनके आदेश नहीं मान रहा है। अब उन्हें कामयाबी से ज्यादा नाकामयाबी मिल रही है। अजेय होने का जो आभामंडल उनके इर्द-गिर्द था वह अब फीका पड़ता दिख रहा है और उनकी मौजूदगी से गेंदबाजों के जेहन में वह डर नजर नहीं आता जो पहले दिखाई देता था।’

कोहली ने बीते दिनों क्रिकेट से कई बार ब्रेक लिया है। ऐसा माना गया कि इससे उन्हें अपनी थकान दूर करने और फॉर्म हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि चोपड़ा इससे बहुत ज्यादा सहमत नजर नहीं आते। इस साल भारत ने कुल 21 टी20 इंटरनैशनल मुकाबले खेले लेकिन कोहली सिर्फ चार में ही टीम का हिस्सा थे। चोपड़ा ने लिखा, ‘लंबे समय से यह परंपरा रही है कि फॉर्म में आने का इकलौता जरिया यही है कि आप जितना हो सके उतना क्रिकेट खेलें। फिर चाहे वह थोड़े निचले स्तर पर ही क्यों न हो। हर कोई इसी प्रक्रिया का पालन करता रहा है। एक दशक पहले तक ऐसा ही होता था। लेकिन आजकल, खराब फॉर्म के बाद लोग खेल से ब्रेक ले लेते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूं और न ही ऐसा बनने की कोशिश कर रहा हूं। लेकिन हमें नहीं पता कि फॉर्म या आत्मविश्वास हासिल करने का सही तरीका क्या है। वक्त बदल गया है और अब समस्याओं से निपटने का तरीका शायद बदल गया हो।’