HomePhotosIPL से पहले था ICL: इंडियन क्रिकेट लीग ने की थी टी20 लीग की धमाकेदार शुरुआत, पर आखिर क्यों हुआ यह बंद
IPL से पहले था ICL: इंडियन क्रिकेट लीग ने की थी टी20 लीग की धमाकेदार शुरुआत, पर आखिर क्यों हुआ यह बंद
इस लीग ने दिखाया कि भारत में टी20 फ्रैंचाइजी क्रिकेट का भविष्य है. और यह बहुत बड़ी बन सकती है. लेकिन तमाम ऐसे कारण रहे जिसकी वजह से यह इतना बड़ा नहीं बन पाया.
By Bharat MalhotraLast Updated on - April 7, 2026 11:18 PM IST
आज दुनिया आईपीएल देख रही है. इंडियन प्रीमियर लीग.लेकिन बीसीसीआई के विरोध, खिलाड़ियों पर बैन और राजनीति से लड़ते हुए एक और लीग भी थी. जिसे ICL कहते थे. आज कहानी उसी ‘बागी’ लीग की. जो वक्त से आगे देख पा रही थी और उसकी कामयाबी की बुनियाद रख रही थी.
आगाज- इंडियन क्रिकेट लीग
आज इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने क्रिकेट को काफी व्यावसायिक बना दिया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के लिए आईपीएल काफी बड़ा कमाऊ पूत बन गया है. बीसीसीआई को दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बनाने में मदद करने में आईपीएल का बड़ा योगदान है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कर्मशल 20-20 लीग टूर्नामेंट की शुरुआत भारत में इंडियन क्रिकेट लीग ने की थी. लेकिन कई घटनाक्रम ऐसे हुए जिनकी वजह से यह लीग जल्द खत्म हो गई. और इसके पीछे की कई वजह रहीं. कई घटनाक्रम चले. कानूनी लड़ाइयां हुईं. और खेल में राजनीति का दखल भी था? जानते हैं कहानी ICL की.
इंडियन क्रिकेट लीग: क्रिकेट के रोमांच को कर्मशल करने की एक जोरदार कोशिश
इंडियन क्रिकेट लीग यानी आईसीएल. साल 2007 से 2009 के बीच खेली गई टी20 लीग. यह प्राइवेट, फ्रैंचाइजी स्टाइल टी20 लीग थी. इसमें एक 50 ओवर का फॉर्मेट भी था. यह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट से आगे की एक छलांग थी. रणजी ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट से इतर. जहां राज्यों की घरेलू टीमें खेला करती थी. शुरुआत से ही आईसीएल में सब कुछ था. देशी और विदेशी सितारे. बड़े पैमाने पर कई शहरों की फ्रैंचाइजी. लेकिन इसमें खिलाड़ियों की नीलामी नहीं थी. जो आईपीएल के साथ है.
वक्त से आगे की थी सोच, किसने किया था इसे शुरू?
डॉक्टर सुभाष चंद्रा की अध्यक्षता वाले एसल ग्रुप के जी इंटरटेनमेंट इंटरप्राइजेज ने ही इस आईसीएल को शुरू किया था. यह लीग साल 2007 में शुरू हुई थी. आईसीएल ने टी20 क्रिकेट के व्यावसायिक रूप से बड़ा होने की संभावना को पहले ही देख लिया था. उस वक्त क्रिकेट के कई बड़े नामों ने आईसीएल का समर्थन किया था. इसमें भारत के पहले वर्ल्ड कप विजेता कप्तान कपिल देव भी थे. वह इस लीग के ब्रांड ऐम्बेसेडर भी थे. आईसीएल के एग्जीक्यूटिव ब्रांड में टोनी ग्रेग, डीन जोन्स और किरण मोरे जैसे पूर्व क्रिकेटर भी शामिल रहे.
कैसे किया गया आईसीएल को तैयार
आईसीएल में टीमों के नाम भारत के शहरों के नाम पर रखे गए थे. और आईसीएल वर्ल्ड में पाकिस्तान और बांग्लादेश की भी टीमें थीं. इसमें लाहौर बादशाह और ढाका वॉरियर्स जैसी टीमें थीं. इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का मेल था. आईसीएल की शुरुआत नवंबर 2007 में हुई. इस पहले टी20 सीजन के ज्यादातर मैच पंचकुला में खेले गए. यह चंडीगढ़ के पास हरियाणा का एक आधुनिक शहर है. इसके बाद इसे दूसरे शहरों में फैलाया गया. साल 2007-08 में इंडियन चैंपियनशिप को चेन्नई सुपरस्टार्स ने जीता. इसी सीजन में एक 50 ओवर का टूर्नामेंट खेला गया और बड़ी चैंपियनशिप भी खेली गई. 2008-09 में और टी20 ऐक्शन हुआ. साल 2008-09 में लाहौर बादशाह ने वर्ल्ड सीरीज इवेंट में जीत हासिल की.
आईसीएल के साथ क्या हुई गड़बड़
साल 2009 के बाद आईसीएल का कोई सीजन नहीं खेला गया. सिर्फ दो सीजन बाद इस लीग को बंद होना पड़ा. पर आखिर आईसीएल आगे क्यों नहीं बढ़ी. इसके पीछे बड़ी वजह बीसीसीआई रही. बोर्ड ने इसे गैर-अनुमति प्राप्त ‘बागी’ लीग के तौर पर देखा. यह भारतीय क्रिकेट पर बोर्ड के एकाधिकार को चुनौती थी. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने आईसीएल को मान्यता नहीं दी. और इसमें भाग लेने वाले खिलाड़ियों को बीसीसीआई के अंतर्गत खेले जा रहे सभी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट से बैन कर दिया. इतना ही नहीं उसकी ओर से बाकी बोर्ड्स पर भी दबाव डाला गया. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को जरिया बनाया गया. बीसीसीआई ने कपिल देव को नैशनल क्रिकेट अकादमी में भूमिका से हटा दिया और तो और उनकी पेशन भी रोक दी.
BCCI ने किया मदद से इनकार, करार दिया ‘बागी’
जब खिलाड़ियों को लगा कि उनके करियर पर जोखिम आ रहा है ज्यादातर क्रिकेटर इससे पीछे हट गए. इतना ही नहीं बीसीसीआई के अंतर्गत आने वाले राज्य बोर्ड ने आईसीएल को स्टेडियम देने से भी इनकार कर दिया. हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने मैदान मुहैया करवाए. दिल्ली हाईकोर्ट ने आईसीएल को खिलाड़ियों के अनुबंध को लेकर कुछ राहत दी. लेकिन इसके बाद भी बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को बैन करना जारी रखा.
आईपीएल का असर
आईसीएल के लिए सबसे बड़ा खतरा 2008 में आईपीएल के रूप में आया. आईपीएल ने टी20 लीग के रूप में इस लीग को सीधा चुनौती दी. इस लीग पर कोई बैन नहीं था. बड़ी फंडिंग थी और कई बड़े खिलाड़ी इससे जुड़े थे. आईपीएल ने टी20 क्रिकेट में नीलामी और फ्रैंचाइजी मॉडल को बड़ा कर दिया. उद्योग जगत के कई बड़े नामों और फिल्मी सितारों ने आईपीएल में टीमें खरीदीं. आईपीएल को ‘वैधता’ मिली. आईसीएल पर आईपीएल का असर लॉन्च होने से पहले ही दिखने लगा. साल 2009 में जब बीसीसीआई ने वापसी के लिए रास्ते खोले और कई खिलाड़ी आईसीएल को छोड़कर आईपीएल से जुड़ गए. वापसी की बीसीसीआई ने एक ही शर्त रखी थी कि उन्हें आईसीएल छोड़ना होगा. और उन्होंने ऐसी ही किया.
क्या दिखाया आईसीएल ने
अब सवाल यह है कि क्या भारत में एक से ज्यादा लीग अस्तित्व में रह सकती हैं. आईसीएल ने दिखाया कि टी20 फ्रैंचाइजी क्रिकेट को व्यावसायिक किया जा सकता है. हालांकि बीसीसीआई के पास शासन और प्रशासन की ताकत थी. और यही आईसीएल की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बनी. बोर्ड ने खिलाड़ियों को बैन करके उनके मन में खौफ पैदा कर दिया. क्रिकेट की दुनिया में कई लोग ICL को ‘बागी’ या ‘विद्रोही’ कहते हैं. लेकिन यह भी मानते हैं कि इस लीग ने आईपीएल के जन्म और दुनिया में उसकी धाक का रास्ता खोला. आज आईपीएल दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग है. यह हो सकता था कि आईपीएल के साथ आज आईसीएल भी मौजूद होती. लेकिन बोर्ड की ताकत को शायद यह मंजूर नहीं था.
This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
Strictly Necessary Cookies
Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings.
If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.