Wicketkeeping is a specialist job, especially in Test cricket, believes Wriddhiman Saha
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भारतीय टेस्ट टीम के सीनियर विकेटकीपर बल्लेबाज ऋद्धिमान साहा का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट में विकेटकीपर की भूमिका स्पेशलिस्ट की होनी चाहिए। साहा ने कहा कि अक्सर एक छूटा कैच भी खेल का रुख बदल सकता है, ऐसे में विकेटकीपर बल्लेबाज के लिए विकेटकीपिंग पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय टेस्ट टीम के नंबर एक विकेटकीपर बल्लेबाज साहा को खराब बल्लेबाजी प्रदर्शन की वजह से एडिलेड टेस्ट के बाद प्लेइंग इलेवन से ड्रॉप कर दिया गया था। हालांकि बॉक्सिंग डे टेस्ट में उनकी जगह उतरे रिषभ पंत ने मैच के दौरान कई कैच छोड़े, जिस वजह से उनकी काफी आलोचना हुई। लेकिन टीम मैनेजमेंट ने तीसरे टेस्ट में भी पंत को ही मौका दिया।

सिडनी टेस्ट में पंत के चोटिल होने के बाद सब विकेटकीपर के तौर पर मैदान पर उतरे साहा ने चार अहम कैच पकड़े। जिसके बाद इस मुद्दे पर एक बार फिर बहस शुरू हो गई कि विकेटकीपर बल्लेबाज का चयन किस क्षमता के आधार पर होना चाहिए- बल्लेबाजी या विकेटकीपिंग।

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एडम गिलक्रिस्ट और महेंद्र सिंह धोनी के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद ऑलराउंडर विकेटकीपर बल्लेबाजों का समय खत्म होता दिख रहा है। ऐसे में साहा ने स्पेशलिस्ट विकेटकीपर बल्लेबाजों को मौका दिए जाने की वकालत की है।

उन्होंने कहा, “ऐसे हालात आते हैं जब एक छूटा कैच मैच का नतीजा बदल देता है। विकेटकीपिंग स्पेशलिस्ट का काम है, खासकर कि टेस्ट क्रिकेट में। मैं हर कैच पकड़ने का दावा नहीं कर रहा लेकिन ये एक स्पेशलिस्ट की जगह है और वही रहनी चाहिए।”

पंत के साथ तुलना पर साहाा ने कहा, “मैं 2018 से ये तुलना सुन रहा हूं। मैं अपना काम करने में विश्वास रखता हूं और मुझे इस बात की चिंता नहीं है कि पंत कैसी बल्लेबाजी कर रहा है। मैं उसकी वजह से अपना खेल नहीं बदलूंगा। ये टीम मैनेजमेंट के ऊपर है कि वो स्टंप के पीछे किसे देखना चाहते हैं।