वीरेंदर सहवाग  © Getty Images
वीरेंदर सहवाग © Getty Images

यह बात किसी से छुपी नहीं है कि वीरेंद्र सहवाग का बैटिंग करने का तरीका अपरंपरागत हुआ करता था। वह अपने कदमों को हिलाए बगैर ही स्ट्रोक खेलते थे। तकनीकी रूप से भले ही यह उनकी बैटिंग में सबसे बड़ी खामी रही हो। लेकिन सहवाग ने अपने पूरे करियर में इसकी बिल्कुल भी परवाह नहीं की और इसी अंदाज में बैटिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 17,000 से ज्यादा रन बना डाले। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सहवाग जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग बैटिंग के अंदाज को बदलकर रख दिया, वह कभी भी मैच के पहले रणनीति बनाने वाली मीटिंग के लिए तैयार नहीं रहते थे।

टीम इंडिया के बेहतरीन स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने हाल ही में एक इंटरव्यू में सहवाग के बारे मे कई बातें साझा कीं। अश्विन ने साल 2011 की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “जाहिर तौर पर सहवाग टीम मीटिंग्स को बिल्कुल भी पसंद नहीं करते थे क्योंकि वह टीम के आधार पर या रणनीति के आधार पर खेलना पसंद नहीं करते थे। साल 2011 में टीम मीटिंग के दौरान जहां हमें इंग्लैंड के खिलाफ बैंगलोर में खेलना था। गैरी कर्स्टन ने टीम मीटिंग सुबह 10 बजे बुलाई। सहवाग ने गैरी से कहा कि वह टीम मीटिंग में कुछ बातें करना चाहते हैं। जैसा कि हर कोई सोच रहा था कि सहवाग शायद अपने पहले के मैचों में कुछ सीखी हुई चीजें बताएंगे। लेकिन सहवाग अपने उसी मजाकिया अंदाज में कॉम्पिलीमेंट्री पासों के बारे में बात करने लगे जो हर खिलाड़ी को मिलते हैं।”

अश्विन ने आगे बताया, “सहवाग के द्वारा इस तरह से अपनी बात शुरू करने से हर कोई भौंचक्का रह गया। सहवाग ने बताया कि उन्हें पता चला है कि हर खिलाड़ी को 6 पास मिल सकते हैं। लेकिन उन्हें सिर्फ तीन मिले हैं। अब चाहे जो हो, टॉस के पहले टीम को उनके पास मिल जाने चाहिए। यह पहली मीटिंग थी जो 20 मिनट चली थी। वीरू ने धमकी भी दी कि अगर पास नहीं मिले तो वह मैच नहीं खेलेंगे।”[ये भी पढ़ें: सहवाग ने गांगुली को बताया धीमा रनर, तो लग गया 100 मीटर रेस का ‘चैलेंज’]

अश्विन ने आगे बताया, “वह सिर्फ गेंद को देखकर मारना चाहते थे। बहरहाल, सहवाग टीम मीटिंग में अपनी भागेदारी कम ही देते थे।” अश्विन ने बताया कि टीम मीटिंग ज्यादा से ज्यादा 2 मिनट के लिए होती हैं।