न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC 2021) का फाइनल हारने के बाद भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) का दर्द तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की कमी पर निकला. अब टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और दुनिया के महान ऑलराउंडर कपिल देव (Kapil Dev) ने इसकी वजह बताई है. कपिल देव ने कहा कि भारतीय टीम के पास सही माइंड सेट की कमी के चलते एक फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर की कमी आज तक बनी हुई है.

कुछ समय पहले हार्दिक पांड्या ने जब टेस्ट मैच में डेब्यू किया था, तो उन्होंने ये उम्मीदें जताई थीं कि वह भारत की फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर की कमी को पूरा कर देंगे. लेकिन 11 टेस्ट मैच खेलने के बाद पांड्या की पीठ में चोट लग गई और वह अभी तक बॉलिंग के लिए पूरी तरह फिट नहीं हो पाए हैं.

एक यूट्यूब चैनल स्पोर्ट्स यारी पर जब कपिल देव से इस कमी के बारे में उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने कहा कि आधुनिक भारतीय क्रिकेट में सही माइंड सेट नहीं है, जिसके चलते फास्ट बॉलिंग ऑलराउंडर की कमी आज तक खल रही है.

उन्होंने कहा, ‘एक कारण यह भी है कि अब साल में 10 महीने क्रिकेट खेलने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा बढ़ा है. दूसरा यह भी है कि आजकल टीम मैनेजमेंट जिस तरह खिलाड़ियों के वर्क लोड को ध्यान में रखता है तो उन्हें वह नेट पर 4 ओवर से ज्यादा फेंकने नहीं दिया जाता है. इससे मांसपेशियां जरूरत के हिसाब से विकसित नहीं हो पाती हैं.’

62 वर्षीय कपिल ने कहा, ‘मैं इस चीज को खराब या सही नहीं कह रहा लेकिन हमारी पीढ़ी के खिलाड़ियों को यह देखकर थोड़ा अजीब लगता है कि कोई खिलाड़ी 4 ओवर फेंककर ही थक जाता है. हमारे समय में हम सभी को ही सबकुछ करना होता था. ऐसे में हम निचले क्रम के बल्लेबाजों को भी नेट में अभ्यास के समय 10-10 ओवर फेंक दिया करते थे.’

भारत को पहला वर्ल्ड कप खिताब दिलाने वाले इस पूर्व कप्तान का इशारा था कि नेट में ज्यादा बॉलिंग अभ्यास करने से मांसपेशियों की ताकत और क्षमता का सही विकास हो पाता था. उन्होंने कहा, ‘आज अगर 4 ओवर फेंककर ही यह लगता है कि अभ्यास के लिए यह काफी है तो हमारी पीढ़ी को देखकर यह अजीब लगता है.’