जम्मू कश्मीर ने रचा इतिहास, 67 साल में पहली बार रणजी ट्रॉफी के फाइनल में बनाई जगह
बंगाल ने जम्मू कश्मीर के सामने 126 रन का लक्ष्य रखा था, जम्मू कश्मीर ने 34.4 ओवर में चार विकेट खोक लक्ष्य को हासिल कर लिया.
Published On Feb 18, 2026, 03:05 PM IST
Last UpdatedFeb 18, 2026, 03:05 PM IST
Jammu and Kashmir team
जम्मू कश्मीर ने बुधवार को सेमीफाइनल के चौथे दिन दो बार के पूर्व चैंपियन बंगाल को छह विकेट से करारी शिकस्त देकर अपने 67 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया. बंगाल ने जम्मू कश्मीर के सामने 126 रन का लक्ष्य रखा था, जम्मू कश्मीर में 34.4 ओवर में चार विकेट खोकर यह लक्ष्य हासिल कर दिया. जम्मू कश्मीर की तरफ से वंशज शर्मा ने नाबाद 43 और अब्दुल समद ने नाबाद 30 रन बनाए.
इससे पहले तेज गेंदबाज आकिब नबी ने मैच में नौ विकेट लेकर बंगाल की जीत की संभावनाओं को पूरी तरह से खत्म कर दिया था. आकिब नबी के शानदार प्रदर्शन और आईपीएल स्टार अब्दुल समद की बेखौफ बल्लेबाजी ने यह सुनिश्चित किया कि जिस टीम को कभी लगातार अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाली टीम के रूप में जाना जाता था वह अब खिताब से सिर्फ एक कदम दूर है.
1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में पहली बार जम्मू कश्मीर ने लिया था हिस्सा
समद ने 22 वर्षीय वंशज को विजयी रन बनाने का मौका दिया और इस युवा बल्लेबाज ने मुकेश कुमार की गेंद पर लॉन्ग ऑन के ऊपर से छक्का मारकर जम्मू कश्मीर की टीम में जबरदस्त जश्न का माहौल बना दिया. जम्मू कश्मीर ने पहली बार 1959-60 के सत्र में रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लिया था और तब से लेकर अब तक उसे मजबूत दावेदार नहीं माना जाता था. जम्मू कश्मीर ने इस सत्र से पहले 334 रणजी मैच खेले थे, जिनमें से उसने केवल 45 जीते थे, उसे अपनी पहली जीत दर्ज करने में 44 साल लग गए, जो उसने 1982-83 में सेना के खिलाफ हासिल की थी.
2013-14 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी जम्मू- कश्मीर की टीम
उसके लिए नॉकआउट में पहुंचना कभी आसान नहीं रहा लेकिन 2013-14 में उसे एक बड़ी सफलता मिली जब उसने नेट रन रेट के आधार पर गोवा को पीछे छोड़कर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। उसने 2015-16 में परवेज़ रसूल की कप्तानी में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई को हराकर अपनी सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी, लेकिन दशकों तक जम्मू कश्मीर के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी रही, लेकिन इस सत्र में कोच अजय शर्मा और कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में उसने अपने विश्वास को परिणामों में तब्दील कर दिया.
मुंबई के खिलाफ शुरुआती हार के बाद जम्मू कश्मीर ने राजस्थान के खिलाफ पारी की जीत तथा दिल्ली और हैदराबाद के खिलाफ महत्वपूर्ण जीत हासिल करके नॉकआउट में प्रवेश किया, उसने क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश को 56 रन से हराकर पहली बार सेमीफाइनल में प्रवेश किया, इस मैच में नबी ने 110 रन देकर 12 विकेट लिए थे. जम्मू कश्मीर की टीम में जहां कोई स्टार खिलाड़ी नहीं था वहीं बंगाल की टीम में मोहम्मद शमी, आकाश दीप, मुकेश कुमार और शाहबाज अहमद जैसे चार भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी और भारत ए के स्टार बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन शामिल थे। इसके अलावा बंगाल को घरेलू मैदान पर खेलने का फायदा भी मिलना था लेकिन जम्मू कश्मीर ने उसे इससे वंचित कर दिया.
आकिब नबी ने तीसरे दिन किया कमाल
जम्मू कश्मीर में मंगलवार को तीसरे के दिन का खेल समाप्त होने तक दो विकेट पर 43 रन बनाए थे, उसने चौथे दिन की शुरुआत में ही कल के अविजित बल्लेबाज शुभम पुंडीर (27) और कप्तान पारस डोगरा (09) के विकेट गंवा दिए, लेकिन वंशज और समद ने बंगाल के गेंदबाजों को कोई मौका नहीं दिया और 55 रन की अटूट साझेदारी करके अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई. बंगाल ने अपनी पहली पारी में 328 रन बनाए थे जिसके जवाब में जम्मू कश्मीर ने 302 रन बनाए, बंगाल हालांकि पहली पारी की मामूली बढ़त का फायदा नहीं उठा पाया और उसकी टीम दूसरी पारी में केवल 99 रन पर आउट हो गई. मैच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए नबी ने कहा, पिछली बार हम क्वार्टर फाइनल में हार गए थे, लेकिन हमने कड़ी मेहनत की और हम इसके हकदार थे.
वहीं इस जीत पर बीसीसीआई और जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने टीम को बधाई दी है. बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने जम्मू कश्मीर की रणजी सफलता पर कहा, आज सपना सच हो गया.