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जूते खरीदने के लिए नहीं थे पैसे, फिर मां ने गहना बेचा… अब IPL में छा गया बिहार का लाल साकिब
साकिब हुसैन ने चार ओवर के स्पेल में 24 रन देकर चार विकेट हासिल किए, जिसमें यशस्वी जायसवाल का विकेट भी शामिल था.
Published On Apr 14, 2026, 12:41 AM IST
Last UpdatedApr 14, 2026, 12:41 AM IST
Sakib Hussain
Who is Sakib Hussain: आईपीएल 2026 में सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने राजस्थान रॉयल्स को हराकर इस सीजन की दूसरी जीत दर्ज की. सनराइजर्स हैदराबाद की जीत में टीम के तेज गेंदबाज साकिब हुसैन ने प्रमुख भूमिका निभाई. अपना डेब्यू मैच रहे साकिब ने चार विकेट चटकाए, जिसमें यशस्वी जायसवाल का विकेट भी शामिल था.
बिहार के गोपालगंज के रहने वाले साकिब हुसैन ने चार ओवर के स्पेल में 24 रन देकर चार विकेट हासिल किए, जिसमें यशस्वी जायसवाल के अलावा डोनोवान फरेरा का विकेट भी था. साकिब काफी गरीब परिवार से आते हैं और उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर आईपीएल में जगह बनाई है. सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने उनके बेस प्राइस 30 लाख रुपए में खरीदा था. साकिब हुसैन पिछले सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स का हिस्सा थे, मगर वहां उन्हें डेब्यू का मौका नहीं मिल सका था, मगर सनराइजर्स हैदराबाद के लिए डेब्यू करते हुए साकिब हुसैन ने गेंद से कहर बरपा दिया.
कौन हैं साकिब हुसैन ?
21 साल के साकिब हुसैन बिहार के गोपालगंज जिले से आते हैं. गोपालगंज से ही एक और गेंदबाज मुकेश कुमार हैं, जो दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा है. साकिब हुसैन आईपीएल 2025 के मेगा ऑक्शन में अनसोल्ड रहे थे, मगर 2026 ऑक्शन में सनराइजर्स हैदराबाद ने उन्हें बेस प्राइस में अपनी टीम में शामिल किया. उन्होंने महज 17 साल की उम्र में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में टी20 डेब्यू किया था और अपने दूसरे ही मैच में 20 रन देकर चार विकेट चटकाए थे. रणजी ट्रॉफी 2025-26 में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ उन्होंने 41 रन देकर छह विकेट अपने नाम किए थे. साकिब हुसैन ने बिहार के लिए छह फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं, जिसमें उनके नाम 16 विकेट है. वहीं 13 टी-20 मैच में उन्होंने 14 विकेट चटकाए हैं.
जूते खरीदने के लिए नहीं थे पैसे, मां ने गहना बेचा
साकिब हुसैन काफी गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता पिता किसान हैं, हालांकि वह इतना पैसा नहीं कमा पाते थे कि वह उन्हें क्रिकेट की सुविधाएं मुहैया करा सके. साकिब क्रिकेट खेलकर कमाई करते थे, जिससे घर को मदद मिलती थी. टेनिस बॉल के एक मैच के बदले में 500-700 रुपये मिलते थे. साकिब का जब बिहार रणजी टीम में चयन हुआ तो उनके पास पहनने के लिए जूते नहीं थी. बेटे के जूते के लिए मां ने गहना बेच दिया. साकिब के परिवार के लोग चाहते थे कि वह सेना में जाए, मगर साकिब ने क्रिकेट को चुना और हैदराबाद के खिलाफ प्रदर्शन के बाद उसने साबित कर दिया कि वह लंबी रेस का घोड़ा है.