World champion Indian blind cricketer are struggling with financial crisis
भारतीय दृष्टिबाधित टीम file photo

हाल ही में पाकिस्तान को फाइनल में हराकर लगातार दूसरी बार दृष्टिबाधित विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया की खबर आपने सुनी ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि मैदान पर क्रिकेट के चैंपियन ये खिलाड़ी असल जिंदगी में किन परेशानियों से जूझते हैं। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया में छपी एक खबर के मुताबिक भारतीय दृष्टिबाधित क्रिकेट टीम के खिलाड़ी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। इनमें से कुछ क्रिकेटर खेती करते है तो कोई घरों में दूध बेचकर गुजारा चलाता है।

बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में भारत की जीत के नायक रहे गणेश मूंडकर देश के लिए दो विश्व कप, एक एशिया कप और एक टी20 विश्व कप जीत चुके हैं। गणेश के माता-पिता खेत में मजदूरी करते हैं और वो खुद एक किराने की दुकान चलाते हैं। आर्थिक तंगी की वजह से गणेश के छोटे भाई की पढ़ाई भी रुक गई है। उन्होंने पीटीआई भाषा से बातचीत में कहा, ‘‘घरवाले कभी-कभी कहते हैं कि क्रिकेट छोड़ दो लेकिन खेल मेरा जुनून है। चार साल पहले गुजरात सरकार ने विश्व कप जीतने के बाद नौकरी का वादा किया था और मैं अभी तक इंतजार कर रहा हूं।’’

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आंध्रप्रदेश के प्रेम कुमार सात बरस की उम्र में चेचक में आंख गंवा चुके हैं और आर्केस्ट्रा में गाना गाकर घर चलाते हैं। प्रेम ने कहा, ‘‘मैं आर्केस्ट्रा और लोकल चैनलों पर गाता और एंकरिंग करता हूं। एक कार्यक्रम का एक या डेढ़ हजार रूपए मिलता। गणपति महोत्सव के समय महीने में दस कार्यक्रम मिल जाते हैं वरना दो-तीन ही मिलते हैं।’’

गुजरात के ही वलसाड़ के रहने वाले अनिल आर्या दूध बेचकर दादा दादी, माता पिता, पत्नी और दो बच्चे का पेट पालते हैं।उन्होंने कहा, ‘‘मैं दूध बेचता हूं और क्रिकेट खेलने के दौरान अपने ड्राइवर को काम सौंपकर जाता हूं। मुझे हर रोज सुबह उठते से सबसे पहले उसे सब समझाना पड़ता है।’’ अनिल के गांव में क्रिकेट का अभ्यास करने की बेसिक सुविधा भी नहीं है। इस बारे में पूरी टीम ने गुजरात सरकार से अपील की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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भारतीय नेत्रहीन टीम में विराट कोहली के नाम से मशहूर आंध्रप्रदेश के वेंकटेश्वर राव श्रीकाकुलम में अस्थाई फिजिकल एजुकेशन ट्रेनर का काम करते हैं। उनकी मासिक आय 14000 रूपए है। कप्तान अजय रेड्डी ने कहा कि जिस देश में क्रिकेटरों को एक बड़ी जीत के बाद सिर आंखों पर बिठाया जाता है, वहां हमारे खिलाड़ी नौकरी और सम्मान को तरस रहे हैं। रेड्डी का कहना है कि बीसीसीआई या खेल मंत्रालय से मान्यता मिलने के बाद उनकी काफी सारी समस्यायें सुलझ सकती हैं।

(पीटीआई के इनपुट के साथ)