India make history, win first-ever cricket Test series in Australia
India captain Virat Kohli termed his team’s historic 2-1 series win on Australia soil as his “biggest achievement”

घातक तेज गेंदबाज, कलाई वाला स्पिनर, रन मशीन विराट कोहली और बिना स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर के कंगारू सेना पर भारत के जीत को तय ही माना जा रहा था। ऑस्ट्रेलियाई दिग्गजों को बड़बोलेपन की वजह नहीं मिली लिहाजा टेस्ट सीरीज से पहले ही भारतीय टीम के जीत का भविष्वाणी करनी शुरू कर दी थी।

साल 1947 में लाला अमरनाथ की कप्तानी में पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज खेला था। कई कप्तान और धुरंधरों खिलाड़ियों की सजी टीम ने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया साल 1980-81, 1985-86, 2003-04 में सीरीज ड्रॉ की लेकिन टेस्ट सीरीज अपने नाम ना कर पाए।

71 साल में पहली बार भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी के घर पर टेस्ट सीरीज में हराया है। चार मैचों की सीरीज का नजीता ऑस्ट्रेलिया के लिए और भी शर्मनाक होता अगर सिडनी टेस्ट में बारिश ने खलल ना डाली होती। मीन मेख निकालने वाले भारतीय टीम की ऑस्ट्रेलिया की सबसे कमजोर टीम पर जीत को ऐतिहासिक करार देने को तैयार नहीं।

भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा वक्त की सबसे ताकतवर टीम उतारी गई थी। बॉल टैंपरिंग में के दोषी स्मिथ और वार्नर के भारत के खिलाफ ना खेलने के जिम्मेदार कोहली की टीम नहीं। ऐसे में टीम से बड़ी जीत को कमतर आंकने का मतलब क्या बनता है। गेंदबाजी के लिहाज से अगर स्मिथ -वार्नर होते तो भी यही स्टार्क, हेजलवुड और मिशेल मार्श के अलावा बेहतर विकल्प नहीं थे।

एडिलेड और मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया ने घुटने टेके लेकिन पर्थ में जीत भी हासिल की मतलब अपने दिन टीम टक्कर देने का माद्दा रखती है। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया की सबसे ताकतवर टीम के खिलाफ जीत हासिल कर इतिहास रचा है। ये विराट कोहली की कप्तानी, चेतेश्वर पुजारा की जुझारू पारी और शानदार गेंदबाजी आक्रमण की जीत है।