रिषभ पंत © AFP
रिषभ पंत © AFP

कहते हैं क्रिकेट की दुनिया में अगर सफल होना है तो एक खिलाड़ी के अंदर खेल के लिए जुनून और जज्बा कूट-कूट कर भरा होना चाहिए। कुछ ऐसा ही जुनून और जज्बा टीम इंडिया के खिलाड़ी रिषभ पंत के अंदर दिखाई दिया।दरअसल  रिषभ पंत के पिता का बुधवार को निधन हो गया था। इस दौरान ऋषभ पंत अपनी टीम दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ प्रैक्टिस कर रहे थे, जैसे ही रिषभ को ये दुखद खबर मिली ऋषभ तुरंत अपने घर हरिद्वार चले गए, वहां उन्होंने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया और फिर उसके बाद वापस अपनी टीम के साथ जुड़ गए।

ऋषभ पंत के इस जज्बे को देखकर हर कोई हैरान रह गया कि पिता कि मौत के बाद भी वो तुरंत अपनी टीम के लिए खेलने मैदान पर उतर गए। यहां तक कि वो प्रैक्टिस सेशन में भी मौजूद रहे और नेट्स पर अच्छी फॉर्म में भी दिखे। मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच पैडी अपटन ने इस संबंध में पुष्टि की और कहा कि इस दुख की घड़ी में टीम पंत के साथ है।

रिषभ के टीम में शामिल होने से पहले अपटन ने कहा, “रिषभ टीम में शाम को शामिल होंगे। पूरी टीम रिषभ को अपना समर्थन देगी। वो युवा हैं, यह बहुत- बहुत कठिन है, खासकर जब ये परिवार में होता है।”  हालांकि, ये पहली बार नहीं है जब भारतीय टीम के सितारों ने दुख की घड़ी में अपने कर्तव्य को निभाया है। साल 1999 में  इंग्लैंड में खेले गए विश्व कप में सचिन तेंदुलकर अपने पिता के दाह संस्कार में शामिल होने के लिए केन्या के खिलाफ मैच के पहले भारत लौटे थे और बाद में वापस जाकर उन्होंने पूरा विश्व कप खेला था। [ये भी पढ़ें: प्रिव्यू: जीत की राह में लौटने को बेताब रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर]

वहीं भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली भी ऐसी ही मुश्किल परिस्थिति से गुजरे थे। जब वह रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की ओर से खेल रहे थे तब उन्हें अपनी पिता की मृत्यु के बारे में पता चला था। वह अंतिम संस्कार करने के बाद फिर से मैच खेलने को लौटे थे। रिषभ पंत ने भी कुछ ऐसा ही किया है जिससे साफ-साफ जाहिर होता है कि इस बल्लेबाज के लिए क्रिकेट से बढ़कर कुछ नहीं है।