भारत के सिक्सर किंग युवराज जिंह भारतीय टीम में वापसी की जद्दोजहद में जुटे हैं © Getty Images
भारत के सिक्सर किंग युवराज सिंह भारतीय टीम में वापसी की जद्दोजहद में जुटे हैं © Getty Images

क्रिकेट के खेल में खिलाड़ियों को मामूली चोटें तो अक्सर लगती रहती हैं, खेल के दौरान खिलाड़ी घायल भी हो जाते हैं। क्रिकेट खिलाड़ियों की जान मैदान के अंदर और मैदान के बाहर दोनों ही जगह खतरे में रहती है। कुछ खिलाड़ी मैदान में खेलते वक्त ही अपनी जान गंवा बैठे। रेमंड वेन स्कूर और फिलिप ह्यूज उन्हीं खिलाड़ियों में से एक हैं। वहीं कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे जिन्होंने मौत से जंग लड़कर मौत को मात दे दी। आज हम आपको ऐसे ही जुझारू क्रिकेट खिलाड़ियों के बारे में जिन्होंने मैदान के अंदर या फिर मैदान के बाहर मौत को मात दी। तो आइए जानते हैं ऐसे ही दस खिलाड़ियों के बारे में।

ज्योफ्रे बॉयकॉट: गले का कैंसर

इंग्लैंड टीम के पूर्व खिलाड़ी जो कि अपने शानदार कमेंटरी के लिए जाने जाते हैं अपने जीवन में बहुत मुश्किल के दौर से गुजरे हैं। साल 2003 में जब भारतीय टीम इंग्लैंड के दौरे पर थी तो ज्योफ्रे बॉयकॉट को गले के कैंसर के बारे में पता चला। कैंसर के कारण बॉयकॉट को अपने सबसे पसंदीदा पेशा कमेंटरी से भी लगभग एक साल तक के लिए दूर होना पड़ा। उपचार के दौरान बॉयकॉट को 35 बार रेडियोथेरेपी से गुजरना पड़ा, जिसके बाद बॉयकॉट ने सफल वापसी की और एक साल बाद कमेंटरी में फिर वापसी की। भारत बनाम न्यूजीलैंड, पांचवां वनडे: स्कोर कार्ड जानने के लिए क्लिक करें

9. वसीम अकरम: बंदूकधारी द्वारा हमला

पाकिस्तान के महान क्रिकेट खिलाड़ी वसीम अकरम तब बाल-बाल बच गए थे जब कुछ बंदूकधारियों ने कराची में उनकी कार पर खुलेआम गोलीबारी कर दी थी। दुनिया के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक वसीम अकरम के साथ ये हादसा तब हुआ जब वह नेशनल स्टेडियम में कोचिंग देने के लिए जा रहे थे। हमले के बाद अकरम ने बताया ‘सामने से आ रही कार ने मेरी कार में टक्कर मारी, जब मैंने उसे रोका, तो वह अपनी कार से निकलकर मेरी कार में अंधाधुंध गोलीबारी करने लगा।’ हालांकि अकरम काफी भाग्यशाली थे कि सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें उस हमले से बचा लिया था।

8. दिनेश चंडीमल: सुनामी

श्रीलंक के क्लासिकल बल्लेबाज दिनेश चंडीमल साल 2004 में आई सुनामी में बाल-बाल बच गए थे। श्रीलंका में साल 2004 में सुनामी के कारण भारी तबाही हुई थी। इसी दौरान चंडिमल का घर भी सुनामी की चपेट में आ गया था और चंडीमल के घर में रखा हर सामान अपने साथ बहा ले गया था। चंडीमल काफी भाग्यशाली थे कि वह उस भयानक आपदा की चपेट में आने से बच गए थे। चंडीमल ने इस हादसे के बाद दोबारा मैदान में वापसी की है।

7. मैथ्यू वेड: टेस्टीकुलर कैंसर

ऑस्ट्रेलिया के बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक वेड भी उन खिलाड़ियों की लिस्ट में आते हैं जो कैंसर से जंग लड़े और अंत में विजयी पाने में सफल रहे। वेड अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आने से पहले ही कैंसर से पीड़ित हो गए थे। जब वह 16 साल के थे तो एक बार फुटबॉल खेलते वक्त वह घायल हो गए थे, जिसके बाद उपचार के दौरान डॉक्टरों को मालूम पड़ा कि वेड को कैंसर है। हालांकि वेड ने कैंसर से जंग लड़ी और विजयी हुए, वेड ने ऑस्ट्रेलिया के लिए साल 2011 में पदार्पण भी किया।

6. एंड्रू फ्लिनटफ: कैरेबियन सागर में डूबने से बचे

साल 2007 में विश्वकप के दौरान महत्पूर्ण मैच से पहले फ्लिनटफ ने शराब पी थी। शराब के नशे में फ्लिनटफ कैरेबियन सागर में सैर के लिए निकल पड़े थे, सैर के दौरान फ्लिनटफ की नाव कैरेबियन सागर में डूब गई था, हालांकि फ्लिनटफ को दूसरी नाव की मदद से बचा लिया गया था। फ्लिनटफ ने कहा, ‘वह एक काली रात थी, उस बीच पर जाना सबसे बड़ी भूल थी।’ इस हादसे के बाद फ्लिनटफ को उपकप्तानी के पद से हटा दिया गया था लेकिन टीम में वह बरकरार थे। बाद में हादसे को ‘फ्रिडेलो हादसे’ का नाम दिया गया था।

5. जैसे राइडर: कोमा

साल 2013 में जैसे राइडर को गंभीर हालत में क्राइस्टचर्च के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दरअसल, क्राइस्टचर्च के ऐकमन्स बार में राइडर की कुछ युवकों के साथ झड़प हो गई थी। खबरों के मुताबिक राइडर पर चार लोगों ने हमला किया था। हमले में राइडर बुरी तरह घायल हो गए थे और कोमा में चले गए थे। राइडर के फेफड़ों को काफी नुकसान हुआ था। लगभग एक महीने के इलाज के बाद राइडर को डॉक्टरों ने पहले जैसा फिट कर दिया था और राइडर मौत को मात देने में काबमयाब हो गए थे।

4. मुथैया मुरलीधरन: सुनामी

दुनिया के सबसे खतरनाक स्पिनर और बल्लेबाजों को अपनी घूमती गेंदों से परेशानी में डालने वाले खुद उस समय बड़ी परेशानी में आ गए जब वह श्रीलंका में आई सुनामी में फंस गए थे। सुनामी में सबसे ज्यादा तबाही गाले में हुई थी। मुरलीधरन को गाले में बच्चों की चैरिटी सभा में जाना था, लेकिन जब वह रास्ते में थे तो मुरलीधरन के भाई ने उनसे कहा ‘सुनामी की लहरें गाले में ज्यादा उंचाई तक उठ रही हैं, तुम वापस कोलंबो आ जाओ।’ इसके बाद मुरलीधरन कोलंबो की तरफ रवाना हो गए। लेकिन उस सभा में जा रहे 50 बच्चे सुनामी की चपेट में आने से अपनी जान गंवा बैठे थे।

3. माइकल क्लार्क: स्किन कैंसर

साल 2006 में माइकल क्लार्क स्किन कैंसर से पीड़ित हो गए थे। ऑस्ट्रेलिया में स्किन कैंसर आम बात है। स्केन कैंसर की वजह से क्लार्क के चेहरे पर दो निशान पड़ गए थे। जब क्लार्क को इस बात का पता चला तो वह अस्पताल में भर्ती हो गए जहां उन्हें कई तरह के उपचारों से गुजरना पड़ा। हालांकि इलाज के बाद क्लार्क को समस्या नहीं हुई और वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफल वापसी करने में कामयाब रहे और अपनी कप्तानी में साल 2015 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया को एक बार फिर विश्व चैंपियन बना दिया।

2. युवराज सिंह: लंग कैंसर

साल 2011 के विश्वकप में युवराज सिंह हीरो बनकर उभरे थे, लेकिन कुछ ही दिनों बाद युवराज को पता चला कि उन्हें लंग कैंसर है। युवराज सिंह को सांस लेने में तकलीफ, बुखार, नौसिया जैसे लक्षण थे जो कि लंग कैंसर के पहली श्रेणी में पाए जाते हैं। जिसके बाद युवराज सिंह अमेरिका के बॉस्टन में कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में अपना इलाज कराने लगे। इस दौरान उन्हें कई बार कैमियोथेरेपी से गुजरना पड़ा। अमेरिका में युवराज के लिए दुआएं मांगने वाले काफी लोग थे। युवराज सिंह समय-समय पर अपनी फोटो सोशल साइट पर अपलोड करते रहते थे। युवराज सिंह अंत में कैंसर से जंग में विजयी रहे और दोबारा भारतीय क्रिकेट टीम में सफल वापसी की।

1. श्रीलंका क्रिकेट टीम: आतंकी हमले में बचे

श्रीलंकी की टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी। जब टीम लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में मैच खेलने के लिए बस में जा रही थी तभी स्टेडियम के नजदीक बस में 12 आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर दी। श्रीलंका की टीम दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन के खेल के लिए स्टेडियम जा रही थी। लेकिन बीच में ही आतंकियों ने खिलाड़ियों की बस में जबर्दस्त गोलीबारी कर दी। गोलीबारी में श्रीलंका के 6 खिलाड़ी घायल हुए थे और 2 नागरिक समेत 6 पाक सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। थिलन समरवीरा और थरंगा परनाविताना को हादसे के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। श्रीलंका के कई खिलाड़ियों को गोलियों के छर्रे लगे थे, हादसे में अंपायर अहसान रजा की कार में भी गोलीबारी हुई थी। हालांकि सभी खिलाड़ियों को हेलीकॉप्टर की मदद से फौरन श्रीलंका रवाना कर दिया गया था।