ऑस्ट्रेलिया दौरे पर अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) नियमित कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) के घर लौटने के बाद जिस टीम की कप्तानी कर रहे थे. उसे कंगारुओं के सामने बेहद कमजोर माना जा रहा था. रहाणे के कप्तानी हाथ में लेते ही एक के बाद एक कई स्टार भारतीय खिलाड़ी चोटिल हो रहे थे. लेकिन इसके बावजूद अजिंक्य रहाणे ने जिस तरह टीम की कमान संभाली और भारत को 2-1 से जीत दिलाई उससे हर कोई प्रभावित है. ऑस्ट्रेलिया में जब रहाणे ने टीम की कमान संभाली थी तब भारत 0-1 से पिछड़ा हुआ था और अंत तक रहाणे ने लगातार कमजोर हो रही टीम के साथ खेलते हुए 2-1 से यह सीरीज भारत को जिता दी.

पूर्व भारतीय कप्तान और दिग्गज स्पिनर बिशन सिंह बेदी (Bishan Singh Bedi) ने ऑस्ट्रेलिया की इस जीत के बाद कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) को सलाह दी है कि टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़कर अपने उपकप्तान अजिंक्य रहाणे को सौंप दें. बेदी ने कहा कि विराट कोहली को अपनी बल्लेबाजी पर और फोकस करना चाहिए, जिससे वह लंबे समय तक भारत को अपनी सेवा दे सकें. बेदी ने कहा कि अगर बतौर कप्तान विराट अगर कहीं फेल हो जाते हैं तो इससे उनकी बैटिंग भी प्रभावित हो सकती है.

वैसे बता दें भारत ने विराट की कप्तानी में 56 टेस्ट मैच खेले हैं और 58.92 के औसत से रिकॉर्ड 33 मैच अपने नाम किए हैं, जबकि 13 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है. अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने लेख में इस पूर्व दिग्गज कप्तान ने लिखा, ‘ऐसा नहीं समझा जाएगा कि मैं रहाणे को कप्तानी देने के लिए उनकी पीठ थपथपा रहा हूं. मैं यह बात सिर्फ इस मकसद से कह रहा हूं, जिससे विराट कोहली देश के लिए ज्यादा लंबे समय तक खेल सकें.’

उन्होंने कहा, ‘खेल के मैदान में जिम्मेदारियां बांटना राजनीति/कॉरपोरेट से अलग है, जहां लोग एक-दूसरे की गला काटने पर आमादा रहते हैं, जबकि खेल में खासतौर से क्रिकेट में यह देखा जाता है कि कप्तान जिस टीम का नेतृत्व करते हैं वह उसके प्रदर्शन के लिहाज से ही तैरते या डूबते हैं.’

बेदी ने अपने इस लेख में लिखा कि भारत के पास तीनों फॉर्मेट के लिए तीन अलग-अलग कप्तान होने चाहिए. रहाणे टेस्ट में कमान संभालें, जबकि विराट और रोहित सीमित ओवरों में जिम्मेदारी आपस में बांटें.

बेदी ने एक बार फिर साफ किया कि उनके दिमाग में बस यही है कि क्या भारत को विराट कोहली की जरूरत एक महान बल्लेबाज के तौर पर है या फिर एक औसत कप्तान के तौर पर? अपने इस लेख में बेदी ने अजिंक्य रहाणे की शानदार कप्तानी की तारीफ करते हुए उनकी तुलना भारत के महान कप्तानों में शुमार मंसूर अली खान पटौती से की है.

उन्होंने कहा कि किसी भी कप्तान को यह देखकर ही परखा जाता है कि वह कैसे अपने बॉलिंग संसाधनों का इस्तेमाल करता है. बस यहीं रहाणे ने मुझे अपना ‘मुरीद’ बना लिया है. किसी कप्तान के बॉलिंग चेंज और फील्ड प्लेसमेंट को समझने के लिए तीन टेस्ट का समय काफी है. मैंने बहुत कोशिश की कि मैं रहाणे की कप्तानी में कहीं कोई कमी ढूंढ सकूं लेकिन मेरे जैसे आलोचक को भी एक भी मौके पर उनका कोई भी निर्णय खराब नहीं लगा.