रॉबिन उथप्पा भारतीय टीम में वापसी की जद्दोजहद में जुटे हैं © IANS
रॉबिन उथप्पा भारतीय टीम में वापसी की जद्दोजहद में जुटे हैं © IANS

कर्नाटक के शानदार बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा को लगता है कि भारतीय क्रिकेट भूल ही गया है। रॉबिन उथप्पा पिछले दो सालों से भारतीय टीम से बाहर हैं। रॉयर चैंलेजर्स बेंगलुरु के लिए खेलने वाले केएल राहुल को आईपीएल में बेहतरीन खेल के लिए उथप्पा से ज्यादा प्राथमिकता दी गई और राहुल को टीम में बतौर विकेटकीपर सलामी बल्लेबाज के तौर पर टीम में चुन लिया गया।

रणजी में कर्नाटक और आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेलने वाले रॉबिन उथप्पा टीम में चयन का दावा भी नहीं ठोक पाए और राहुल को उनके स्थान पर मौका दे दिया गया।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शुरुआत:

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उथप्पा की शुरुआत धमाकेदार रही और करियर के शुरुआत में ही उथप्पा ने गजब की प्रतिभा और परिपक्वता दिखाई। उथप्पा ने भारत की ओर से अपना पदार्पण साल 2006 में इंग्लैंड के खिलाफ किया था। पहले ही मैच में ओपनिंग करते हुए उथप्पा ने शानदार 86 रनों की पारी खेली। उथप्पा ने दिखा दिया था कि वह बड़े मंच के लिए एक दम तैयार हैं। भारत बनाम न्यूजीलैंड, दूसरा वनडे, स्कोर कार्ड देखने के लिए क्लिक करें…

इसके बाद साल 2007 में पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 विश्वकप में उथप्पा ने बेहतरीन 50 रनों की पारी खेली। उथप्पा की वो पारी इसलिए भी खास थी क्योंकि भारत का स्कोर एक समय 39/4 था। और ऐसे समय में उथप्पा ने न सिर्फ टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया बल्कि तेज रन भी बनाए। उथप्पा की इस पारी से ये साबित हो गया था कि उथप्पा किसी भी हालात में अच्छा खेल दिखा सकते हैं।

विकेट पर चहलकदमी करते हुए शॉट लगाना: साल 2007-08 में नेट-वेस्ट सीरीज में उथप्पा ने नंबर सात पर बल्लेबाजी करते हुए धमाकेदार 33 गेंदों पर 47 रनों की पारी खेली थी जो आज भी प्रशंसकों के जहन में ताजा है। उथप्पा का तेज गेंदबाजों के खिलाफ पिच पर चलकर शॉट खेलना बहुत ही लोकप्रिय हुआ और प्रशंसक उस शॉट के दीवाने हो गए। धोनी के हेलीकॉप्टर शॉट की तरह यह शॉट उथप्पा की पहचान बन गया। ये भी पढ़ें: सबसे ज्यादा टाई मैचों का रिकॉर्ड महेंद्र सिंह धोनी के नाम

औसत दर्जे का रिकॉर्ड:

भारत के लिए खेलते हुए 46 मैचों में उथप्पा का रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा और उथप्पा ने इस दौरान बेहद मामूली औसत से रन बनाए। इसके पीछे एक कारण यह भी रहा कि उथप्पा को भारत की टीम में ओपन से लेकर नमबर सात तक कहीं भी खिलाने लगे और परिस्थितियों के मुताबिक उथप्पा का बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव किए जाने लगे। बल्लेबाजी क्रम में लगातार बदलाव का नतीजा उथप्पा की बल्लेबाजी में दिखने लगा और वह पहले की तरह खेल दिखाने में सक्षम नहीं हो सके।

इसके बाद आईपीएल में कोलकाता की तरफ से गंभीर के साथ सलामी बल्लेबाजी में फिर से उथप्पा ने कमाल दिखाया और बेहतरीन प्रदर्शन किया और कोलकाता को आईपीएल का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

टीम में वापसी की उम्मीद:

ऐसा कहा जा सकता है कि भारतीय टीम की तस्वीर बदले, क्योंकि धोनी का युग अप अपने अंतिम पड़ाव पर है। भारतीय वनडे टीम में अभी कुछ जगह खाली हैं। टीम में ओपनिंग की जगह अभी खाली है, जहां एक तरफ रोहित शर्मा टीम के स्थाई ओपनर हैं तो उनके दूसरे साथी के रूप में अभी कोई अपनी जगह स्थापित नहीं कर सका है।

वहीं, राहुल, धवन और रहाणे टीम में 15 सदस्य के रूप में हैं। राहुल का विकेटकीपिंग भी करना उथप्पा को टीम में सलामी बल्लेबाज के तौर पर जगह नहीं दिलवा सकता, निचले क्रम की बात करें तो भारत को अच्छे फिनिशर की तलाश है और उथप्पा को इसमें महारत हासिल है। रॉबिन उथप्पा बड़े शॉट तो खेलते ही हैं साथ ही छोर भी बदलते रहते हैं और विपक्षी टीम पर दबाव बनाना जानते हैं।

आईपीएल 2106 में बतौर सलामी बल्लेबाज उथप्पा का स्ट्राइक रेट 135 का रहा था तो ये बताता है कि उथप्पा तेज तर्रार पारी खेलना बखूबी जानते हैं और निचले क्रम में वह काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

आईपीएल और घलेलू मैचों में प्रदर्शन:

कोलकाता नाइट राइडर्स पहले तीन संस्करण में अच्छा खेल नहीं दिखा सकी लेकिन गंभीर के कप्तान बनते ही और बेंगलुरू से कोलकाता में शामिल होते ही कोलकाता की हालत में जबर्दस्त सुधार देखने को मिला। उथप्पा के टीम में शामिल होते ही कोलकाता दो बार आईपीएल चैंपियन बना। विकेटकीपिंग के साथ सलामी बल्लेबाजी कर उथप्पा ने टीम को संतुलित कर दिया था।

उथप्पा की बल्लेबाजी में जो एक बात देखने को मिली वह ये थी कि उथप्पा जिस कारण से टीम से बाहर हुए थे उसमें उन्होंने सुधार किया। क्रीज पर जमने के बाद विकेट फेंकने की आदत को उथप्पा ने बदला और अपने विकेट की कीमत पहचानने लगे। 2015 में जिम्बाब्वे दौरे के लिए टीम में उथप्पा की वापसी हुई और टी-20 मैचों में उथप्पा ने एक बार फिर कमाल दिखाया। 2014-15 रणजी ट्रॉफी में उथप्पा ने अपने बल्ले से कमाल दिखाया और कर्नाटक को रणजी ट्रॉफी का खिताब हासिल हुआ। उथप्पा ने 19 मैचों में 50 की औसत से 912 रन बनाए।

अब जबकी टीम में युवा खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है तो ऐसे में उथप्पा को टीम में वापसी करने के लिए बहुत अच्छा खेल दिखाने की जरूरत होगी और अगर वह ऐसा कर पाते हैं तो टीम को उनसे काफी फायदा होगा।