1950 के फीफा वर्ल्ड कप में क्यों नहीं खेला था भारत, क्या है नंगे पांव खेलने की जिद की कहानी?
क्या नंगे पांव खेलने की जिद ने तोड़ा था भारत का फीफा वर्ल्ड कप खेलने का सपना. अकसर यह कहानी आपने सुनी होगी. पर क्या है इसकी हकीकत. क्या वाकई भारतीय फुटबॉल टीम नंगे पांव किसी टूर्नामेंट में खेली थी.
Published On Jun 10, 2026, 12:44 PM IST
Last UpdatedJun 10, 2026, 12:44 PM IST
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने ही वाला है. और पूरी दुनिया पर इसका सुरूर सिर चढ़ने लगा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. यहां भी से लेकर बस-मेट्रो, गली-नुक्कड़, चौराहों, इंस्टाग्राम, एक्स और स्पेनचैप जैसे सोशल मीडिया के मोहल्लों में भी इसकी चर्चा है. हर किसी की अपनी पसंदीदा टीम है और पसंदीदा खिलाड़ी. कोई पुर्तगाल को विजेता देखना चाहता है तो पर इस बीच एक खलिश भारतीय फुटबॉल फैंस के दिल में भी है. और वह इस बात की दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल के इस महाकुंभ में भारत की टीम नहीं है. और करीब 150 करोड़ की आबादी का यह मुल्क इस बार भी सिर्फ दर्शक बनकर ही रह जाएगा. पर, फीफा वर्ल्ड कप से भारत का रिश्ता कभी होते-होते रह गया था.
बात सन 1950 की है. देश नया-नया आजाद हुआ था. उमंगे, महत्त्वकांक्षाएं और जुनून नया था. भारत के पास मौका था फीफा वर्ल्ड कप का हिस्सा बनने का. लेकिन भारत ने पीछे हटने का फैसला किया. जरा सोचिए अगर भारत उस वर्ल्ड कप का हिस्सा होता और अगर कुछ करिश्मा हो जाता, तो इस देश में फुटबॉल की तस्वीर क्या हो सकती थी. शायद भारत के लिए वह 1983 के क्रिकेट वर्ल्ड कप का लम्हा होता. हालांकि यह बात ‘अगर’ की है. और अगर की कहानियों से अकसर मलाल ही हासिल होता है.
असल में हुआ क्या था
आपने भी कभी-न-कभी यह किस्सा सुना होगा कि भारतीय टीम वर्ल्ड कप खेल रही थी लेकिन नंगे पैर खेलने पर अड़ी रही और इसी वजह से उसे फुटबॉल वर्ल्ड से बाहर कर दिया गया. और शायद कई लोग इसे सच भी मानते हों. पर सुनिये, इस कहानी में अधूरा सच है. इसका वास्ता फीफा वर्ल्ड कप से नहीं है. पर भारतीय फुटबॉल से जरूर है. और कैसे है, यह हम आपको आगे बताएंगे. पहले, जरा फीफा वर्ल्ड कप 1950 की बात कर लेते हैं. 1950 का वर्ल्ड कप सिर्फ चौथा फुटबॉल वर्ल्ड कप था. और दूसरे महायुद्ध के बाद पहला.
इस विश्वयुद्ध के चलते फीफा वर्ल्ड कप के दो एडिशन नहीं हुए थे. दुनिया महायुद्ध में मची तबाही से उबर रही थी. विदेशों की यात्राएं और रहना काफी महंगा और जटिल था.
दुनिया के कई देशों ने इस वर्ल्ड कप में आने से इनकार कर दिया था. उन्होंने क्वॉलिफिकेशन के दौरान या बाद में भी आर्थिक चुनौतियों के चलते दक्षिण अमेरिका के इस देश में यात्रा से इनकार कर दिया था. यह वर्ल्ड कप भी काफी छोटा हुआ था. सिर्फ 13 टीमों ने ही इस फीफा वर्ल्ड कप 1950 में खेलने पहुंचीं.
भारत की कहानी में कहां आया असली ट्विस्ट
क्वॉलिफिकेशन राउंड में कुल 34 टीमें थीं. और यहां से 16 टीमों ने आगे जाना था. तीन साल पहले ही आजाद हुए भारत पहली बार यहां तक पहुंचा था. भारत को एशियन क्वॉलिफिकेशन ग्रुप में रखा गया था. इस ग्रुप में म्यांमार, इंडोनेशिया और फिलिपीन्स की टीमें भी थीं. लेकिन बाकी टीमों ने क्वॉलिफायर्स शुरू होने से पहले ही हटने का फैसला किया. और यहां से भारत के लिए 1950 के वर्ल्ड कप में जाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया.
भारतीय टीम फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल ड्रॉ में भी थी. भारत को ग्रुप तीन में रखा गया था जहां उसके साथ ही स्वीडन, पराग्वे और गत चैंपियन इटली भी थी. 28 जून को भारत का पहला मैच भी था. लेकिन टीम उस मैच के लिए कभी ब्राजील के लिए रवाना ही नहीं हुई.
आखिर भारत 1950 के वर्ल्ड कप में पहुंचा कैसे
इसी बात को फीफा वर्ल्ड कप से जोड़कर बाद में कई कहानियां बना दी गईं. पर असल में ऐसा कुछ नहीं हुआ था. असल में फीफा ने 1953 तक जूते पहनकर खेलने से जुड़ा कोई नियम नहीं बनाया था. और भारत ने 1952 के हेलसिंकी ओलिंपिक में भी नंगे पांव खेलना जारी रखा.
तो, भारत के 1950 के फीफा वर्ल्ड कप में नहीं खेलने की वजह जूते नहीं, बल्कि प्रशासनिक फैसला था. इसके साथ ही ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की प्राथमिकता 1953 का हेलसिंकी ओलिंपिक था. और उसके लिए भी खजाने पर काफी दबाव पड़ता. तो इस एक फैसले ने वर्ल्ड कप और भारत के बीच जो दूरी पैदा की उसे 76 साल बाद भी पाटा नहीं जा सका है.