भारतीय टीम © AFP
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भारत में क्रिकेट सबसे चर्चित खेल है। इस खेल को हर वर्ग के लोग खेलते हैं और खिलाड़ियों की प्रतिभा के आधार पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में खेलने का मौका मिलता है। चूंकि शिक्षा आजकल हर क्षेत्र में जरूरी हो गई है। लेकिन क्रिकेट को लेकर लोगों की धारणा होती है कि इस खेल के खिलाड़ी ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते। लेकिन पिछले कुछ दशकों में कई उच्च डिग्रीधारी क्रिकेटरों ने भी भारतीय टीम को अपनी सेवाएं दीं जिनके दम पर भारतीय टीम ने नई ऊंचाईयों को अपने नाम किया। तो आइए नजर डालते हैं इन हाइली-क्वालीफाइड क्रिकेटरों पर। ये भी पढ़ें: साल 2015: वनडे क्रिकेट के पांच सफलतम बल्लेबाज

1. अनिल कुंबले: साल 1970 में बैंगलुरू में जन्में अनिल कुंबले ने अपनी लेग स्पिन के प्रभाव में विपक्षी बल्लेबाजों को हथियार डालने के लिए कई बार मजबूर किया। भारत की तरफ से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले कुंबले ने अपने क्रिकेट करियर के अंत में भारतीय टेस्ट टीम की कप्तानी भी की। क्रिकेट मैदान के अलावा कुंबले पढ़ाई में भी अच्छे रहे।

अनिल कुंबले ©Getty Images
अनिल कुंबले ©Getty Images

उन्होंने प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज एजुकेशन बासावानागुड़ी से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने आरवीसीई कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री की। कुंबले इस तरह से टेक्निकल रूप से इंजीनियर बन गए थे। इसी बीच उन्होंने साल 1989 में भारतीय टीम में पर्दापण किया और भारतीय टीम को पूरे 21 साल तक सेवाएं दीं । कुंबले साल 2010 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से रिटायर हो गए। कुंबले विश्व के एकमात्र क्रिकेटर हैं जिन्होंने टेस्ट मैच की एक पारी में 10 विकेट लिए। ये भी पढ़ें: दोनों हाथों से गेंदबाजी/बल्लेबाजी करने वाले विश्व क्रिकेट के ये अजब खिलाड़ी

2. जवागल श्रीनाथ: 31 अगस्त 1969 को कर्नाटक में जन्में जवागल श्रीनाथ भारतीय टीम के पूर्व तेज गेंदबाज हैं अब वह आईसीसी के मैच रैफरी हैं। अपने समय के बेहतरीन तेज गेंदबाज श्रीनाथ वनडे क्रिकेट में 300 से अधिक विकेट लेने वाले भारत के एकमात्र तेज गेंदबाज हैं।

जवागल श्रीनाथ ©Getty Images
जवागल श्रीनाथ ©Getty Images

श्रीनाथ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण साल 1991 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध किया था। उन्होंने अपना अंतिम एकदिवसीय मैच भी ऑस्ट्रेलिया के ही खिलाफ साल 2003 में खेला। श्रीनाथ एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं उन्होंने क्रिकेट में आने से पहले मैसूर से इंस्ट्रुमेंटल इंजीनियरिंग में बैचलर इन इंजीनियरिंग डिग्री हासिल की थी। ये भी पढ़ें: जानें क्रिकेट के बैट, बॉल, विकेट की लंबाई-चौड़ाई

3. राहुल द्रविड़: भारतीय टीम के श्रीमान भरोसेमंद राहुल द्रविड़ को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी तकनीकि के कारण उन्हें लोग “द वॉल” कहा करते थे। अपने करियर के उत्तरार्ध में टीम के कप्तान रहे द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973, कर्नाटक में हुआ। द्रविड़ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरुआत 1996 में की और वह भारतीय टीम की ओर से 16 साल तक खेले।

राहुल द्रविड़ © Getty Images
राहुल द्रविड़ © Getty Images

द्रविड़ ने साल 2012 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया। द्रविड़ की स्कूलिंग बैंगलोर के एक जाने माने सेंट जोसेफ बॉयज हाईस्कूल से हुई। बाद में उन्होंने बैंगलोर के सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्श से कॉमर्श में डिग्री हासिल की। जब वह सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन से एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तभी उनका चयन भारतीय टीम के लिए हो गया। ये भी पढ़ें: जब वेंकटेश प्रसाद ने आमिर सोहेल को सिखाया सबक

4. वीवीएस लक्ष्मण: भारतीय टीम के स्टायलिश बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण को उनकी कलाईयों के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। लक्ष्मण का पूरा नाम वेंगीपुरापु वेंकटा साईं लक्ष्मण है। 1 नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्में लक्ष्मण ने टेस्ट पर्दापण दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ साल 1996 में किया।

वीवीएस लक्ष्मण © CricketCountry
वीवीएस लक्ष्मण © CricketCountry

उन्होंने साल 2006 में ही अपना अंतिम एकदिवसीय मैच भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ही खेला। लक्ष्मण की स्कूलिंग हैदराबाद के लिटिल फ्लावर हाई स्कूल से हुई। 10+2 करने के बाद लक्ष्मण ने डॉक्टर बनने के लिए एक मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया, लेकिन इस बीच उन्होंने दवाईयों के करियर को अलविदा कहते हुए क्रिकेट का दामन थाम लिया और आने वाले सालों में भारत के महान क्रिकेटर के रूप में उभरे।

5. रविचंद्रन अश्विन: वर्तमान समय में भारतीय टीम के सबसे बेहतरीन स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का जन्म 17 सितंबर 1986 को तमिलनाडु राज्य में हुआ। साल 2011 में अपने एकदिवसीय करियर की शुरुआत करने वाले अश्विन ने अपना पहला मैच साल 2011 में वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेला था।

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रविचंद्रन अश्विन © AFP

अश्विन ने क्रिकेटर बनने से पहले इंन्फॉरमेशन टेक्नॉलजी में बीटेक डिग्री चेन्नई के जाने माने कॉलेज से पास की है। लेकिन अंत में उन्होंने इंजीनियरिंग छोड़ क्रिकेट में करियर बनाने का निर्णय लिया।