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धोनी होते शुरू से कप्तान तो क्या होता चेन्नई सुपर किंग्स का हाल, हरभजन सिंह ने रखी अपनी राय

अगर महेंद्र सिंह धोनी शुरू से चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी करते तो क्या टीम प्लेऑफ में क्वॉलिफाइ कर जाती। यह बड़ा सवाल है।

हरभजन सिंह @IPL

चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के लिए यह सीजन भुला देने वाला रहा। चार बार की चैंपियन ने 13 में से सिर्फ चार मैच जीते हैं और वह अंक तालिका में नौवें स्थान पर है। मैदान पर खेल के अलावा कई अन्य चीजें भी रहीं जिसके कारण चेन्नई सुपर किंग्स की टीम सुर्खियों में रही। चेन्नई ने सीजन शुरू होने से दो दिन पहले बताया कि महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) नहीं बल्कि रविंद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) टीम के कप्तान होंगे। लेकिन बीच सीजन में ही टीम ने अपना फैसला पलट दिया और दोबारा धोनी को टीम की कमान सौंप दी। इससे, यह साफ संकेत गया कि रविंद्र जडेजा और टीम प्रबंधन के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं हैं।

हालांकि, धोनी के कप्तान बनने के बाद टीम के प्रदर्शन में कुछ सुधार आया। यह भी कहा जाने लगा कि अगर धोनी शुरुआत से टीम की कमान संभालते तो शायद यह टीम की स्थिति बेहतर होती और वह प्लेऑफ के लिए क्वॉलिफाइ भी कर जाते। टीम इंडिया के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) हालांकि इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। हरभजन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि धोनी अगर शुरू से कप्तान होते तो भी चेन्नई प्लेऑफ तक का सफर तय कर पाती।

स्पोर्ट्सकीड़ा के साथ बातचीत में हरभजन ने कहा, ‘अगर धोनी शुरू से कप्तान होते तो भी मुझे नहीं लगता कि यह टीम अंतिम चार में पहुंच पाती। इसके पास वैसे खिलाड़ी ही नहीं हैं। तो इस टीम के साथ तो प्लेऑफ में पहुंचना नहीं हो पाता। क्योंकि इसमें खिलाड़ी ही नहीं हैं।’

हरभजन ने हालांकि माना कि टीम की स्थिति बेहतर होती। उन्होंने कहा, ‘अगर धोनी शुरू से कप्तानी करते तो हो सकता था कि पॉइंट्स टेबल में यह टीम थोड़ा ऊपर होती। एक-दो पायदान ऊपर हो सकती थी लेकिन प्लेऑफ में तब भी नहीं पहुंच पाती। ऐसा पहली बार है कि चेन्नई के पास टीम ही नहीं है।’

चेन्नई सुपर किंग्स को दीपक चाहर (Deepak Chahar) के बाहर होने का बड़ा झटका लगा था। हरभजन ने माना कि चाहर का न होना टीम को भारी पड़ा। उन्होंने कहा, ‘चाहर पावरप्ले में विकेट निकालते और लोअर ऑर्डर में रन भी बनाते। उनकी कमी खली।’ भारत के तीसरे सबसे कामयाब गेंदबाज ने कहा, ‘चेन्नई के पास गेंदबाज नहीं थे और बल्लेबाजों ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। इसका नुकसान टीम को उठाना पड़ा।’

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