वीरेंदर सहवाग ने सौरव गांंगुली को दोबारा चुनौती दी

चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान गांगुली ने सहवाग को 100मी रेस की चुनौती दी थी लेकिन रेस किए बिना ही भारत लौट आए थे गांगुली।

Edited By : Gunjan Tripathi |Jul 17, 2017, 12:23 PM IST

Published On Jul 17, 2017, 12:23 PM IST

Last UpdatedJul 17, 2017, 12:23 PM IST

वीरेंदर सहवाग और सौरव गांगुली © Getty Images
वीरेंदर सहवाग और सौरव गांगुली © Getty Images

आपको याद होगा चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान सौरव गांगुली और वीरेंदर सहवाग के बीच 100मी रेस की शर्त लगी थी लेकिन ये रेस कभी हो नहीं सकी। हाल ही में सहवाग ने एक टीवी शो के दौरान फिर से गांगुली को इस रेस के लिए चुनौती दी। ‘वॉट द डक’ नाम के इस शो के दौरान एंकर ने जब सहवाग से पूछा कि क्या उन्होंने गांगुली को रेस के लिए चुनौती दी थी तो सहवाग ने कहा, “मैने सौरव गांगुली को चुनौती नहीं दी थी। हम दादा के साथ मजाक कर रहे थे तो मैने कहा कि विराट कोहली विकेट के बीच पर दौड़ने मे आपसे कहीं ज्यादा तेज हैं। इस बात कर दादा ने कहा कि वीरू रन से फर्क पड़ता है कौन कितना तेज दौड़ता है ये जरूरी नहीं है। अगर तुम्हें दौड़ ही देखनी है तो 20 जून को हम दोनों के ही बीच 100 मीटर की रेस लगेगी, देखते हैं कि कौन जीतता है।”

सहवाग ने इस रेस के लिए खूब तैयारी भी की थी लेकिन ऐन वक्त पर गांगुली ने उन्हें धोखा दे दिया। इस बारे में उन्होंने कहा, “मैने चुनौती स्वीकार कर ली, खूब तैयारी भी की। बाद में मुझे मेरे अज्ञात सूत्रों से पता चला कि दादा 19 तारीख को ही उड़ गए। हालांकि मुझे जब भी मौका मिलेगा मैं उनके साथ दौड़ लगाउंगा, मुझे यकीन है कि मै रेस पूरी करूंगा लेकिन दादा करेंगे कि नहीं पता नहीं।” [ये भी पढ़ें: इतिहास के पन्नों से: जब 414 रन बनाकर भी केवल तीन रन से जीती थी टीम इंडिया]

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सहवाग कैसे बने ट्विटर किंग: सहवाग नजबगढ़ के नवाब से ट्विटर के नवाब कैसे बन गए इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद मैने सोचा कि क्या किया जाय तो मुझे लगा कि लोगों को केवल दो ही चीजें अच्छी लगती हैं या तो आप मैदान पर चौके-छक्के लगाओ या लोगों का हंसाओ। ट्विटर और फेसबुक मेरे लिए ऐसा जरिया था जहां मैं अपने विचार खुलकर रख सकता था। यहां ना कोई मैच रैफरी है ना ही बीसीसीआई। हालांकि जब मैं ट्वीट करता हूं तो ध्यान रखता हूं कि अपनी सेना और पुलिस का सम्मान करूं क्योंकि उनकी वजह से ही मैं यहां हूं। मैं जब टीम में था तो ड्रेसिंग रूम का माहौल खुशनुमा रखने की कोशिश करता था और जब टीम से बाहर हुआ तो मैने यही करने की कोशिश की लोगों को ये पसंद आया। हालांकि ये हंसी मजाक कभी उल्टा पड़ जाता है लेकिन ज्यादातर समय ये चल जाता है।

जब मुल्तान के सुल्तान को भी लगा था डर: मैदान पर अपने बेखौफ अंदाज के लिए जाने जाने वाले सहवाग को असल जिंदगी में हवाईजहाज से काफी डर लगता है। इससे जुड़े वाकए के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “एक बार हम दिल्ली से दुबई जा रहे थे तो हमारा जहाज 1,000 फीट नीचे आ गया तो सभी यात्री ‘मां-मां’ चिल्लाने लगे। तब मुझे लगा कि जीवन में हर मुश्किल के समय लोग मां को ही याद करते हैं।” सहवाग ने ये भी खुलासा किया कि टीम इंडिया के पूर्व कोच जॉन राइट भी एक बार हवाईजहाज में डर गए थे। उन्होंने कहा, “मुझे याद है कि विश्व कप 2003 में हम जोहान्सबर्ग से डरबन जा रहे थे। उस समय मौसम काफी खराब था और फ्लाइट काफी हिल रही थी। डेढ़ घंटे की फ्लाइट में जॉन राइट पूरे रास्ते ‘ओ जीसस हेल्प मी’ बोलते रहे। जब हम नीचे उतरे तो मैने उनसे कहा कि अच्छा हुआ जॉन आज जीसस ने आपने मदद कर दी।” [ये भी पढ़ें: वनडे रैंकिंग में नंबर एक बनने के करीब हैं मिताली राज]

कैसे कोच हैं सहवाग: सहवाग ने टीम इंडिया के कोच पद के लिए भी आवेदन किया था लेकिन सीएसी ने रवि शास्त्री को इस पद के लिए चुना। हालांकि सहवाग आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब के मेंटोर रहे चुके हैं। इस दौरान अपने अनुभव पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “जब मैं किंग्स इलेवन पंजाब के साथ था तो मैं किसी कोच या डायरेक्टर की तरह नहीं बल्कि केवल एक खिलाड़ी की तरह उनके साथ रहता था। हमने बड़ी अच्छी जीत हासिल की और बुरी तरह से हारे भी लेकिन मैने ड्रेसिंग रूम का माहौल नहीं बदलने दिया।”

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