World Cup Final: Kane williamson reacts on boundary count rule
Kane Williamson @ IANS

हार के बाद भी दिल जीतने वाले केन विलियमसन के लिये यह स्वीकार कर पाना मुश्किल है कि चौकों छक्कों की संख्या के आधार पर उनकी टीम विश्व कप से वंचित रह गई लेकिन ‘जेंटलमैन खेल’ के सबसे जेंटलमैन खिलाड़ी को कोई गिला शिकवा नहीं है।

उनकी मुस्कुराहट में छिपा दर्द दिखता है और आंख निराशा की पूरी कहानी बयां कर देती है । वह हंसे, रोये या नाराज हो हालांकि वह काफी संयमित नजर आये। उन्होंने कहा ,‘‘ हंसे या रोये, यह आपका फैसला है। कोई गुस्सा नहीं है। निराशा है जो हम सब महसूस कर रहे हैं। कुछ चीजें वश में नहीं होती।’’

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रविवार को लॉर्डस पर नाटकीय फाइनल में निर्धारित ओवरों और सुपर ओवर में स्कोर बराबर रहने के बाद चौकों छक्कों की संख्या के आधार पर विजेता का निर्धारण हुआ। इंग्लैंड ने पहली बार विश्व कप जीता।

मैच के बाद प्रेस कांफ्रेंस में विलियमसन ने इस नियम के बारे में पूछने पर कहा ,‘‘आप कभी सोच नहीं सकते कि ऐसे सवाल भी पूछे जायेंगे। मैने भी कभी नहीं सोचा था कि ऐसे सवाल का जवाब दूंगा। यह स्वीकार करना मुश्किल है क्योंकि दोनों टीमों ने इस पल के लिये काफी मेहनत की थी।’’

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उन्होंने कहा ,‘‘ दो प्रयासों के बाद भी विजेता का निर्धारण नहीं हो सका। इसके बाद जिस तरह से हुआ, कोई भी टीम ऐसा नहीं चाहेगी।’’ एक सच्चे खिलाड़ी की तरह उन्होंने आईसीसी के इस नियम पर कोई सवाल उठाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा ,‘‘ नियम है तो है और टूर्नामेंट की शुरूआत से है। किसी ने सोचा नहीं होगा कि इस तरह का मैच होगा। यह शानदार मैच था और सभी ने इसका मजा लिया।’’

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विलियमसन ने कहा ,‘‘नियम तो पहले ही से हैं। आप मैदान पर उतरते समय यह सब नहीं सोचते। हम अगर कुछ चौके ज्यादा लगाते तो शायद जीत जाते और फिर वे भी ऐसा नहीं सोचते।’’

अपनी सज्जनता की मिसाल कायम करने वाले कीवी कप्तान यह अपेक्षा नहीं रखते कि सब खिलाड़ी उनकी तरह हों। उन्होंने कहा ,‘‘ हर किसी की अपनी शख्सियत है। यही दुनिया की खूबी है। हर किसी को अलग होना भी चाहिये। यह कड़ा कठिन सवाल है। आप खुद को बदलने की कोशिश मत कीजिये और जो कर रहे हैं, उसका पूरा मजा लीजिये।’’