महेंद्र सिंह धोनी को जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान दाईं आंख में बेल लग गयी थी Photo Courtesy: MS Dhoni’s Instagram account
महेंद्र सिंह धोनी को जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतिम टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान दाईं आंख में बेल लग गयी थी Photo Courtesy: MS Dhoni’s Instagram account

विकेटकीपरों को मैच के दौरान लगने वाली गंभीर चोटों से बचाने के लिये मेलबर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने ‘टीथर वाली बेल’ के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है जिससे स्टंप उखड़ने के समय बेल के उछलने की दूरी सीमित हो जायेगी। मार्क बाउचर को 2012 में दक्षिण अफ्रीका के इंग्लैंड दौरे पर शुरूआती मैच के दौरान बाई आंख में गंभीर चोट लगी थी जब बेल उखड़कर उनकी आंख में लग गयी थी। इसके बाद उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी और आखिर में संन्यास लेना पड़ा था।

भारत के पूर्व विकेटकीपर सबा करीम का करियर भी इसी तरह की चोट के कारण खत्म हो गया था। उन्हें साल 2000 में ढाका में बांग्लादेश के खिलाफ एशिया कप मुकाबले में इसी तरह की चोट लगी थी। अनिल कुंबले की गेंद पर बेल उखड़कर बल्लेबाज के जूते से लगकर करीम की दायीं आंख में लग गयी थी। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी पिछले साल जिम्बाब्वे के खिलाफ अंतिम टी20 मैच के दौरान बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में दाई आंख में बेल लग गयी थी। [ये भी पढ़ें: प्रिव्यू: सनराइजर्स हैदराबाद के जीत के रथ को रोकने उतरेगी रोहित शर्मा की मुंबई इंडियंस]

इन घटनाओं का संज्ञान लेते हुए एमसीसी ने नियम 8.3 में बदलाव करने का फैसला किया है। जिसके लिये दक्षिण अफ्रीका और ब्रिटेन की दो कंपनियों ने अपने डिजाइन सौंपे हैं। जिसमें टीथर लगी बेल होंगी लेकिन इससे बेल गिरने की तेजी और रफ्तार में कोई बदलाव नहीं होगा। एमसीसी के नियम संबंधित मैनेजर फ्रेजर स्टेवार्ट ने ईएसपीएनक्रिकइंफो से कहा, “अगर इससे किसी खिलाड़ी की आंख की रोशनी जाने से बचती है तो इस पर विचार करना महत्वपूर्ण था।” उन्होंने कहा, “कंपनियां अब भी इस पर काम कर रही हैं लेकिन एमसीसी ने नियमों में इस तरह की टीथर वाली बेल को अनुमति दे दी है। इसके बाद इसके इस्तेमाल की अनुमति देना संचालन संस्था पर निर्भर करता है।’’ [ये भी पढ़ें: दिल्ली डेयरडेविल्स बनाम राइजिंग पुणे सुपरजायंट मैच में बना अनोखा रिकॉर्ड]

नियम 8.3.4 के अनुसार अब, ‘‘खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिये ऐसे उपकरणों को रखने की अनुमति दी जाती है जिससे स्टंप से बेल के गिरते समय इसकी दूरी सीमित हो जायेगी लेकिन मैच के लिये इसकी मंजूरी संचालन संस्था और मैदानी अधिकारियों पर निर्भर करेगी। ’’