इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) के मैनेजिंग डॉयरेक्टर एश्ले जाइल्स (Ashley Giles) ने कहा कि अतीत में नस्लवाद के मामलों में शामिल रहे लोगों को दूसरा मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नस्लवाद बर्दाश्त नहीं करने का मतलब ये नहीं होता कि लोगों को वापसी का मौका नहीं दिया जाए।

इंग्लैंड क्रिकेट नस्लवाद से जुड़े विवाद में फंस गया जब यॉर्कशायर (Yorkshire) के खिलाड़ी अजीम रफीक (Ajeem Rafiq) ने आरोप लगाया कि अपने खेलने के दिनों में उनके साथियों ने एशियाई मूल का होने के कारण उन्हें ताना मारा था।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन (Michael Vaughan) का नाम भी विवाद में आया है। उन्होंने रफीक से माफी मांग ली लेकिन नस्लीय भाषा के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार किया।

वॉन को एशेज सीरीज के लिए बीबीसी की कमेंट्री टीम से हटा दिया गया है। जाइल्स ने हालांकि कि नस्लवाद में शामिल लोगों को दूसरा मौका दियाा जाना चाहिए।

जाइल्स ने कहा, ‘‘मेरी नजर में ‘जीरो टालरेंस’ का मतलब अगर लोगों को काट देना और वापसी का दूसरा मौका नहीं देना है तो फिर दिक्कत है। हम सभी गलतियां करते हैं और करते रहेंगे लेकिन हमें जागरूक करने और वापसी का मौका देने की जरूरत है। मौजूदा समय में ऐसा माहौल बनाने की जरूरत है जिसमें लोग अपने अनुभव साझा कर सकें।’’