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विराट कोहली और एलिस्टेयर कुक © Getty Images

जब राजकोट में खेले गए पहले टेस्ट मैच में टीम इंडिया हारते- हारते बची तो कप्तान विराट कोहली ने कहा था, “इंग्लैंड एक ऐसी टीम है जिसे हम मामूली रूप में नहीं लेंगे।” गौर करने वाली बात है कि ये बयान नंबर एक टेस्ट टीम के कप्तान की ओर से आया है। एक ऐसा कप्तान जो कभी अविश्सनीय इंग्लैंड टीम को 5-0 से हराने का मंसूबे देख रहा था। वहीं दूसरी ओर कॉमेंट्री बॉक्स में बैठे सहवाग कह रहे हैं कि भारत को चैंपियन की तरह खेलना चाहिए। लेकिन इसका परिणाम कुछ खास नहीं निकला और पहला टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ।

या यूं कह सकते हैं कि इंग्लैंड मैच जीतने के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा था। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में पहली बार विराट कोहली के हौंसले कुछ हद तक पस्त नजर आए हैं। जब उन्होंने कहा था, “शायद कोई साहसी आदमी ही होता जो 240 के स्कोर तक पारी की घोषणा करता लेकिन मैं सोचता हूं कि उस स्कोर पर पारी को घोषित किया जाना एक अच्छा निर्णय था।” वर्तमान क्रिकेट परिदृश्य के हिसाब से देखें तो इन दोनों टीमों के सुरक्षात्मक रवैए को देखकर हर किसी को परेशानी हो रही है, क्योंकि यह ऐसा समय है जब टीमें परिणाम प्राप्त करने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती हैं। [ये भी पढ़ें: इंग्लैंड का भारत के खिलाफ अच्छा खेलने का पाकिस्तानी कनेक्शन]

कोहली ने कुछ और बातें कहीं, “कम से कम हम ये जानते हैं कि मैच को कैसे ड्रॉ करवाया जाता है। इसके पहले कई लोग इस बात को लेकर अविश्वास में थे कि हमारी टीम मैच ड्रॉ करवाना जानती है कि नहीं। गौर करने वाली बात है कि कोहली वही कप्तान हैं जो बतौर कप्तान अपने पहले टेस्ट मैच में एडीलेड में पांचवें दिन 364 रनों का स्कोर चेज करना चाहते थे। लेकिन, अंततः उनकी टीम 48 रन पीछे रह गई थी। उस समय भी लोगों ने कोहली की खूब मटिया पलीत की थी और उनकी इस बात को लेकर खूब आलोचना हुई थी कि वह ड्रॉ के लिए क्यों नहीं खेले। लेकिन ये सब नहीं है जिसके लिए वह जाने जाते हैं। वह हमेशा ही विरोधी टीम के परखच्चे उड़ाने को लेकर लालायित रहते हैं। लेकिन यह सबकी सोच से परे है कि वही चीज पहले टेस्ट में देखने को क्यों नहीं मिली? [ये भी पढ़ें: दूसरे टेस्ट में इन चार कारणों से मिलेगी टीम इंडिया को जीत]

भारत को राजकोट टेस्ट के पांचवें दिन जीतने के लिए 310 रन 5 रन प्रति ओवर के हिसाब से बनाने थे। दुनिया की नंबर एक टीम को 310 रन बनाने की दरकार थी। कोहली की टीम को 310 रन चाहिए थे(#टीममिसबाह की ही तरह शायद #टीमकोहली भी कहा जाने लगे)। कोहली ने इस टेस्ट में कुछ वैसा नहीं किया और अपने आलोचकों कोई प्वाइंट न देने के लिए ड्रॉ के लिए खेले।

हिसाब- किताब लगाया जाए तो मेजबान टीम के पाले में जीत आ सकती थी। इसके लिए कोहली बैटिंग क्रम में बदलाव कर सकते थे। खुद को नंबर तीन पर ले आते और पुजारा को नीचे उतारते। जो वह इसके पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ भी कर चुके हैं। पुजारा को नीचे इसलिए कि अगर तेजी से विकेट गिरें तो पुजारा पारी संभाल लें। इस परिस्थिति में भारत थोड़ा फायदा उठा सकता था, लेकिन ये भी कह सकते हैं थोड़ी ही ज्यादा नहीं। भारत इस बात से इंकार नहीं कर सकता। चलिए इसे थोड़ा फैक्टस के आधार पर बताएं। भारत को शुरुआत देने का जिम्मा मुरली विजय और गौतम गंभीर के कंधों पर था। दोनों ही तेज तर्रार बल्लेबाजी करने में माहिर हैं। इसके अतिरिक्त ट्रेक में कुछ ऐसा खास नहीं था जो बल्लेबाजों को परेशानी में डाल रहा हो। अगर कोहली नंबर 3 पर आते तो ये बात इंग्लैंड को भौंचक्का छोड़ देती। वहीं दूसरी ओर रहाणे जो लॉर्ड्स पर 154 गेंदों में 103 रन बना चुके हैं वह भी अच्छे रन रेट के साथ बल्लेबाजी कर सकते थे। ऐसे में क्या 5 के रन रेट से रन बनाना विश्व की नंबर एक टीम को कठिन नजर आता है?

अगर टीम इंडिया जल्दी- जल्दी विकेट खोती तो साहा और अश्विन निचले क्रम में बैठे थे जो परिस्थिति को संभाल सकते थे। अगर सच कहें तो भारत मैच हार भी सकता था। इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन ऐसी परिस्थिति में ड्रॉ से बेहतर हार होती। लेकिन क्या वेस्टइंडीज 1980 के दशक में और ऑस्ट्रेलिया 1990 के दशक में ऐसे मौकों को छोड़ता। और एक बार फिर, एडीलेड टेस्ट हमें कोहली के तरीके से रूबरू कराता है। अगर उन्होंने तब आग से खेलने का फैसला किया था तो अब क्यों नहीं?

वहीं दूसरी ओर इंग्लैंड बिल्कुल भी अलग नजर नहीं आई। जाहिर है कि बांग्लादेश के खिलाफ 108 रनों की करारी शिकस्त रह- रहकर के उनकी आंखों के सामने झूल रही होगी। कुक ने कहा था, “हमारे लिए पांच दिन बेहतरीन रहे। हमने हर चीज बेहतरीन तरीके से की। यह निराशाजनक रहा कि हम जीत मुकम्मल नहीं कर सके। लेकिन यह अच्छा टेस्ट रहा। जो जैसा खेला उसे इस बात पर गर्व होना चाहिए।” वहीं दूसरी ओर खबर आ रही है कि लोकेश राहुल की टीम इंडिया में वापसी हो गई है। राहुल को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के दौरान हैमस्ट्रिंग की चोट लग गई थी जिसके बाद उन्हें पूरी टेस्ट सीरीज से आराम दे दिया गया था। उन्होंने शिखर धवन को स्थानापन्न किया था जिन्हें बाद में गंभीर ने रीप्लेस किया। राहुल ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी में राजस्थान के विरुद्ध 76 और 106 रनों की पारी खेली थी, और उन्होंने ये बात सिद्ध कर दी की वह पूरी तरह से फिट हैं।

उनके टीम में शामिल होने से एक बात साफ हो गई है कि गौतम गंभीर जिन्होंने सीरीज के पहले मैच में 29 और 0 रनों की पारियां खेलीं उन्हें अंतिम एकादश में जगह मिलने की संभावनाएं कम हैं। राहुल के संबंध में भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने कहा, “हम इस बात को पूरी तरह से स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि दूसरे टेस्ट में राहुल को बतौर सलामी बल्लेबाज प्राथमिकता देंगे और दूसरे टेस्ट में मुरली विजय के साथ राहुल पारी की शुरुआत करेंगे। राहुल को प्रथम श्रेणी मैच से सीधा भारतीय टीम में शामिल किया जाना नियमों के मुताबिक है। हम राहुल के जल्द से जल्द ठीक होने का इंतजार कर रहे थे। मुझे लगता है टीम प्रबंधन भी इसी तरह की सोच रखता है कि जो टीम के लिए फायदेमंद होगा उसी को टीम में चुना जाए। राहुल को वापस टीम में चुना जाना कुछ नया या अलग नहीं है। हमें उसकी वापसी की खुशी है और यही हम चाहते भी थे।”

भारतीय टीम के कोच अनिल कुंबले ने कहा, “अब वह चोट से उबर चुके हैं और प्रोटोकॉल के तहत उन्होंने एक रणजी मैच भी खेला है। आज उन्होंने शतक(106) बनाया। वहीं पहली पारी में उन्होंने 70 रनों की पारी खेली। जैसा कि मैच विशाखापत्तनम के पास में आयोजित किया जा रहा है। उनका टीम में होना अच्छा है और वह चयन के लिए उपलब्ध रहेंगे।”

इसके अलावा कुछ और कमियां भी हैं जिन्हें टीम इंडिया को ठीक करने की जरूरत है। विशाखापत्तनम में 5 गेंदबाजों के साथ टीम इंडिया उतरेगी य 4 गेंदबाजों के साथ एक ऑलरांडर को उतारेगी इस पर सबकी निगाहें रहेंगी। अगर टीम इंडिया 6 विशेषज्ञ बल्लेबाजों के साथ उतरती है तो क्या मिश्रा को अंतिम एकादश से बाहर निकाल दिया जाएगा? मिश्रा ने पहले टेस्ट में 4 विकेट लिए थे- जो भारतीय गेंदबाजों के बीच में सबसे ज्यादा हैं। वहीं, जब अंतिम बार टीम इंडिया विशाखापत्तनम में खेली थी तब मिश्रा का गेंदबाजी प्रदर्शन 6-2-18-5 रहा था। कोहली ने राजकोट टेस्ट के बाद कहा था, “मुझे पिच पर इतनी ज्यादा घास देखकर आश्चर्य हुआ था। ऐसा हीं होना चाहिए था।”

हालांकि, दूसरे टेस्ट के लिए पिच क्यूरेटर ने स्पिन फ्रेंडली विकेट बनाया है। ईस्ट जोन के बीसीसीआई क्यूरेटर अश्विन भोवमिक ने कहा, “यह एक न्यूट्रल पिच है। दोनों टीमों ने पिच देखी है और वो बहुत खुश हैं। हमारे दोनों क्यूरेटरों ने अच्छा काम किया है।” ऐसे में इन दोनों टीमों के बीच एक अच्छी टक्कर देखने को मिल सकती हैं।

टीमें:

भारत: विराट कोहली(कप्तान), रविचंद्रन अश्विन, गौतम गंभीर, रविंद्र जडेजा, अमित मिश्रा, मोहम्मद शमी, करुण नायर, हार्दिक पंड्या, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, लोकेश राहुल, रिद्धिमान साहा, इशांत शर्मा, मुरली विजय, जयंत यादव, उमेश यादव।

इंग्लैंड: एलिस्टेयर कुक(कप्तान), मोईन अली, जेम्स एंडरसन, जफर अंसारी, जॉनी बेयरेस्टो(विकेटकीपर), जेक बॉल, गैरी बैलेंस, गैरेथ बैटी, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोस बटलर (विकेटकीपर), बेन डकेट, स्टीवन फिन, हसीब हमीद, आदिल रशीद, जो रूट, बेन स्टोक्स, क्रिस वोक्स।