युवराज सिंह  © Getty Images
युवराज सिंह © Getty Images

मथुरा। चैम्पियन क्रिकेटर युवराज सिंह ने कहा कि कैंसर का शुरूआती चरण में पता चलना जरूरी है ताकि इसके उपचार का मार्ग प्रशस्त हो सके। युवराज ने कहा,‘‘कैंसर के 60 प्रतिशत मरीजों का इलाज संभव है बशर्ते बीमारी का शुरूआती चरण में पता चल जाये।’’ उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों से उम्मीद नहीं छोड़ने के लिये कहा। उन्होंने कहा कि वह खुद इसका उदाहरण हैं कि कैंसर का इलाज संभव है।

युवराज सिंह ने इस दौरान मथुरा के नयति हॉस्पिटल में कैंसर यूनिट का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कैंसर मरीजों से मुलाकात की और अपने अनुभव बांटे। गौरतलब है कि युवराज सिंह को 2011 वर्ल्ड कप के बाद कैंसर हो गया था जिसके बाद वह लंबे समय तक क्रिकेट से दूर रहे थे। युवराज सिंह और सुरेश रैना को पिछले कुछ महीनों से टीम इंडिया में नहीं चुना जा रहा है। वह इसलिए क्योंकि ये दोनों क्रिकेटर लगातार यो यो टेस्ट में फेल हो रहे हैं। वैसे सुनील गावस्कर ने युवराज सिंह और सुरेश रैना को टीम में शामिल करने के लिए कहा है क्योंकि टीम इंडिया को मध्यक्रम में कोई बढ़िय बल्लेबाज नहीं मिल रहा है।

गावस्कर ने तीसरे टी20 मैच के मैच शो के दौरान ही टीम की इस समस्या का जिक्र किया था। उन्होंने इसका संभावित हल भी सुझाते हुए कहा था कि टीम इंडिया को सुरेश रैना और युवराज सिंह को वापस लाने की जरूरत है। उनका कहने का मतलब था कि टीम इंडिया के मध्यक्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाज के होने की जरूरत है।

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उन्होंने कहा कि टीम इंडिया में शिखर धवन ही हैं जो बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और वह ओपनिंग करते हैं। इसके बाद सभी राइट हैंडर्स हैं। वैसे उनकी ये बात सही भी है क्योंकि क्रीज पर राइट और लेफ्ट का कॉम्बिनेशन हमेशा काम करता है। गावस्कर ने कहा, “जब आप भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर को देखते हैं, तो टीम इंडिया को लेफ्ट हैंडर पर नजर रखनी चाहिए। शिखर धवन के अलावा अन्य कोई लेफ्ट हैंडर नहीं है, कोई मिडिल ऑर्डर में भी नहीं। शायद आपको युवराज सिंह और सुरेश रैना की तरफ देखना चाहिए जो आकर खराब परिस्थितियों में बल्लेबाजी कर सकते हैं। मुझे पता है कि ये अस्थायी उपाय है, लेकिन मुझे लगता है कि आपको उस खिलाड़ी को ढूंढना चाहिए जो बाएं हाथ से बल्लेबाजी करता हो।”