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एजबेस्टन: इंग्लैंड में इन दिनों ‘बैजबॉल’ काफी चर्चा में है। लेकिन भारतीय टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि आखिर यह खेलने का कौन सा तरीका है जिसे अपनाने की बात इंग्लैंड कर रहा है।

द्रविड़ ने बेन स्टोक्स की कप्तानी वाली टीम को टेस्ट क्रिकेट में उनके शानदार खेल के लिए बधाई दी। बेन स्टोक्स के कप्तानी संभालने से पहले इंग्लैंड क्रिकेट बहुत बुरे दौर से गुजर रहा था। उसने 17 में से सिर्फ एक मैच जीता था।

बैजबॉल को टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड के नए आक्रामक रवैये को कहा जा रहा है, जो उसने नए कोच ब्रैंडन मैकुलम के अंडर खेलना शुरू किया है। गौरतलब है कि बैज- मैकुलम का निकनेम है। जब से मैकुलम ने टीम की कोचिंग संभाली है, इंग्लैंड ने परंपरागत तरीके से क्रिकेट खेलना छोड़ दिया है। इंग्लैंड ने बीते चारों टेस्ट मैच जीते हैं। और कमाल की बात है कि सभी के सभी रनों का पीछा करते हुए जीते हैं।

मंगलवार को इंग्लैंड की टीम ने एक बार फिर कमाल कर दिया। उन्होंने अपनी धरती पर सबसे बड़ा स्कोर 378 हासिल कर लिया। और यह स्कोर भी उन्होंने इतनी आसानी से हासिल किया कि सभी देखते रह गए। इंग्लैंड ने मैच सात विकेट से अपने नाम किया।

मैच के बाद कॉन्फ्रेंस के दौरान द्रविड़ से जब बैजबॉल के बारे में पूछा गया तो भारतीय कोच ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘मैं नहीं जानता यह क्या है?’

इसके बाद उन्होंने फौरन कहा, ‘लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि इंग्लैंड ने बीते चार टेस्ट मैचों में जिस तरह का क्रिकेट खेला है वह बहुत अच्छा है। इंग्लैंड में लक्ष्य का पीछा करना आसान नहीं होता लेकिन वह इसे काफी आसानी से कर रहे हैं। जब आपके खिलाड़ी अच्छी फॉर्म में हों तो आप सकारात्मक क्रिकेट खेल सकते हैं, जैसा हमने किया जब ऋषभ पंत और रविंद्र जडेजा बल्लेबाजी कर रहे थे।’

49 वर्षीय राहुल ने कहा कि भारत पांचवां टेस्ट मैच इसलिए हारा क्योंकि टीम पूरे पांच मिलाकर अच्छा क्रिकेट नहीं खेल सकी।

द्रविड़ ने कहा, ‘हमारे पास मौके थे, पहले तीन दिन हमने अच्छा क्रिकेट खेला। हम उसे जारी नहीं रख सके। इसी वजह से टेस्ट क्रिकेट मुश्किल है। और इसी वजह से टेस्ट क्रिकेट का अर्थ होता है कि आपको पूरे पांच दिन तक लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होता है। हम ऐसा करने में सफल नहीं हुए और उन्होंने यह हमसे बेहतर तरीके से किया। और यही वह कारण है जिसकी वजह से वे टेस्ट मैच जीतने के हकदार थे।’

भारत के पास मैच के तीसरे दिन 257 रन की बढ़त थी लेकिन उसने अपने आखिरी सात विकेट सिर्फ 92 रन पर खो दिए थे। भारत दूसरी पारी में 245 रन पर ऑल आउट हो गया था और इंग्लैंड को 378 रन का लक्ष्य मिला था जो उसने बिना किसी मुश्किल के हासिल कर लिया था।