गुजरात लायंस  © AFP
गुजरात लायंस © AFP

गुजरात लायंस के लिए आईपीएल 2017 कुछ खास नहीं रहा और उन्होंने सातवें नंबर पर रहकर खराब सीजन को अलविदा कहा। यह भी हो सकता है कि हम गुजरात लायंस को फिर कभी न देखें। दरअसल पिछले साल दो सीजन के लिए बैन की गईं टीमें चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स साल 2018 में वापसी करने के लिए तैयार हैं। इन दोनों टीमों के अधिकारियों के बेटिंग प्रकरण में शामिल होने के कारण साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति ने दोनों टीमों को अगले दो सीजनों के लिए निलंबित कर दिया था लेकिन इसके बावजूद आईपीएल चलता रहा और दो नई टीमों राइजिंग पुणे सुपरजायंट और गुजरात लायंस को शामिल करते हुए टूर्नामेंट के मजे को बरकरार रखा गया।

शुरुआत में इन दोनों टीमों को सिर्फ दो साल के लिए अनुबंधित किया गया था और अभी कोई नहीं जानता कि आईपीएल 2018 में 8 टीमों का टूर्नामेंट रहेगा या 10 टीमों का लेकिन समीकरणों को देखें तो पता चलता है कि लायंस और सुपरजायंट का वही हाल होगा जो पिछले सालों में डेक्कन चार्जस, पुणे वॉरियर्स और कोच्चि टसकर्स केरला का हुआ।

खराब टीम का चुनाव: अगर वास्तव में गुजरात लायंस के लिए 2017 अंतिम साल है तो वे जाहिर तौर पर एक खराब विरासत छोड़कर जा रहे हैं। क्योंकि जिस तरह से उन्होंने इस टूर्नामेंट की शुरुआत में टीम का चुनाव किया था उससे ही उनकी टीम की कमजोरी जाहिर हो गई थी। इस सीजन की शुरुआत में जिसने भी उनके बल्लेबाजों की फेहरिस्त को देखा तो कहा कि ये टीम जरूर टॉप 4 में पहुंचेगी। हां, कमी उनकी गेंदबाजी में जरूर थी क्योंकि उनकी बेंथ स्ट्रेंथ उतनी बढ़िया नहीं थी लेकिन बैटिंग उत्साहित करने वाली थी। बैटिंग के साथ समस्या ये थी कि उसमें विविधता नहीं थी बल्कि सभी एक जैसे विदेशी खिलाड़ी शामिल किए गए थे।

उनकी टीम के चारों विदेशी बल्लेबाज ओपनर थे। ये बात थोड़ा अजीब जरूर रही। क्योंकि जब ये चारों एक मैच में खेले तो उनमें से दो को मध्यक्रम में खेलना पड़ा और वह क्रम उन्हें नहीं भाया। जैसा कि सुरेश रैना तीसरे क्रम पर मुस्तैद थे तो चौथे, पांचवें नंबर की जिम्मेदारी अन्य दो विदेशी बल्लेबाजों को निभानी थी। इस क्रम पर स्मिथ खासे डांवाडोल नजर आए।

वहीं फिंच भी खास प्रदर्शन नहीं कर सके। बैटिंग का फेल होना इसलिए भी ज्यादा अखरा क्योंकि इस टीम की सारी आशाएं बैटिंग पर टिकी थीं। ऐसे में एक बात तो सभी के लिए उदाहरण बन गई कि टीम में चार ओपनरों को कतई न खिलााओ, वरना हाल वैसा ही होगा जैसा गुजरात का हुआ।[ये भी पढ़ें: साल 2016 में कोहली- डीविलियर्स ने बनाए थे 1660 रन, इस सीजन में पूरी टीम ने बनाए 1606 रन, पढ़ें पूरा लेखा-जोखा]

टाय के आने से बंधी थी आशाएं, चोटिल होने के बाद सबकुछ बिखर गया: बाद के मैचों में रॉय को हटाकर एंड्रयू टाय को टीम में शामिल किया गया। टाय ने तुरंत असर छोड़ा और सुपरजायंट के खिलाफ 17 रन देकर 5 विकेट झटके, जिसमें एक हैट्रिक भी शामिल थी। उनकी ‘नकल गेंद’ और गेंदबाजी में तुरत पेस के परिवर्तन ने गुजरात की गेंदबाजी आक्रमण को डूबते में तिनके का सहारा दिया था लेकिन जब एक मैच में बाउंड्री में डाइव लगाने के कारण टाय चोटिल हो गए तो लायंस की रही सही कमर टूट गई।

इस क्रिकेटर ने टीम के लिए कुल 6 मैच खेले लेकिन इसके बावजूद वह सीजन में टीम की ओर से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं। लायंस के पास ड्वेन ब्रावो उपलब्ध नहीं थे और इसका खामियाजा उन्हें विस्तृत स्तर पर उठाना पड़ा।

खली तूफानी गेंदबाज की कमी: लायंस की टीम में न ही कोई तूफानी गेंदबाज था और न ही कोई बेहतरीन स्पिनर। इसकी वजह से उन्हें बड़े स्कोर को बचाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने मौजूदा आईपीएल में चार मैच जीते और ये चारों मैच उन्होंने लक्ष्य का पीछा करते हुए जीते। जब उन्होंने पहले बल्लेबाजी की और बल्लेबाजों ने अपनी क्षमता के हिसाब से बल्लेबाजी भी की लेकिन वे उस स्कोर को नहीं बचा पाए। अपने पहले ही मैच में उन्होंने नाइट राइडर्स के खिलाफ 183 रन बनाए थे। केकेआर ने उस स्कोर को 31 गेंद शेष रहते हुए बिना कोई विकेट गंवाए हासिल कर लिया था। दूसरे मैच में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ वे एक विकेट ही ले पाए।

ये शुरुआती दो परिणाम खराब थे लेकिन अभी सबसे खराब परिणाम का आना बाकी था जब लायंस दिल्ली डेयरडेविल्स जैसी जूझती हुई टीम के खिलाफ 200 से ज्यादा का स्कोर नहीं बचा पाए। लायंस ने कार्तिक और रैना के अर्धशतकों की बदौलत 208 रन बनाए थे। जवाब में दिल्ली

डेयरडेविल्स ने उनके गेंदबाजों की बखिया उधेड़ दी और मैच 17.3 ओवरों में ही जीत डाला। इस दौरान ऋषभ पंत ने 97 रन ठोंके। कुल मिलाकर देखें तो इस टीम की बैटिंग तो ठीक रही लेकिन गेंदबाजी ने खासा नीचा दिखाया। अगर लायंस 2018 में वापसी करते हैं तो वे नीलामी में इस चीज को जरूर देखना चाहेंगे।