जब फखर जमान के भाईयों ने क्रिकेट खेलने के लिए की थी उनकी जमकर पिटाई

क्रिकेट में आने के पहले फखर पाकिस्तान नेवी में थे।

Edited By : Devbrat Bajpai |Jun 23, 2017, 02:42 PM IST

Published On Jun 23, 2017, 02:42 PM IST

Last UpdatedJun 23, 2017, 02:42 PM IST

फखर जमान  © AFP
फखर जमान © AFP

एक वो दौर भी था जब फखर जमान को क्रिकेट खेलने के कारण उनके भाईयों ने गांव में खूब पीटा था लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के लिए जैसे ही वह खेले। वह हीरो बन गए। जब वह इंग्लैंड से पाकिस्तान लौटे तो उनके गृहनगर काटलंग, पूर्वी पाकिस्तान में उनका फूल- मालाओं से स्वागत किया गया। फखर ने चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान ही पाकिस्तान के लिए डेब्यू किया था और फाइनल में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की जीत में 106 गेंदों में 114 रन बनाकर अहम भूमिका निभाई।

रविवार को हुए फाइनल के बारे में जिक्र करते हुए फखर ने एफपी से बताया, “मुझे उस समय कुछ खास महसूस नहीं हुआ। और फिर मैं पाकिस्तान आया, लोगों ने मेरे यहां आना शुरू कर दिया। ये सभी मुझे प्यार दे रहे हैं, इसलिए मुझे लगता है कि मैं कोई बड़ा कारनामा करके आ रहा हूं।” टूर्नामेंट शुरू होने से पहले पाकिस्तान टीम आईसीसी वनडे रैंकिंग में आठवें नंबर पर मौजूद थी। लेकिन जिस तरह का उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में प्रदर्शन किया उसने विरोधियों के छक्के छुड़ा दिए। भारत के खिलाफ फाइनल में उन्होंने पहले बल्लेबाज करते हुए निर्धारित 50 ओवरों में 338/4 का स्कोर खड़ा किया। इसमें फखर के पहले वनडे शतक का योगदान था। गौर करने वाली बात ये है कि यह फखर का चौथा वनडे ही था। जिस तरह से उन्होंने कारनामें को अंजाम दिया। सोशल मीडिया पर उनको लेकर जमकर चर्चे हुए।

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फखर बताते हैं कि उनकी जिंदगी ऐसी हमेशा नहीं था बल्कि उनके गांव में उन्हें एक बार एक स्थानीय टूर्नामेंट में भाग लेने से इंकार कर दिया गया था। उन्होंने कहा, “मैंने स्कूल में एक या दो हार्ड गेंद से मैच खेले और इस दौरान रन बनाए। इसके बाद से मैं पूरे इलाके में लोकप्रिय हो गया। उसके बाद जहां भी मैं जाता तो लग कहते, ‘यह हार्ड गेंद खेलने वाला खिलाड़ी है, इसके साथ मत खेलना।” [ये भी पढ़ें: भारत बनाम वेस्टइंडीज, पहला वनडे प्रिव्यू: जीत के साथ आगाज करने का होगा दोनों टीमों का इरादा]

यहां तक कि उनके भाई उन्हें क्रिकेट न खेलने देने के लिए पीटा करते थे। इस बात को स्वीकार करते हुए बड़े भाई आसिफ ने बताया, “लेकिन उसने क्रिकेट खेलना कभी बंद नहीं किया, और आज हीरो बन गया है।” फखर कहते हैं कि उन्होंने बचपन में अपना पूरा समय क्रिकेट नें ही लगाया। लेकिन इस दौरान उन्होंने क्लब स्तर के ऊपर कभी खेलने के बारे में नहीं सोचा था। जबकि, वह नेवी कमांडो बनना चाहते थे। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान नेवी में भर्ती होना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा पल था, जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।”

उन्हें पाकिस्तान नेवी में एक नाविक के तौर पर भर्ती किया गया था। वह फोर्स के टूर्नामेंट में शामिल हुए। जहां नेवी कोच नजीम खान ने उनकी प्रतिभा को पहचान लिया। उन्होंने फखर को सेना से नौकरी छोड़कर क्रिकेट में मन लगाने को कहा। उन्होंने कहा, “तुम क्रिकेट उच्च स्तर तक खेल सकते हो।” पांच साल तक वह घरेलू क्रिकेट खेले। लेकिन पाकिस्तान सुपर लीग मे लाहौर कलंदर्स की ओर से जिस तरह का उन्होंने प्रदर्शन किया उसने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। फखर को राष्ट्रीय टीम की ओर से बुलावा उस समय आया था जब उन्हें मार्च में पाकिस्तान बनाम वेस्टइंडीज टी20I सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया।

हालांकि, उन्होंने धीमी शुरुआत की और दो पारियों में महज 26 रन ही बना सके। लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी में अपनी जगह बनाने के लिए यह पर्याप्त था। जब शुरुआती मैचों में पाकिस्तानी ओपनर अहमद शहजाद असफल रहे तो फखर को मौका दिया गया। उन्होंने इस मौके को दोनों हाथों से लिया। उन्होंने अपने पहले मैच में 31 रन बनाए। अगले दो मैचों में दो अर्धशतक लगाए और फाइनल में शतक लगाते हुए पाकिस्तान के नाम ऐतिहासिल जीत कर दी। फखर का कहना है कि वह अपने देश के लिए लंबे समय तक खेलना चाहते हैं।

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