ईशांत शर्मा अपने करियर की शुरुआती में तूफानी गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे © Getty Images
ईशांत शर्मा अपने करियर की शुरुआती में तूफानी गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे © Getty Images

हमेशा से तेज गेंदबाजी को भारतीय क्रिकेट की कमजोरी के रूप में देखा गया है। इस कमजोरी के पीछे एक सबसे बड़ी वजह मानी गई है तो वह है तेज गति वाले गेंदबाजों की कमी। हालांकि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि भारतीय क्रिकेट टीम को कभी तेज रफ्तार वाले गेंदबाज नहीं मिले। बल्कि मिले और उन्होंने भारतीय क्रिकेट को आश्वस्त भी किया कि अब उनकी यह समस्या लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन दुर्भाग्य से ये तेज गेंदबाज अपनी रफ्तार को आगे के सालों में बरकरार नहीं रख पाए और एक आम मध्यम तेज गति के गेंदबाज बनकर रह गए। क्रिकेट विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय पिचों पर तेज गेंदबाजी करना मुश्किल होता है इसीलिए कुछ ही समय में भारतीय तेज गेंदबाज ठंडे पड़ जाते हैं। लेकिन इन सबके बावजूद कुछ भारतीय गेंदबाज ऐसे भी हैं जिन्होंने तेज रफ्तार गेंदबाजी करने के मामले में कुछ समय तक सफलता अर्जित की। तो आइए नजर डालते हैं भारत के स्पीडस्टर गेंदबाजो पर।

जवागल श्रीनाथ: लगभग एक दशक तक भारतीय तेज गेंदबाजी के अगुवा रहे श्रीनाथ ने भारतीय टीम को अपनी रफ्तार भरी गेंदबाजी के दम पर कई मौकों पर जीत दिलाई। श्रीनाथ ने सन् 1995 से सन् 2000 तक बेहद तेज गेंदबाजी की और विश्व क्रिकेट में सनसनी फैला दी। 1996 से 1997 के बीच भारत ने दक्षिण अफ्रीका के साथ सीरीज खेली। इस सीरीज में श्रीनाथ खूब चमके और उन्होंने अपनी रफ्तार से विश्व क्रिकेट को भारतीय गेंदबाजों की क्षमता से रूबरू कराया।

जवागल श्रीनाथ ने साल 1995 से 1997 के मध्य कई बार 150किमी./घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की © Getty Images
जवागल श्रीनाथ ने साल 1995 से 1997 के मध्य कई बार 150किमी./घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी की © Getty Images

क्रिकेट के उस दौर में दक्षिण अफ्रीका के एलन डोनाल्ड और लांस क्लूजनर को सबसे तेज गेंदें फेंकने के लिए जाना था। इन्हीं सालों में श्रीनाथ भी उभरे और उन्हें क्लूजनर और डोनाल्ड के समकक्ष गिना जाने लगा। उन्होंने इन सालों में खेली गई सीरीजों के दौरान कई दफे 150 किमी./घंटे की रफ्तार को पार किया। इसी बीच एक भारतीय न्यूज सर्विस के मुताबिक श्रीनाथ ने सबसे तेज 156 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी। श्रीनाथ का जादू विश्व कप 1999 में खूब चला और वे टूर्नामेंट में शोएब अख्तर के बाद दूसरे सबसे तेज गेंद फेंकने वाले गेंदबाज रहे। 1999 के विश्व कप के बाद श्रीनाथ एकदम से ढीले पड़ गए और 140 किमी. प्रति घंटा की स्पीड के ऊपर जाना ही उनके लिए भारी पड़ने लगा। श्रीनाथ ने 2003 के विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

ईशांत शर्मा: महज 20 साल की उमर में भारतीय क्रिकेट टीम में जगह बनाने वाले ईशांत शर्मा ने अपने करियर की शुरूआत में तेज रफ्तार की गेंदों से क्रिकेट प्रेमियों को अपना मुरीद बनाया। साल 2008 ईशांत के लिए सौगात लेकर आया जब भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई। ईशांत की कोण बनाती हुई गेंदों ने रिकी पोंटिंग समेत कई ऑस्ट्रेलियाई बल्लबाजों को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया। ये ईशांत की गजब की लाइन लेंथ और स्पीड का ही कमाल था कि ऑस्ट्रेलिया का विश्व प्रसिद्ध बल्लेबाजी क्रम उनके सामने घुटने टेकने को मजबूर था। ऑस्ट्रेलिया के इस दौरे में ईशांत ने कई दफे 150 किमी./घंटे के आसपास रफ्तार की गेंदें फेंकी। लेकिन एडीलेड टेस्ट में वे और भी घातक हो गए और अपने टेस्ट करियर की अबतक की सबसे तेज गेंद 152.6 किमी./घंटे फेंककर विपक्षी टीम के हौंसले पस्त कर दिए।

करियर की शुरुआत में ईशांत शर्मा ने अपनी तेज गेंदों के सहारे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंंग को कई बार आउट किया © Getty Images
करियर की शुरुआत में ईशांत शर्मा ने अपनी तेज गेंदों के सहारे ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंंग को कई बार आउट किया © Getty Images

उसके बाद के कई सालों तक ईशांत ने तेज रफ्तार से गेंदबाजी करना जारी रखा। लेकिन आगे के कुछ सालों में उनकी लाइन लेंथ पर सवाल उठना शुरू हो गए। जिसके बाद से ईशांत ने अपनी गति को संभाला और लाइन-लेंथ पर ध्यान देने लगे। फलस्वरूप ईशांत एक मीडियम पेसर बन कर रह गए। ईशांत में आज भी भारतीय क्रिकेट अपना भविष्य देखता है। वैसे आज भी भारतीय क्रिकेट अच्छे तेज गेंदबाजों के सूखे को झेल रहा है। ऐसे में ईशांत ने फिर से आस जगाई है। हो सकता है कि ईशांत फिर से अपनी गति में तेजी लाएं और भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाईयां दें।

वरुण अरोन: सन् 2011 में भारतीय टीम में पर्दापण करने वाले वरुन अरोन ने अपनी करियर की शुरुआत से ही तेज रफ्तार वाली गेंदबाजी की। लेकिन वे अपनी तेज स्पीड के बावजूद कुछ खास प्रभावी नहीं रहे, उनकी फॉर्म का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2011 में पर्दापण करने वाले अरोन ने राष्ट्रीय टीम के लिए अब तक कुल 9 वनडे मैच ही खेले हैं। वरुन वर्तमान में उन भारतीय गेंदबाजों में शामिल हैं जो लगातार 140 किमी./घंटे से ऊपर की रफ्तार में गेंदबाजी करते हैं।

 

अरोन ने 2010-11  रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड 153.4  किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी © Getty Images
अरोन ने 2010-11 रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड 153.4 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी © Getty Images

अरोन ने अपने करियर की सबसे तेज गेंद सन् 2014 में श्रीलंका के खिलाफ डाली थी। श्रीलंका के खिलाफ इस मैच में अरोन ने 152.5 किमी./घंटे के रफ्तार की सबसे तेज गेंद फेंकी थी। अरोन के नाम रणजी में सबसे तेज गेंद फेंकने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। अरोन ने 2010-11 रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड 153.4 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद फेंकी थी।

उमेश यादव: महाराष्ट्र के उमेश यादव ने 2010 में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण किया। उमेश लगातार 140 किमी./घंटे से ऊपर की रफ्तार में गेंदबाजी करने के लिए जाने जाते हैं। उमेश यादव ने श्रीलंका के खिलाफ एक बार 152.2 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद डाली थी।

 उमेश यादव ने श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में 152.2 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद डाली थी  © Getty Images
उमेश यादव ने श्रीलंका के खिलाफ एक मैच में 152.2 किमी./घंटे की रफ्तार से गेंद डाली थी © Getty Images

वैसे वे पारी में की दफे 150 के आसपास के रफ्कार की गेंदें फेंकते नजर आते हैं। ऑस्ट्रेलिया के महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रेथ उमेश यादव के प्रशंसक हैं। उमेश अभी तक 49 मैचों में 69 विकेट ले चुके हैं। उमेश ने आईसीसी विश्व कप 2015 में भारती टीम की ओर से सर्वाधिक विकेट लिए थे।

आशीष नेहरा: आशीष नेहरा भले ही आज भारतीय टीम में शामिल होने के लिए जूझ रहे हैं। लेकिन एक समय उनका नाम भारत के स्पीडस्टरों में लिया जाता था। आशीष नेहरा ने भारतीय टीम की ओर से टेस्ट मैच में पर्दापण सन् 1999 में श्रीलंका के खिलाफ कोलंबों में किया। नेहरा ने अपने पहले टेस्ट मैच में मर्विन अट्टापट्टू को बहुत जल्दी आउट कर दिया था, लेकिन वे इस मैच में और ज्यादा विकेट लेने में कामयाब नहीं हो पाए। ऐसा ही कुछ उनके एकदिवसीय पर्दापण मैच में भी हुआ। नेहरा ने टेस्ट पर्दापण के ठीक दो साल बाद भारत की एकदिवसीय टीम के लिए सन् 2001 में पर्दापण जिम्बाब्वे के विरुद्ध किया।

विश्व कप 2003 में नेहरा ने लगातार 150 किमी./घंटा के आसपास के रफ्तार की गेंदें फेंकी थी © Getty Images
विश्व कप 2003 में नेहरा ने लगातार 150 किमी./घंटा के आसपास के रफ्तार की गेंदें फेंकी थी © Getty Images

उन्होंने पारी की दूसरी ही गेंद पर एलिस्टियर कैंपबेल को आउट करने में सफलता अर्जित की। साल 2003 उनके लिए सबसे बेहतरीन साल रहा। 2003 के विश्व कप में उन्होंने बेहद घातक गेंदबाजी की और उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 23 रन पर छह विकेट लिए। इसी विश्व कप में नेहरा ने लगातार 150 किमी./घंटा के आसपास के रफ्तार की गेंदें फेंकी। इस दौरान उनकी सबसे तेज गेंद 149.7 किमी./घंटा मापी गई।