शिवनारायण चंद्रपॉल  © AFP
शिवनारायण चंद्रपॉल © AFP

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले वेस्टइंडीज टीम के दिग्गज क्रिकेटर शिवनारायन चंद्रपॉल के संबंध में एक नया खुलासा हुआ है। खबरों के मुताबिक चंद्रपॉल ने स्वेच्छा से संन्यास नहीं लिया था बल्कि उन्हें संन्यास लेने के लिए मजबूर किया गया था। चंद्रपॉल के संन्यास के बाद कैरेबियाई बोर्ड और खिलाड़ियों के तल्ख रिश्तों की तस्वीरें फिर से सामने आ गई हैं। चंद्रपॉल ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें मास्टर चैंपियंस लीग में खेलेने के लिए एनओसी चाहिए थी जिसे प्राप्त करने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सं संन्यास लेना पड़ा। चंद्रपॉल ने अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच मई 2015 में खेला था और उन्हें बाद में दिसंबर में वेस्टइंडीज के अनुबंधित खिलाड़ियों की सूची से भी हटा दिया गया। ये भी  पढ़ें: वनडे सीरीज में वापसी करेंगेः एबी डीविलियर्स

चंद्रपॉल ने ईएसपीएन क्रिकइन्फो को बताया, “मुझे वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड(डब्ल्यूआईसीबी) ने एक क्लॉज के साथ नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट(एनओसी) दिया था, जिसमें लिखा था कि मैं 23 तारीख को संन्यास ले लूंगा। मैंने गुयाना से बातचीत कर ली है। मुझे पता है कि चेयरमेन चाहते हैं कि मैं वापस आऊं और खेलूं। गुयाना अपना पहला मैच त्रिनदाद के खिलाफ खेलेगा जो 12 फरवरी से शुरू हो रहा है। मैंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया है। हां मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास जरूर ले लिया है। मुझे वेस्टइंडीज टीम की ओर से चुना नहीं जा रहा था और वहां मेरे करने के लिए कुछ ज्यादा नहीं बचा था। इसीलिए मैंने निर्णय लिया कि मैं यूएई में आकर क्रिकेट खेलूंगा।” चंद्रपॉल को गुयाना की ओर से खेलने में जहां मामूली रकम मिलती है वहीं एमसीएल के लिए मात्र 2 हफ्ते के लिए खेलने के लिए उन्हें $30,000 दिए गए हैं।

उन्होंने आगे बताया, “मेरा किसी के साथ कोई अनुबंध नहीं है। ना ही स्थानीय बोर्ड के साथ और ना ही वेस्टइंडीज बोर्ड के साथ। मैं गुयाना के लिए इसलिए खेल रहा हूं क्योंकि कोच और चेयरमेन मानते हैं कि मेरे खिलाड़ियों के आसपास रहने के लिए खिलाड़ी अपने आपकोअच्छी तरह से ढाल पा रहे हैं। वे मुझे मैच फीस पे करते हैंऔर मैं जितना युवा खिलाड़ियों की मदद कर सकता हूं करता हूं।