भारतीय टीम के प्रमुख बल्लेबाज विराट कोहली (Virat Kohli) के गुरुवार को विश्व कप के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट की कप्तानी से हटने के फैसले क्रिकेट जगत में हलचल है। कई पूर्व दिग्गजों ने कोहली के इस फैसले की सराहना की है, वहीं फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ी के इस अहम पद से हटने के फैसले को पचा नहीं पा रहे हैं।

भारतीय महिला टीम की पूर्व क्रिकेटर अंजुम चोपड़ा (Anjum Chopra) ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि कप्तानी एक बेहद चुनौतीपूर्ण भूमिका है। ऐसे में कोहली का ये पद छोड़ने का फैसला सराहना के ज्यादा सवाल खड़े कर रहा है।

आईएएनएस के अपने कॉलम में चोपड़ा ने लिखा, “कप्तानी स्वीकार करने का फैसला अपने साथ मौके और जिम्मेदारियां लेकर आता है, जिसे हमेशा तेज रोशनी में देखा जाता है। लेकिन इसे छोड़ने का फैसला सराहना से ज्यादा सवाल खड़े करता है। फैसला कभी भी आसान नहीं होता है और इसलिए इसे लेने वाले का अधिक सम्मान और सराहना की जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “कप्तानी, ये शब्द अपने आप में इतना शक्तिशाली है कि ये किसी को भी राय देने के लिए प्रेरित कर सकता है, चाहे वो इसके पक्ष में हो या विपक्ष में। जब विषय क्रिकेट से जुड़ा हो, तो उस पर चर्चा, विश्लेषण और राय अंतहीन हो सकती है।”

पूर्व क्रिकेटर ने लिखा, “क्रिकेट के क्षेत्र में कप्तानी संभवत: सबसे अधिक मांग में रहने वाले पदों में से एक है जो अमूल्य है। ऐसा नहीं है कि किसी अन्य खेल में कप्तानी कम महत्वपूर् है, लेकिन फैसला लेने और खेल के हर कदम पर नजर रखने की वजह से ये (क्रिकेट कप्तानी) ज्यादा सुर्खियों में रहती है।”

कप्तानी छोड़ने के पीछे की मानसिकता के बारे में उन्होंने लिखा, “तो, अगर ये इतना वांछनीय है, तो क्यों खिलाड़ी इसे छोड़ देते हैं? एक खिलाड़ी के पास ऐसा फैसला लेने के लिए पर्याप्त कारण और स्थिति होनी चाहिए। पहले के जमाने में शायद हमने कप्तानी छोड़ने के बारे में नहीं सुना होगा, लेकिन आजकल ये कोई आश्चर्यजनक बात नहीं रह गई है। हालांकि अब भी इसकी आलोचना की जा सकती है।”

उन्होंने कहा, “आगामी टी20 विश्व कप के बाद भारत की टी20 फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का फैसला लेने वाले विराट कोहली ने गुरुवार को सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि वो अपनी पीढ़ी के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले क्रिकेटर हैं। वो एक ऐसा नाम है जो पिछले एक दशक से भारतीय क्रिकेट को परिभाषित किया है।”

चोपड़ा ने आगे कहा, “कई फॉर्मेट, वर्कलोड और एक कप्तान के रूप में बढ़ती ऑफ-फील्ड जिम्मेदारियां खिलाड़ी को आराम करने के लिए कम समय देती हैं।”