Eng vs Pak: Pakistan’s Azhar Mahmood happy to help England bowlers
अजहर महमूद (Twitter)

पूर्व पाक क्रिकेटर अजहर महमूद को पाकिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज के दौरान इंग्लैंड टीम को कोच करने में कोई परेशानी नहीं है। महमूद का कहना है कि वो अपना अनुभव बांटकर खुश हैं।

45 साल के पूर्व क्रिकेटर को पाकिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से पहले इंग्लैंड टीम का नया गेंदबाजी सलाहकार बनाया गया है। इससे पहले महमूद मुख्य कोच मिकी आर्थर के कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान टीम के गेंदबाजी कोच थे।

इंग्लैंड-पाकिस्तान के बीच होने वाले दूसरे टी20 मैच से पहले महमूद ने कहा, “क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया है। अब मैं अपना अनुभव बांटना चाहता हूं, इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि खिलाड़ी इंग्लैंड के हो या पाकिस्तान के।”

पाकिस्तानी फैंस ने इंग्लैंड टीम के स्टाफ से जुड़ने के लिए महमूद की आलोचना की थी। इस पर उन्होंने कहा, “मैं एक पेशेवर खिलाड़ी हूं, मैंने अलग-अलग टीमों के लिए कई लीगों में खेला है।”

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इंग्लैंड के मुख्य कोच क्रिस सिल्वरवुड ने इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज ग्राहम थोरपे को इस टी20 सीरीज के लिए बागडोर सौंपी, जो सरे के महमूद के साथ खेले थे। इसके अलावा इंग्लैंड की सीमित ओवर फॉर्मेट टीम के कप्तान इयोन मोर्गन भी पाकिस्तान सुपर लीग में महमूद के साथ काम कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “उन्होंने खिलाड़ियों के साथ काम करने की मेरी काबिलियत को देखा है। इयोन मोर्गन ने मुझे बताया था कि ‘हमें आपकी काबिलियत पता है’ इंग्लैंड का कोचिंग स्टाफ एक अच्छा समूह है और ये मेरे लिए बड़ा मौका है।”

सीरीज के दूसरे मैच से पहले महमूद ने पाकिस्तान के गेंदबाजों के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “वहाब रियाज, मोहम्मद आमिर और अब शाहीन आफरीदी, ये सभी मेरे हाथों में बड़े हुए हैं।”

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साल 2017 में पाकिस्तान टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे महमूद को इस बात पर गर्व है कि उनके कार्यकाल में पाक टीम ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मैंने उन्हें चैंपियंस ट्रॉफी जिताने और लॉर्ड्स टेस्ट में नए अटैक को लाने में मदद की। हमने कम समय में काफी कुछ हासिल किया।”

पूर्व पाक कोच आर्थर जो अब श्रीलंका टीम के मुख्य कोच है ने कहा था कि वो पाकिस्तान टीम के साथ कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने से काफी निराश थे लेकिन महमूद ने इससे इंकार किया।

उन्होंने कहा, “मैं दुखी नहीं था। पीसीबी ने मुझसे विश्व तक कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाने की बात कही थी। जब हम सेमीफाइनल में नहीं पहुंचे, साल 2003 विश्व कप के अपने अनुभव से मुझे अंदाजा हो गया था कि जब आप कुछ जीतते नहीं हैं या फिर नॉकआउट स्टेज तक नहीं पहुंचते हैं तो किसी ना किसी को जाना होता है- चाहे खिलाड़ी हो या कोच। पाकिस्तान में ऐसा ही होता है।”