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अलग प्रारूप के लिए अलग कोच... भारतीय दिग्गज कपिल देव ने क्या कहा ?

भारतीय दिग्गज ने कहा, हर किसी को पैसा पसंद है, लेकिन कुछ खिलाड़ियों को लगता है कि यह बहुत जरूरी है, मुझे अब भी लगता है कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने से ज्यादा जरूरी भारत के लिए खेलना है.

user-circle cricketcountry.com Written by Akhilesh Tripathi
Last Updated on - December 11, 2025 7:44 PM IST

Kapil Dev on Team India Split Coach: पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव ने साउथ अफ्रीका से हाल में घरेलू मैदान पर टेस्ट सीरीज में मिली 0-2 की हार के बाद टीम के लिए अलग प्रारूप के अलग कोच रखने के विचार का समर्थन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई को कोचिंग का वही तरीका अपनाना चाहिए जो भारतीय क्रिकेट के लिए सबसे अच्छा हो.

जब कपिल देव से पूछा गया कि क्या भारतीय टीम के घरेलू मैदान पर टेस्ट में हार के सिलसिले को खत्म करने के लिए लाल गेंद और सफेद गेंद के प्रारूप के लिए अलग-अलग कोच कारगर हो सकते हैं तो कपिल ने कहा, मुझे नहीं पता, मैं इसका जवाब नहीं दे सकता, आपको सोचना होगा कि क्या होना चाहिए, जो भी क्रिकेट के लिए अच्छा हो, मुझे लगता है कि उन्हें वही करना चाहिए.

‘एथलीट बनना हमेशा एक जैसा होता है’

भारतीय टीम को 1983 विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल ने इस बात को खारिज कर दिया कि सोशल मीडिया के जमाने में उनके खेलने के दिनों के मुकाबले एथलीट बनना ज्यादा मुश्किल है. उन्होंने कहा, नहीं, यह हमेशा एक जैसा ही होता है, तब भी मुश्किल था, अब भी मुश्किल है, तब भी आसान था और अब भी आसान है, आपकी सोच ज्यादा जरूरी है.

‘आईपीएल से ज्यादा जरूरी भारत के लिए खेलना है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या टी20 लीग के बढ़ते वित्तीय आकर्षण ने राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व को पीछे छोड़ दिया है तो कपिल ने कहा कि हर खिलाड़ी अपनी प्राथमिकताओं को अलग तरह से देखता है. उन्होंने कहा, हर किसी को पैसा पसंद है, लेकिन कुछ खिलाड़ियों को लगता है कि यह बहुत जरूरी है, मुझे अब भी लगता है कि इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने से ज्यादा जरूरी भारत के लिए खेलना है, लेकिन हर कोई अलग होता है, उनकी अपनी सोच है, उन्हें शुभकामनाएं.

‘मुझे खेल के सभी प्रारूपों में मजा आता है’

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कोई खास प्रारूप पसंद है तो कपिल ने कहा कि उन्हें खेल के सभी प्रारूपों में मजा आता है. उन्होंने कहा, ‘मुझे बस क्रिकेट पसंद है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दो गेंदों का क्रिकेट हो या 100 गेंदों का या 100 ओवर का या 10 ओवर का, क्रिकेट तो क्रिकेट है, गोल्फ तो गोल्फ है, आप कोई भी प्रारूप खेलें,, आखिर में आप गोल्फ का मजा लेते हैं। ’’

पीजीटीआई अध्यक्ष ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के प्रदर्शन के बारे में पूछने पर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की, ‘‘उन्हें शुभकामनाएं, उन्हें गोल्फ भी खेलना चाहिए.

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इनपुट- भाषा