विराट कोहली © Getty Images
विराट कोहली © Getty Images

श्रीलंका टीम इस समय कठिन परिस्थिति से गुजर रही है, मैच- दर- मैच उन्हें मुंह की खानी पड़ रही है। ऐसे में उन्हें घर और बाहर हर जगह तोहमत झेलनी पड़ रही है। ऐसे वक्त में भारतीय कप्तान विराट कोहली ने श्रीलंका क्रिकेट फैंस से गुजारिश करते हुए कहा है कि इस कठिन परिस्थिति में श्रीलंकाई क्रिकेट टीम के लिए अपनी दया दिखाएं। श्रीलंका मौजूदा समय में खराब परिस्थिति से गुजर रही है। उन्हें भारत के खिलफ टेस्ट सीरीज में 3-0 से हार का सामना करना पड़ा और दांबुला में खेले गए पहले वनडे में 9 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके पहले उन्हें जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम से 3-2 से हार का सामन करना पड़ा था। वे एकमात्र टेस्ट में ही जिम्बाब्वे जैसी छोटी टीम के खिलाफ जीत दर्ज कर पाए थे।

श्रीलंका टीम के खराब प्रदर्शन की वजह से उनके क्रिकेट फैंस खासे निराश हैं। रविवार को दांबुला में फैंस ने श्रीलंका टीम के खिलफ विरोध प्रदर्शन किया और श्रीलंका टीम की बस को स्टेडियम से वापस जाने को लेकर अपनी मांग उठाई। लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा तब जाकर मामला शांत हुआ।

विराट कोहली से इस संबंध में जब अपनी बात रखने को कहा गया तो उन्होंने कहा, “मैं उनमें नहीं हूं जो खराब प्रदर्शन न करने के कारण बैठा रहूंगा और फैंस से विनती करूंगा कि वे हमारे साथ सहनशील रहें और कहूंगा, ‘बुरा व्यवहार न करें’, यह एक व्यक्तिगत चुनाव है। अगर मैं एक फैन के तौर पर मैच देख रहा हूं और मैं देखता हूं कि टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही है तो मुझे टीम पर दया आएगी। मैं पुतले नहीं जलाऊंगा। मैं दया दिखाऊंगा क्योंकि आप समझ सकते हैं कि मानवस्तर पर हर कोई पूरी ताकत से अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करता है और कोई भी वहां जाकर हारना या असफल नहीं होना चाहता। मुझे लगता है कि लोगों को अन्य लोगों को नीचे खींचने में आसानी, सुविधा और खुशी मिलती है। इस चीज को मैं समर्थन नहीं देता। मुझे पता है कि खिलाड़ियों के लिए ये चीजें देखना कठिन है लेकिन दूसरे लोग क्या कर रहे हैं आप उसे नियंत्रित नहीं कर सकते।”

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भारतीय टीम के दृष्टिकोण से बातचीत करते हुए कोहली ने कहा कि जो भी नकारात्मकता उनके सामने आती है वे उसपर ध्यान नहीं देते क्योंकि टीम का परिवर्तनकाल 2014 में शुरू हुआ था। कोहली ने कहा, “हम ऐसी चीजों को नकारते हैं और हम इसको निश्चित करते हैं कि एक ईकाई के तौर पर हम संगठित रहें ताकि हम इन चीजों से प्रभावित न हों। हम इस पोजीशन पर आपस में विश्वास पैदा करने और बाहर के लोगों की बातों के नकार पाने के कारण पहुंच पाए हैं।”