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पूर्व पाक स्पिनर ने धोनी की काबिलियत पर उठाए सवाल, कहा- कैच छोड़ने के लिए दिया गया 'मैन ऑफ द मैच'

सईद अजमल ने दिसंबर 2012 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए तीसरे वनडे का जिक्र करते हुए एक बड़ा बयान दिया है.

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@BCCI

महेंद्र सिंह धोनी ने 350 वनडे मैच खेलते हुए 10000 से ज्यादा रन बनाए और 321 कैच लिए. अपनी कप्तानी में भारत को 3 ICC ट्रॉफी जिताने वाले धोनी को 21 बार मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड से नवाजा गया. हालांकि जिस तरह के आंकड़े धोनी के हैं, उसे देखते हुए वह सबसे ज्यादा मैन ऑफ द मैच पुरस्कार पाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में काफी नीचे हैं. इस बीच पाकिस्तान के पूर्व स्पिनर सईद अजमल ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे धोनी की काबिलियत पर सवाल खड़े हो गए हैं.

दरअसल, सईद अजमल ने दिसंबर 2012 में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए तीसरे वनडे का जिक्र करते हुए एक बड़ा बयान दिया है. अजमल ने कहा है कि इस मैच में धोनी ने 2 कैच ड्रॉप किए और फिर भी भारतीय कप्तान को मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड दिया गया. अजमल ने नादिर अली के पोडकॉस्ट में वनडे में एक भी मैन ऑफ द मैच न जीत पाने के सवाल के जवाब में ये बात कही.

पू्र्व पाक स्पिनर ने कहा, “वनडे में मैन ऑफ द मैच न जीत पाना मेरा बहुत बड़ा बेड लक रहा. भारत दौरे पर मैंने तीसरे वनडे में 5 विकेट लेकर टीम इंडिया को 175 रनों पर ऑलआउट कर दिया. ये मेरी इकलौती वनडे और T20I सीरीज थी जो मैंने भारत में खेली. पहले 2 वनडे हमने जीते और मैंने दोनो ही मैचों में बेहतरीन गेंदबाजी की. फिर तीसरे वनडे में मैनें अपना बेस्ट बॉलिंग परफॉर्मेंस देते हुए भारत को 175 पर ऑलआउट कर दिया. 175 रन क्या स्कोर होता है? लेकिन कुछ 18 रन बनाने और दो कैच छोड़ने के लिए एमएस धोनी को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दे दिया गया. यह सही नहीं है. मैन ऑफ द मैच का क्या मतलब है? जिस खिलाड़ी का पूरे मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हो उसे ही ये अवॉर्ड मिलना चाहिए, है ना? लेकिन क्योंकि भारत ने मैच जीत लिया, इसलिए उन्होंने कैच छोड़ने के लिए धोनी को मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दे दिया.”

अजमल, जो अपने करियर में एक समय दुनिया के नंबर 1 रैंक वाले वनडे और T20I गेंदबाज थे, ने आश्चर्यजनक रूप से अपने करियर में कभी मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार नहीं जीता. अजमल ने 113 वनडे मैचों में दो बार पांच विकेट लिए. हालांकि, अजमल ने जिस तीसरे वनडे का जिक्र किया, उस मैच में धोनी ने 18 नहीं बल्कि 36 रन बनाए थे जो भारत की ओर से उस मैच में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था. यही नहीं, इस मैच में धोनी ने 2 नहीं बल्कि एक कैच छोड़ा था जो काफी मुश्किल था.

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