Why take wickets and complain about the SG ball: Mohammad Azharuddin
Umesh Yadav@ ians

भारतीय क्रिकेट टीम ने हलिया टेस्ट सीरीज में वेस्टइंडीज को तीन दिन के अंदर दोनों टेस्ट में मात दी। पहले मैच में भारत ने पारी और 272 रन से जीत हासिल की तो दूसरी में 10 विकेट से विंडीज को हराया। इस शानदार जीत के बाद भी गेंदबाज गेंद को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने गेंद को लेकर शिकायत करने पर एतराज जताया है।

घरेलू सीरीज में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भी भारतीय टीम के खिलाड़ियों एसजी बॉल को लेकर अपनी परेशानी जता रहे है। पहले कप्तान कोहली और अब उमेश यादव ने गेंद को लेकर परेशानी जताई है। पूर्व भारतीय कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने गेंद को लेकर सवाल खड़ा करने पर अपनी राय दी है। उनका कहना है भारत में ड्यूक बॉल को प्रयोग किए जाने पर जोर दिया जा रहा है जो समझ नहीं आता।

टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए अजहर ने कहा, ”मुझे याद आता है साल 1984-85 में ड्यूक बॉल की सीम जैसे खत्म हो जाती थी, भारतीय कंडीशन में गेंद की हालत खराब हो जाती थी और तभी समझ आ गया था यह नहीं चलने वाली। पहली बार 1993 में एसजी बॉल का प्रयोग किया गया जो भारतीय घरेलू क्रिकेट में कामयाब रहा। अलग-अलग कंडीशन में देश के हिसाब से गेंदबाजों का औसत देख लीजिए, आपको जवाब मिल जाएगा।”

Kuldeep Yadav also spoke of the SG ball after taking six wickets at Rajkot. @AFP
Kuldeep Yadav also spoke of the SG ball after taking six wickets at Rajkot. @AFP

उमेश यादव ने हैदराबाद टेस्ट में करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करने के बाद गेंद पर सवाल उठाए जबकि राजकोट में पहली बार टेस्ट में पांच विकेट लेने के बाद कुलदीप यादव ने भी एसजी बॉल को लेकर प्रतिक्रिया दी थी। इन दोनों से पहले कप्तान विराट कोहली और स्पिनर आर अश्विन भी गेंद पर सवाल खड़े कर चुके हैं।

अजहर ने कहा, ”जब आप 6 विकेट हासिल करते हैं तो फिर गेंद को लेकर सवाल कैसे खड़े कर सकते हैं बल्कि तेज गेंदबाज उमेश यादव ने पहली बार 10 विकेट चटकाए तो फिर गेंद को लेकर शिकायत की जगह कहां बनती है।”

आगे उन्होंने कहा, ”आपको उसका प्रयोग करना चाहिए, जो अपनी कंडीशन को शूट करता है। ये भी टेस्ट क्रिकेट की एक चुनौती है। मैं इंग्लैंड जा कर नहीं कह सकता, मुझे एसजी गेंद से खेलना है। उनके पास ड्यूक बॉल है उसी तरह से इंग्लैंड जब यहां आती है तो उनके लिए अलग चुनौती होती है।”