एम ए चिंदंबरम स्टेडियम चेन्नई  © Getty Images
एम ए चिंदंबरम स्टेडियम चेन्नई © Getty Images

खेलों में अगर बारिश बाधा डाल दे तो खेल का मजा किरकिरा हो जाता है। बारिश की बाधा से पार पाने के लिए विश्व के देशों ने कालांतर मे भिन्न-भिन्न प्रकार के उपायों को अपनाया। चीन ने सन् 2008 में ओलंपिक खेलों की सेरेमनी में बारिश को रोकने के लिए क्लाउड सीडिंग का इस्तेमाल करते हुए आसमान में मिसाइलों को दागा था और बारिश होने की संभावनाओं को खत्म कर दिया था। जिसके बाद चीन को प्रकृति से छेड़छाड़ करने के कारण विश्व भर की आलोचनाएं झेलनी पड़ी थी। क्रिकेट के खेल में भी समय-समय पर बारिश ने दखल दी है जिसका असर ऑस्ट्रेलिया में ज्यादातर देखने को मिला है। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट बोर्ड ने क्रिकेट में बारिश के दखल को खत्म करने के लिए एक विशेष स्टेडियम डॉकलैंड स्टेडियम में मैच करवाना शुरू किए।  भारत बनाम इंग्लैंड, पहले टेस्ट का स्कोरकार्ड जानने के लिए क्लिक करें…

क्या है डॉकलैंड स्टेडियम?: डॉकलैंड स्टेडियम मेलबर्न, विक्टोरिया का निर्माण साल 2000 में किया गया था। इस स्टेडियम के निर्माण में कुल 460 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर्स का खर्च आया था। यह स्टेडियम एक तरह का इन-डोर स्टेडियम है। इसे छत वाला स्टेडियम भी कहा जा सकता है। इस स्टेडियम में क्रिकेट के स्टेडियम की तरह सारी व्यवस्थाएं हैं। इसमें दर्शकों के बैठने की क्षमता 48,000 है। क्रिकेट के अलावा भी इस मैदान पर कई स्पोर्ट्स खेले जाते है। इस छत वाले स्टेडियम में पहला क्रिकेट मैच 16 अगस्त 2000 को ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने अपने नाम किया। वहीं इसके बाद भी इस मैदान पर कई मैच खेले गए जिसमें वर्ल्ड सीरीज प्रमुख है। वर्ल्ड सीरीज के एक मैच में ऑस्ट्रेलिया के माइक हसी के द्वारा मारा गया एक शॉट सीधे स्टेडियम की छत पर लगा था जिसके बाद अंपायर ने गेंद को डेड बॉल करार दिया। हालांकि इस स्टेडियम को ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई और अंततः 3 फरवरी 2006 को इस स्टेडियम में अंतिम मैच ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेला गया। इस मैच में भी जीत ऑस्ट्रेलिया की हुई।

इस स्टेडियम को लेकर क्रिकेट के गलियारों में खूब सुगबुगाहट भी हुई और कई क्रिकेट के जानकारों ने इस मैदान पर खेले जाने वाले क्रिकेट को अप्राकृतिक क्रिकेट बताया। उनका कहना था कि इस तरह की क्रिकेट से गेंद पर मौसम, पानी और नमी का प्रभाव नहीं पड़ता जिसके कारण गेंदबाजों को पिच से बिल्कुल मदद नहीं मिलती और खामियाजन क्रिकेट नीरस खेल बन जाता है।

बाद के सालों में इस तरह के स्टेडियम की छतों को और ऊंचा बनाने की बात भी सामने आई। जिसके बाद साल 2015 में एक बार फिर से छत वाले क्रिकेट स्टेडियम के बनने की मांग उठी। मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक 2019 क्रिकेट विश्व कप के मद्देनजर इंग्लैंड के हैडिंग्ले में ऐसे ही स्टेडियम को बनाने की योजना बनाई जा रही है। यह स्टेडियम आधुनिकता के मामले में और भी नवीन होगा और इसकी छत ऑटोमैटिक होगी, जिसको हटाया व लगाया जा सकेगा। हालांकि इसकी कीमत क्या होगा इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। इस तरह से क्रिकेट के सबसे विवादित नियमों में से एक डकवर्थ और लुईस नियम को क्रिकेट से दूर रखा जा सकेगा। डकवर्थ लुईस नियम की वजह से कालांतर में कई बड़ी टीमों को घाटा सहना पड़ा है।