मुंबई इंडियंस © BCCI
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रोहित शर्मा ने मुंबई इंडियंस के लिए कप्तान रहते हुए आईपीएल का तीसरा खिताब जीता। इस जीत के साथ, रोहित 10 आईपीएल संस्करणों में चौथी बार आईपीएल जीतने वाली टीम का अंग रहे। साल 2009 में खिताब जीतने वाली डेक्कन चार्जस टीम का वह अंग रहे थे। साल 2017 आईपीएल का फाइनल खासा करीबी रहा और रोहित पूरे मैच के दौरान खासे व्याकुल नजर आए। एक रन की जीत के साथ रोहित ने कहा कि वह बहुत बेचैन थे लेकिन उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें अपने गेंदबाजों पर भरोसा था।

मुंबई इंडियंस ने जब 15वें ओवर में अपने 79 पर 7 विकेट गंवा दिए थे तो क्रुणाल पांड्या ने 47 रन बनाते हुए टीम को 129 के स्कोर तक ले गए। अभी तक आईपीएल फाइनल में किसी भी टीम ने इतने छोटे स्कोर का बचाव नहीं किया था लेकिन रोहित को अपने गेंदबाजों पर भरोसा था। जिन्होंने अबतक टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और प्वाइंट टेबल में मुंबई इंडियंस को नंबर 1 टीम बनाया था।

प्रत्यक्ष रूप से परेशान दिख रहे रोहित शर्मा ने बताया, “ईमानदारी से कहूं तो मैं काफी बैचेन था, लेकिन लड़कों ने बेहतरीन जीत दिलवाई। 130 के स्कोर का बचाव करना एक बेहतरीन प्रयास का नतीजा है। मैं खुश हूं। हमें अपनी योजना कोबदलने की कभी जरूरत महसूस नहीं हुई। अगर आप एक विकेट लेते हो तो दो से तीन आते हैं। हमने इसके बारे में बातें की थीं। हमने अच्छी विविधता के साथ गेंदबाजी की। बहुत सारा श्रेय गेंदबाजी ईकाई को जाता है। जब आपकी टीम में जसप्रीत बुमराह और लसिथ मलिंगा जैसे गेंदबाज हों तो आपको विश्वास हमेशा रहता है। हमारे स्पिनर्स ने भी पूरे सीजन में बेहतरीन गेंदबाजी की।” रोहित शर्मा ने फाइनल में 22 गेंदों में 24 रन बनाए। ये भी पढ़ें-आईपीएल फाइनल, मुंबई इंडियंस बनाम राइजिंग पुणे सुपरजायंट का स्कोरकार्ड

लेकिन खराब बल्लेबाजी के बाद रोहित ने अपने गेंदबाजों को क्या कहा था? इसके बारे में बताते हुए रोहित ने कहा, “जब भी आप इस तरह के स्कोर को बचाते हो तो पहली चीज जो आपको करनी होती है वो है विश्वास। मैंने लड़कों को बताया था अगर हमने ये केकेआर के खिलाफ किया(मुंबई ने केकेआर को क्वालीफायर 2 में 107 रनों पर ऑलआउट कर दिया था) तो यहां भी एक रास्ता है और हम कर सकते हैं। वहां पिच से भी मदद मिल रही थी इसलिए ये जरूरी था कि हम परिस्थितियों को भुनाएं। जब तीन ओवर बचे थे, मुझे गेंदबाजों पर विश्वास था। जहां भी वे खेले हैं उन्होंने अपना काम बखूबी किया है। मुझे वहां उन्हें स्वतंत्रता देनी थी और कहना था कि करो जो तुम्हें करना हो और अपने हिसाब से फील्ड भी सेट कर लो।”

मुंबई इंडियंस ने पकड़ मजबूत बनाए रखी और अंतिम तीन ओवरों में पुणे को 30 रनों की दरकार थी। ये ओवर लसिथ मलिंगा, जसप्रीत बुमराह और मिचेल जॉनसन को फेंकने थे। आरपीएस को आखिरी ओवर में 11 रनों की दरकार थी। स्मिथ और तीवारी क्रीज पर थे। लेकिन मिचेल जॉनसन ने इस ओवर में सिर्फ 9 रन दिए और अपनी टीम को मैच जितवा दिया।