1975 से 1986 का काल वेस्टइंडीज लिए स्वर्ण काल रहा और इस दौरान यह टीम सिर्फ एक बार पारी की हार को मजबूर हुई थी © IANS (File Photo)
1975 से 1986 का काल वेस्टइंडीज लिए स्वर्ण काल रहा और इस दौरान यह टीम सिर्फ एक बार पारी की हार को मजबूर हुई थी © IANS (File Photo)

होबार्ट। बेलेरीव ओवल मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए पहले क्रिकेट टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज को एक पारी और 212 रनों के विशाल अंतर से हार का सामना करना पड़ा। बीते 50 सालों में कैरेबियाई टीम की यह 25वीं और 2006 से 2015 के बीच यह 11वीं पारी की हार है। वेस्टइंडीज टीम वर्ष 1966 से 1975 के बीच एक सशक्त टीम मानी जाया करती थी। इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस दौरान वेस्टइंडीज टीम को सिर्फ दो मौकों पर पारी की हार का सामना करना पड़ा था, इसके अलावा कोई भी क्रिकेट टीम उसे टेस्ट मैचों में इस तरह से हराने में कामयाब नहीं हो पाई। इसके बाद 1975 से 1986 का काल उसके लिए स्वर्ण काल रहा और इस दौरान यह टीम सिर्फ एक बार पारी की हार को मजबूर हुई। ये भी पढ़ें: रफ्तार के सौदागर भारत के ये पांच गेंदबाज

यही हाल 1986 से 1995 के बीच भी रहा। बदलाव के दौर से गुजरने के बावजूद कैरेबियाई टीम ने खुद को पारी की हार से बचाए रखा लेकिन इसेक बाद का दौर उसके लिए निराशाजनक रहा। 1996 से 2015 के बीच इस टीम को कुल 21 बार पारी की हार मिली। 1996 से 2005 के बीच इस टीम को 10 मौकों पर पारी की हार मिली जबकि 2006 से 2015 के बीच इसे 11 बार इस तरह की हार से शर्मसार होना पड़ा है। इस टीम को अब तक कुल पांच मौकों पर एक पारी और 200 या उससे अधिक रनों की हार मिली है। बेलेरीव ओवल में उसे आस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार उसकी अब तक की दूसरी बड़ी हार है। इससे पहले वेस्टइंडीज को 1930-31 में ब्रिस्बेन में एक पारी और 217 रनों से हार मिली थी। पारी के अंतर से जो दो सबसे बड़ी हार इस टीम को मिली हैं, वह बीते दो सालों में सामने आई हैं। ये भी पढ़ें: जब मोहिंदर अमरनाथ ने कहा, जावेद मेरे देश को कुछ मत कहना