भारतीय टीम के ऑलराउंडर की तलाश क्या ये पूरा कर पाएंगे Photo courtesy: Twitter
भारतीय टीम के ऑलराउंडर की तलाश क्या ये पूरा कर पाएंगे Photo courtesy: Twitter

ऑलराउंडर ये शब्द सुनते ही दिमाग में गैरी सोबर्स, इयान बॉथम, इमरान खान, कपिल देव, रिचर्ड हैडली, जाक कालिस का चेहरा दिमाग में घूम जाता है। ये क्रिकेट की दुनिया के महानतम ऑलराउंडर्स हैं। बल्ले और गेंद दोनों से ही बराबर की योग्यता रखने वाले इन खिलाड़ियों ने ना जाने कितने मौकों पर टीम को जीत दिलाई होगी। मौजूदा क्रिकेट में एंजेलो मैथ्यूज, कोरी एंडरसन, साकिब-उल- हसन, जेम्स फॉकनर, मिचेल मार्श जैसे ऑलराउंडर अपनी-अपनी टीमों के लिए योगदान दे रहे हैं। लेकिन भारतीय टीम कपिल देव और मनोज प्रभाकर के जाने के बाद एक संम्पूर्ण ऑलराउंडर के लिए जूझ रही है। क्रिकेट को धर्म मानने वाले देश भारत में हरफनमौला खिलाड़ियों की कमी साफ देखी जा सकती है।

ऐसा नहीं है कि भारतीय टीम के पास हमेशा से ऑलराउंडर्स की कमी रही है। भारतीय टीम के पास वीनू मांकड़, कपिल देव, मदनलाल, चेतन चौहान, रवि शास्त्री, मनोज प्रभाकर जैसे उम्दा ऑलराउंडर रहे हैं। लेकिन पिछले दो दशकों से भारतीय टीम को एक प्रभावी ऑलराउंडर नहीं मिला। कपिल और प्रभाकर के बाद भारतीय के बाद एक सम्पूर्ण आलराउंडर के तौर पर थोड़ी बहुत सफलता रॉबिन सिंह को मिली। ALSO READ: सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली में बेहतर बल्लेबाज कौन?

रॉबिन सिंह खुद को टेस्ट लेवल पर साबित नहीं कर पाए © Getty Images
रॉबिन सिंह खुद को टेस्ट लेवल पर साबित नहीं कर पाए © Getty Images

रॉबिन सिंह ने अपने 136 मैचों के वनडे करियर में दो हजार से ज्यादा रन बनाने के अलावा 69 विकेट भी झटके। लेकिन रॉबिन सिंह खुद को टेस्ट क्रिेकेट में कभी साबित नहीं कर सके और वनडे स्पेशलिस्ट के टैग के साथ क्रिकेट खेलते रहे। रॉबिन सिंह के बाद भारतीय टीम में ऑलराउडंर की हैसियत से कई चेहरे आए और गए। कुछ को तो जबरदस्ती ऑलराउंडर बनाया गया जिसका परिणाम ये हुआ कि वो अपनी मुख्य क्षमता को भी गंवा बैठे। इरफान पठान इसका सबसे सटीक उदाहरण हैं। ALSO READ: टेस्ट क्रिकेट के पांच सबसे तेज शतक

ऑलराउंडर बनने के चक्कर में पठान को टीम से स्थान गंवाना पड़ा © Getty Images
ऑलराउंडर बनने के चक्कर में पठान को टीम से स्थान गंवाना पड़ा © Getty Images

रॉबिन सिंह के जाने के बाद भारतीय टीम ने लक्ष्मीरतन शुक्ला, रतिंदर सिंह सोढ़ी से लेकर इरफान पठान, युसुफ पठान, रविन्द्र जडेजा, स्टुअर्ट बिन्नी जैसे आलराउंडर्स को आजमाया। इनमें कुछ खिलाड़ियों की गेंदबाजी/बल्लेबाजी उनकी दूसरी योग्यता पर भारी थी। जैसे इरफान एक विशुद्ध गेंदबाज के तौर पर आए जिनके अंदर बल्लेबाजी की क्षमता थी, युसुफ पठान एक बल्लेबाज थे जो कामचलाऊ ऑफ स्पिन कर लेते थे। लक्ष्मीरतन, सोढ़ी, जडेजा और बिन्नी विशुद्ध ऑलराउंडर के तौर पर खेले लेकिन ये अपनी प्रतिभा को इंटरनेशनल लेवल पर साबित नहीं कर सके। ALSO READ: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्ही की धरती पर शतक बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज

जडेजा को एक गेंदबाज के रूप में ज्यादा सफलता मिली बल्लेबाजी में वो खुद को साबित नहीं कर पाए © Getty Images
जडेजा को एक गेंदबाज के रूप में ज्यादा सफलता मिली बल्लेबाजी में वो खुद को साबित नहीं कर पाए © Getty Images

लक्ष्मीरतन सिर्फ 3 वनडे खेल सके तो सोढ़ी को 16 वनडे खेलने का मौका मिला। बिन्नी अभी भी ऑलराउंडर बनने के लिए अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन सबमें सबसे ज्यादा मौका रविन्द्र जडेजा को मिला। रविन्द्र जडेजा मौजूदा भारतीय टीम के सदस्य हैं लेकिन टीम में वो एक गेंदबाज के तौर पर ही ज्यादा जाने जाते है। उनके बल्ले से कभी कभार ही रन निकले हैं। जडेजा ने 16 टेस्ट में मात्र 473 रन बनाए हैं तो उनके खाते में 68 विकेट है। जडेजा एक बल्लेबाज से एक बेहतर गेंदबाज हैं। ALSO READ: जब बिली बाउडन ने क्रिकेट के मैदान पर दिखाए रेड और यलो कार्ड

हार्दिक पांड्या टीम के स्पेशलिस्ट ऑलराउंडर की कमी को पूरा कर सकते हैं ©Getty Images
हार्दिक पांड्या टीम के स्पेशलिस्ट ऑलराउंडर की कमी को पूरा कर सकते हैं ©Getty Images

भारतीय टीम अभी भी एक स्पेशलिस्ट ऑलराउंडर की तलाश में लगी हुई है। जो बल्ले और गेंद दोनों से बराबर की योग्यता रखता हो। ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारत ने गुरकीरत सिंह मान, ऋषि धवन, हार्दिक पांड्या जैसे ऑलराउंडर्स को टीम में जगह दी गई। घरेलू क्रिकेट में इन तीनों ने शानदार प्रदर्शन कर टीम में जगह बनाई। गुरकीरत ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 22 मैचों में 1469 रन बनाने के अलावा 32 विकेट झटके तो ऋषि धवन ने 51 फर्स्ट क्लास मैचों में 2165 रन बनाने के अलावा 220 विकेट चटकाए हैं। जबकि हार्दिक ने 13 फर्स्ट क्लास मैचों में 594 रन बनाने के अलावा 17 विकेट झटके हैं।

गुरकीरत और ऋषि धवन को अभी अपनी प्रतिभा को और तराशने की जरूरत है Photo courtesy: Twitter
गुरकीरत और ऋषि धवन को अभी अपनी प्रतिभा को और तराशने की जरूरत है Photo courtesy: Twitter

गुरकीरत और धवन को वनडे सीरीज में खेलने का मौका मिला लेकिन ये दोनों प्रभावित करने में नाकाम रहे। गुरकीरत 3 मैचों में मात्र 13 रन बना सके, उनके हाथ कोई विकेट नहीं लगा। जबकि धवन ने 3 मैचों में 12 रन बनाने के अलावा 1 एक विकेट लिया। तो हम कह सकते हैं कि सीरीज में इन दोनों के हाथ में नाकामी लगी। लेकिन इनको चूका हुआ भी नहीं कह सकते। क्योंकि इनको खुद को साबित करने के लिए पर्याप्त मौका नहीं मिल सका है। लेकिन इन खिलाड़ियों के खेल को देखकर लगा कि इन खिलाड़ियों को अभी घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा को और ज्यादा तराशने की जरूरत है।

तो ले देकर भारतीय टीम को अभी भी अपने स्पेशलिस्ट ऑलराउंडर के लिए इंतजार करना पड़ेगा। ऋषि धवन, गुरकीरत, पांड्या या कोई और ये तो आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि ये इंतजार काफी लंबा हो चुका है।