अपने समय के विस्‍फोटक बल्‍लेबाज वीरेंद्र सहवाग को खेलने की शैली में परिवर्तन करने की सलाह कई दिग्‍गजों ने दी, लेकिन उन्‍होंने कभी किसी की सलाह नहीं मानी. क्रिकेट जगत में एक दिग्‍गज ऐसे भी हैं जिनकी बात सहवाग ने मानी भी और उसे मानने से वीरू को खेल में काफी फायद भी हुआ.

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16,000 से ज्यादा रन बना चुके सहवागने  बीसीसीआई के वार्षिक अवॉर्ड समारोह के दौरान ‘एमएके पटौदी स्मारक व्याख्यान’ में बोलते हुए इस संबंध में खुलासा किया. समारोह में नवाब पटौदी की पत्‍नी शर्मिला टैगोर भी मौजूद थी.

वीरेंद्र सहवाग ने नवाब पटौदी साहब के साथ अपनी यादों और मुलाकातों को साझा करते हुए कहा, ‘‘मेरा उनसे करीबी रिश्ता है. मैं उनसे पहली बार 2005-06 में मिला था, मैंने उनसे पूछा कि आपने मुझे खेलते हुए देखा है, मैं अपने खेल में कैसे सुधार कर सकता हूं.”

“उन्होंने मुझे सिर्फ एक बात कही, ‘जब आप बल्लेबाजी कर रहे होते हैं, तो आप गेंद से दूर होते हैं. यदि आप पास रहेंगे, तो आप आउट नहीं होंगे.’’

‘‘ मैंने कभी किसी की सलाह नहीं मानी है , दादा (सौरव गांगुली) भी बैठे हैं, लेकिन मैंने उनकी सलाह मानी जिसका असर यह हुआ कि मैंने टेस्ट क्रिकेट में काफी रन बनाए. इसका श्रेय उन्हें जाता है.’’