सरफराज नवाज ने 70 से 80 के दशक के बीच पाकिस्तान के बेहतरीन तेज गेंदबाज रहे  © Getty Images
सरफराज नवाज 70 से 80 के दशक के बीच पाकिस्तान के बेहतरीन तेज गेंदबाज रहे © Getty Images

पाकिस्तान क्रिकेट के पूर्व तेज गेंदबाजों में से एक सरफराज नवाज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पर्दापण 1969 में किया था। तब उनकी उम्र मात्र 20 साल थी। लेकिन साल 1974 तक वह लाइम लाइट में नहीं आए, लेकिन उसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के तेज गेंदबाजी विभाग में क्रांति ला दी। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान खान और मुश्ताक अहमद ने एक पाकिस्तानी अखबार से बातचीत में बताया था कि सरफराज नवाज एक विवादी स्वभाव का शराब में उनमत्त रहने वाला व्यक्ति था। ये भी पढ़ें: वीडियो: सचिन तेंदुलकर ने अपने अंतिम वनडे मैच में खेली थी तूफानी अर्धशतकीय पारी

सरफराज की लंबाई 6 फीट चार इंच थी और उनके अन्य शौक क्लब में जाकर लड़कियों के साथ डांस करना थे। क्रिकेट मैदान में भी वह अपना सब कुछ देने के लिए तत्पर रहते थे। लेकिन इसके अलावा वह बोर्ड व टीम प्रबंधन के नियमों को तोड़ने में कोई कौताही नहीं बरतते थे। मुश्ताक इस बात को पता लगाने की फिराक में हमेशा रहते थे कि नवाज टीम के कर्फ्यू को तोड़कर होटल से बाहर जाकर रातभर लड़कियों के साथ क्लबों में पार्टी करता था, लेकिन जब सुबह क्रिकेट फील्ड में प्रेक्टिश पर पहुंचने की बात होती थी तो वह सबसे पहले पहुंच जाता था। ये भी पढ़ें: भारत के पांच सबसे तेज गेंदबाज

पाकिस्तान टीम के दूसरे पूर्व कप्तान इंतिखाब आलम ने बताया कि 1974 के इंग्लैंड दौरे के दौरान वह नवाज ही था जिसने इमरान खान को लंदन की चमचमाती नाइटलाइफ से रूबरू करवाया था। जिसकी वजह से इमरान के चचेरे भाई माजिद खान बहुत चिंतित होने लगे थे। नवाज वह पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी(जावेद मियांदाद के साथ) हुए जिन्होंने ऑस्ट्रेलियाईयों की स्लेजिंग करने की आदत को अपनाया। जिसमें गेंदबाज/फील्डर बल्लेबाज पर ताना मारते हुए उसे उकसाने की कोशिश करते हैं। मुश्ताक और खान ने बताया था कि नवाज और मियांदाद अपने अलग रवैए के कारण विपक्षी बल्लेबाजों के लिए 1976 से 1979 तक किसी आतंक की तरह रहे जो उन्हें लगातार उकसाते रहते थे।

नवाज ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को पंजाबी में गालियां दिया करते थे। लेकिन इस दौरान उनके मुख्य टारगेट भारतीय सलामी बल्लेबाज सुनील गावस्कर रहे। भारत के साल 1978 में पाकिस्तान दौरे के दौरान सुनील गावस्कर ने नवाज के खराब व्यवहार की कई बार शिकायत कप्तान मुश्ताक अहमद से यह कहते हुए की थी कि वह उन्हें संभालें। नवाज पाकिस्तान के पूर्व राजनेता जुल्फिकार अली भुट्टो के बड़े फैन थे। इसीलिए जब साल 1977 में जिया उल हक ने पाकिस्तान में तख्ता पलट किया तो नवाज का भी पाकिस्तान टीम में असर कम हो गया। इमरान खान : पाकिस्तान क्रिकेट का ‘कैसानोवा’

साल 1977 में इंग्लैंड ने पाकिस्तान का दौरा किया। इसी दौरान एक साइड मैच में एक टेलीवीजन कैमरा जिसका बूम माइक्रोफोन लाइन पर रखा हुआ था उस पर नवाज की एक तस्वीर और आवाज कैद हुई जिसमें नवाज पंजाबी में कह रहे थे कब तक हमें नामुराद जिया-उल हक को सहन करना पड़ेगा। उनका यह बात कहना पूरी तरह से इस ओर इशारा कर रहा था कि वह जिया-उल हक के खिलाफ थे।

साल 1979 में पाकिस्तान-ऑस्ट्रेलिया सीरीज में पाकिस्तान ने एक असंभव मैच को जीता। सरफराज ने इस मैच की एक पारी में 9 विकेट लिए थे। इसके बाद एक ऑस्ट्रेलियाई टीवी कमेंटेटर ने उनका साक्षात्कार किया और उनसे पूछा कि आप इस जीत का जश्न कैसे मनाएंगे तो उन्होंने कहा, जाहिर है कि कुछ ड्रिंक्स के साथ, लेकिन जब उन्हें यह पता चला पाकिस्तान में अप्रैल 1977 से मुस्लिमों के लिए शराब की बिकवाली पर प्रतिबंध है तो उन्होंने अपने बयान को जांचते हुए कहा, ‘मेरा मतलब है सॉफ्ट ड्रिंक,, सॉफ्ट ड्रिंक…हम जीत का जश्न सॉफ्ट ड्रिंक के साथ मनाएंगे।’

अपने संन्यास के बाद सरफराज कई बार विवादों में आए जब उन्होंने खुलासा किया कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने 1979 के विश्व कप में मैच-फिक्सिंग की थी। उनके करियर के दौरान उनकी नए कप्तान आसिफ इकबाल से बिल्कुल नहीं बनी। इकबाल ने उन पर आरोप लगाया कि वह रात को लगातार बाहर रहते हैं और टीम के नियमों को तोड़ते हैं। साथ ही वह टीम के अभ्यास सत्र और बैठक में भी नहीं आते।

टूर्नामेंट के बाद नवाज ने पाकिस्तान के एक अखबार को साक्षात्कार में बताया था कि आसिफ ने टीम में अपना एक गुट बना लिया था और अगर कोई खिलाड़ी उसकी बातों को मानने से इंकार करता था तो उसे पहले चेताया जाता और बाद में दौरे में अंतिम एकादश में नहीं चुना जाता था। उन्होंने बताया कि आसिफ ने उन्हें कई मैचों में बिना किसी कारण के मैच के बाहर बिठाया था। वहीं वसीम रजा को भी बिना किसी कारण के विश्व कप 1975 के वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए बेहद महत्वपूर्ण सेमीफाइनल मैच में बाहर बिठा दिया था।

यह विवाद और भी बड़ा हो गया जब 6-टेस्ट मैच के लिए भारत दौरे पर आसिफ की जगह टेस्ट टीम का कप्तान मुश्ताक मुहम्मद को बना दिया गया। सरफराज ने आसिफ पर आरोप लगाया कि वह मुश्ताक के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। इसके बाद उन्होंने आसिफ के टीम में होते हुए दौरे पर जाने से इंकार कर दिया। नवाज 1980 में टीम में तब लौटे जब आसिफ ने क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

सरफराज ने भी साल 1982 में क्रिकेट से संन्यास लेने का मन बनाया, लेकिन उनके बेस्ट फ्रेंड इमरान खान ने उन्हें कुछ दिन और क्रिकेट खेलने के लिए मना लिया। इसी साल मई 1982 को इमरान पाकिस्तान टीम के नए कप्तान बने। नवाज ने अंततः साल 1984 में 35 साल की उम्र में क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 1990 के दशक में इमरान खान ने ‘बोर्न अगेन मुस्लिम’ की धारणा को अपनाया जिसका नवाज ने पुरजोर विरोध किया और उन्होंने खान को पाखंडी बताया। खान ने नवाज के शब्दों पर कटाक्ष करते हुए उन्हें पागल बताया। सरफराज और इमरान खान ने साथ मिलकर 1976 से 1983 तक पाकिस्तानी तेज गेंदबाजी को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाया।

साल 1994 में जब टीम के खिलाड़ियों राशिद लतीफ, आमिर सोहेल और बासित अली ने टीम के अन्य खिलाड़ियों के मैच फिक्सिंग में शामिल होने का आरोप लगाया तो नवाज ने उनका खुलकर समर्थन किया। साल 1999 में उन्होंने आरोप लगाया कि मैच फिक्सिंग पाकिस्तान के पूर्व कप्तान आसिफ इकबाल और भारत के सुनील गावस्कर ने साल 1979 में शुरू की थी। जब दोनों खिलाड़ियों को यह बात पता चली तो उन्होंने कहा कि नवाज का दिमाग खराब हो गया है। सरफराज ने तीन शादियां की। आज वह अकेले रहते हैं।