पूर्व गेंदबाज और सौराष्ट्र के कोच करसन घावरी (Karsan Ghavri) को मानना है कि टीम को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने वाले कप्तान जयदेव उनादकट (Jaydev Unadkat) को दोबारा राष्ट्रीय टीम में शामिल किया जाना चाहिए। उनादकट की कप्तानी में सौराष्ट्र में बंगाल को फाइनल मैच में हराकर पहली बार रणजी ट्रॉफी पर कब्जा किया।

खिताबी जीत के साथ कार्यकाल खत्म करने वाले घावरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ इंटरव्यू में कहा, “मुझे लगता है कि उनादकट को राष्ट्रीय टीम में मौका मिलना चाहिए। वो गेंद को अंदर ला सकता है और बल्लेबाज से दूर भी ले जा सकता है। वो निरंतर गेंद को एक ही एरिया में डाल सकता है।”

पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने कहा, “उसने अपनी फिटनेस पर काम किया है और अब लंबे स्पेल डाल सकती है। वो नई गेंद के साथ काम कर सकता है और पुरानी गेंद को भी संभाल सकता है। इसलिए आप उसे किसी भी स्थिति में इस्तेमाल करस सकते हैं।”

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तेज गेंदबाज उनादकट ने भारत के लिए 24 जुलाई 2013 को डेब्यू किया था। उन्होंने अब तक भारत के लिए एक टेस्ट, सात वनडे और 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय खेले हैं लेकिन उनादकट भारतीय प्लेइंग इलेवन में जगह पक्की करने में नाकाम रहे। वहीं भारतीय टीम के मौजूदा पेस अटैक ने भी उनका काम आसान नहीं होने दिया।

जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, उमेश यादव, इशांत शर्मा और भुवनेश्वर कुमार वाले अटैक के बीच किसी भी नए गेंदबाज के लिए जगह बनाना मुश्किल ही होगा। इस बात को घावरी ने भी माना, उन्होंने कहा, “हां, ये सच है कि हमारे पास अब तक शानदार पेस अटैक है लेकिन मैं ये कहूंगा कि अगर राष्ट्रीय चयनकर्ता कभी किसी गेंदबाज को आराम देना चाहते हों तो ऐसे मामले में उन्हें उनादकट का नाम ध्यान में रखना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “हमारे सारे तेज गेंदबाज दाएं हाथ के हैं। एक बाएं हाथ का गेंदबाज आपको नया विकल्प दे सकता है। दाएं और बाएं हाथ के गेंदबाजों का कॉम्बिनेशन बल्लेबाज को असहज कर सकता है।”

कोच ने कहा, “वो अब आगे से नेतृत्व करता है और अपनी भूमिका को अच्छे से समझता है। वापसी की भूख ने उसे पूरे सीजन अच्छा प्रदर्शन करने का प्रोत्साहन दिया।” उनादकट आखिरी बार बांग्लादेश के खिलाफ खेले गए निदाहास ट्रॉफी फाइनल मैच में नजर आए थे।