बाएं हाथ के तेज गेंदबाज और घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट (Jaydev Unadkat) इन दिनों अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में हैं. उन्होंने साल 2019-20 में सौराष्ट्र को पहली बार रणजी ट्रॉफी का चैंपियन बनाया था. इस सीजन उन्होंने रिकॉर्ड 67 विकेट अपने नाम किए. इसके बावजूद भारतीय टीम के चयनकर्ताओं ने लगातार उनकी अनदेखी की है. हालांकि यह तेज गेंदबाज चयनकर्ताओं की अनदेखी से नाराज जरूर है लेकिन वह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूरे जोश के साथ खेल शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. उनादकट मानते हैं कि अगले तीन-चार साल वह अपने खेल के शिखर पर होंगे.

उनतीस साल के इस खिलाड़ी ने 2010 में एकमात्र टेस्ट मैच खेला था और वह भारत के लिए अंतिम बार 2018 में खेले थे. कोविड-19 महामारी के कारण देश में घरेलू स्तर पर कोई भी लाल गेंद का क्रिकेट आयोजित नहीं हो सका. उनादकट को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए नहीं चुना गया, इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज और अब ब्रिटेन के दौरे के लिए टीम में जगह नहीं मिली जिससे वह काफी निराश हैं.

वह ब्रिटेन के दौरे के लिए स्टैंडबाई खिलाड़ियों में भी शामिल नहीं है, जिससे पूर्व चयनकर्ता सरनदीप सिंह भी हैरान हैं. उनादकट ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘अगर मैं अपने चयन (इस मामले में अपने नहीं चुने जाने के लिए) के बारे में बात करूंगा तो मैं पक्षपात करूंगा. मेरा वास्तव में मानना है कि मैं अपने करियर के उस दौर में हूं जब मैं अगले तीन, चार वर्षों तक अपने खेल के शिखर पर रहूंगा.’

उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि मैं विकेट भी चटका रहा हूं. इससे वास्तव में साबित होता है कि मैं अच्छी फॉर्म में हूं और मैं विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न पिचों पर खिलाड़ियों को आउट करने के तरीके ढूंढ रहा हूं. और इसके कारण मुझे भी लगता है कि मेरा समय भी आएगा.’

उनादकट ने कहा, ‘चयन हालांकि फिर से पेचीदा चीज है और सामान्य तौर पर आपके चयन के लिए भारत A दौरे के अलावा घरेलू क्रिकेट का प्रदर्शन भी होता है लेकिन महामारी में ऐसा नहीं हुआ है.’